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Breast Cancer Awareness and Research: क्यों युवा महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है यह बीमारी... - News Express, NewsExpress24
स्वास्थ्य

Breast Cancer Awareness and Research: क्यों युवा महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है यह बीमारी…

Breast Cancer Awareness and Research: स्तन कैंसर को लेकर हाल ही में लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई के इंडोक्राइन एंड ब्रेस्ट सर्जरी विभाग ने एक बेहद महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। इस रिसर्च के परिणाम बताते हैं कि उम्र के साथ महिलाओं में इस बीमारी को लेकर संवेदनशीलता और समझदारी बढ़ जाती है। अध्ययन के मुताबिक (Breast Cancer Statistics) यह दर्शाते हैं कि 70 साल से अधिक उम्र की 70.7% बुजुर्ग महिलाएं बीमारी के शुरुआती चरण में ही डॉक्टर के पास पहुंच गईं, जबकि युवा महिलाओं में यह जागरूकता काफी कम देखी गई।

Breast Cancer Awareness and Research
Breast Cancer Awareness and Research

युवा महिलाओं में देरी से इलाज और बढ़ता खतरा

अध्ययन में यह पाया गया कि 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में स्तन कैंसर की पहचान करने में काफी देरी हो रही है। इस आयु वर्ग की केवल 51.4% महिलाएं ही समय पर अस्पताल पहुंच सकीं। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा महिलाओं में (Early Detection) की कमी के कारण बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। जब कैंसर शरीर में फैलने लगता है, तब जाकर युवतियां चिकित्सकीय परामर्श लेती हैं, जो उनके जीवन के लिए एक बड़ा जोखिम बन जाता है।

मौत के आंकड़ों ने बढ़ाई डॉक्टरों की चिंता

पीजीआई के इस शोध में सबसे डरावना पहलू स्तन कैंसर से होने वाली मौतों का प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार (Cancer Mortality Rates) का सबसे ऊंचा स्तर 40 वर्ष तक की युवतियों में देखा गया, जो कि 12.9% था। इसके विपरीत, 41 से 69 वर्ष की आयु वाली महिलाओं में यह प्रतिशत 9.9 और 70 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में 9.7 रहा। यह स्पष्ट करता है कि कम उम्र में होने वाला स्तन कैंसर अधिक आक्रामक और घातक साबित हो रहा है।

737 महिलाओं पर पांच साल तक चली सघन रिसर्च

यह अध्ययन कोई सामान्य सर्वे नहीं था, बल्कि वर्ष 2017 से 2021 के बीच पीजीआई आए कुल 737 मरीजों पर आधारित था। इन महिलाओं की (Average Patient Age) लगभग 50 वर्ष थी। शोधकर्ताओं ने इन्हें तीन श्रेणियों में विभाजित किया ताकि यह समझा जा सके कि उम्र का बीमारी के उपचार और उत्तरजीविता पर क्या प्रभाव पड़ता है। इस दौरान महिलाओं के जीवित रहने की अवधि और बीमारी के लक्षणों की पहचान करने के समय का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया।

विशेषज्ञों की टीम ने दी समय पर जांच की सलाह

इस महत्वपूर्ण अध्ययन को डॉ. रिनेले मैसकरहेनेस, डॉ. ज्ञान चंद और डॉ. गौरव अग्रवाल जैसे दिग्गज सर्जन्स की टीम ने अंजाम दिया। डॉ. ज्ञान चंद ने जोर देते हुए कहा कि (Oncology Treatment) की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि मरीज किस चरण में अस्पताल आ रहा है। शुरुआती चरण में पहचान होने पर न केवल इलाज आसान हो जाता है, बल्कि मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना भी कई गुना बढ़ जाती है।

स्तन कैंसर के चरणों का विस्तृत आयुवार विश्लेषण

रिसर्च के आंकड़ों पर गौर करें तो शुरुआती चरण में अस्पताल पहुंचने वाली युवतियों की संख्या सिर्फ 73 थी। वहीं (Advanced Stage Cancer) के मामलों में 41 से 69 वर्ष वाली महिलाओं का प्रतिशत 12.1 रहा। बुजुर्ग महिलाओं में गंभीर चरण में पहुंचने का प्रतिशत सबसे कम (7.3%) पाया गया। यह आंकड़ा साफ तौर पर बयां करता है कि बुजुर्ग महिलाएं अपने शरीर में होने वाले परिवर्तनों को लेकर अधिक सतर्क हैं और समय रहते मदद मांग रही हैं।

लक्षणों को पहचानना ही बचाव की पहली सीढ़ी है

अध्ययन के साथ ही डॉक्टरों ने उन लक्षणों के प्रति भी आगाह किया है जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं। स्तन में किसी भी तरह की गांठ, त्वचा का रंग बदलना या (Breast Lump Symptoms) को गंभीरता से लेना चाहिए। इसके अलावा निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना या त्वचा का पपड़ीदार होना भी खतरे की घंटी हो सकता है। शरीर के किसी भी असामान्य बदलाव को छिपाना नहीं चाहिए, बल्कि तुरंत जांच करानी चाहिए।

आधुनिक जीवनशैली और आनुवंशिक कारणों का बढ़ता प्रभाव

स्तन कैंसर के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जिनमें आनुवंशिकता सबसे प्रमुख है। इसके अलावा (Lifestyle Factors) जैसे कि मोटापा, देर से बच्चे होना, कम उम्र में मासिक धर्म का शुरू होना और बढ़ता प्रदूषण भी इस बीमारी को खाद-पानी दे रहे हैं। खराब खान-पान और शारीरिक सक्रियता की कमी ने भी युवा महिलाओं को इस बीमारी के रडार पर ला खड़ा किया है।

समय रहते कदम उठाना ही बुद्धिमानी है

अंततः यह शोध एक बड़ा सबक देता है कि स्तन कैंसर को लेकर लापरवाही मौत का कारण बन सकती है। महिलाओं को चाहिए कि वे (Self Examination) की आदत डालें और नियमित अंतराल पर स्क्रीनिंग कराती रहें। लखनऊ पीजीआई का यह अध्ययन समाज के लिए एक चेतावनी है कि कैंसर उम्र नहीं देखता, लेकिन आपकी जागरूकता आपकी उम्र जरूर बढ़ा सकती है।

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