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Mercedes Benz Price Hike 2026: लग्जरी कारों के शौकीनों की जेब पर गिरेगी महंगाई की बिजली, मर्सिडीज-बेंज ने किया चौंकाने वाला ऐलान

Mercedes Benz Price Hike 2026: भारतीय सड़कों पर लग्जरी और रसूख का पर्याय मानी जाने वाली मर्सिडीज-बेंज ने अपने ग्राहकों के लिए एक ऐसी खबर साझा की है, जो नए साल के उत्साह को थोड़ा कम कर सकती है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि आगामी कैलेंडर वर्ष 2026 में वह हर तीन महीने में अपनी कारों की कीमतों में इजाफा करने की योजना बना रही है। यह फैसला उन लोगों के लिए किसी झटके से कम नहीं है, जो (Luxury Car Market) लंबे समय से इस जर्मन ब्रांड की चमक को अपने गैराज का हिस्सा बनाने का सपना देख रहे थे।

Mercedes Benz Price Hike 2026
Mercedes Benz Price Hike 2026

यूरो के मुकाबले गिरते रुपए ने बिगाड़ा लग्जरी का गणित

इस बड़े फैसले के पीछे की सबसे प्रमुख वजह वैश्विक मुद्रा बाजार में रुपए की घटती साख है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO संतोष अय्यर ने स्पष्ट किया है कि यूरो के मुकाबले भारतीय रुपए के कमजोर होने से लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। चूंकि मर्सिडीज-बेंज के कई महत्वपूर्ण पार्ट्स और ऑपरेशंस (Foreign Exchange Impact) सीधे तौर पर यूरोपीय बाजार से जुड़े हैं, इसलिए विनिमय दर में होने वाला यह बदलाव सीधे तौर पर कार की अंतिम कीमत को प्रभावित कर रहा है।

जनवरी से शुरू होगा मूल्य वृद्धि का यह सिलसिला

कंपनी ने पहले ही यह घोषणा कर दी है कि 1 जनवरी, 2026 से उसके सभी प्रोडक्ट्स की कीमतों में 2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी प्रभावी हो जाएगी। मर्सिडीज के मुताबिक, यह बदलाव केवल मुनाफे के लिए नहीं है, बल्कि उस (Historical Average Exchange) असंतुलन को पाटने की एक कोशिश है, जो 2025 में यूरो-रुपए एक्सचेंज रेट के 100 रुपए के पार बने रहने की वजह से पैदा हुआ है। यह दर ऐतिहासिक औसत से काफी ज्यादा है, जिसने लग्जरी कार निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।

संतोष अय्यर ने समझाया घाटे और कीमतों का गणित

FICCI के एक विशेष कार्यक्रम के दौरान संतोष अय्यर ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले 18 महीनों में करेंसी की वैल्यू में जमीन-आसमान का अंतर आया है। पहले जहां एक यूरो के लिए 89 रुपए चुकाने पड़ते थे, वहीं अब यह दर 104-105 रुपए तक पहुंच गई है। यह लगभग (Currency Depreciation India) 15 से 18 प्रतिशत की भारी गिरावट है। इसी भारी गिरावट को धीरे-धीरे एडजस्ट करने के लिए कंपनी ने हर तिमाही कीमतों को बढ़ाने का कड़ा रास्ता चुना है।

ग्राहकों की जेब और डिमांड के बीच संतुलन की कोशिश

मर्सिडीज-बेंज इंडिया बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही है क्योंकि वह जानती है कि अचानक भारी कीमत बढ़ाने से ग्राहकों की मांग कम हो सकती है। अय्यर ने स्वीकार किया कि रुपए की गिरावट और वर्तमान प्राइस हाइक के बीच अब भी 10-15% का बड़ा अंतर बना हुआ है। इसलिए कंपनी (Consumer Demand Impact) को देखते हुए किस्तों में कीमतें बढ़ा रही है, ताकि मध्यम अवधि में ग्राहकों को झटके सहने की आदत हो जाए और ब्रांड की बिक्री पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

क्या हर तिमाही में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी तय

हालांकि कंपनी ने अभी तक 2026 की हर तिमाही के लिए सटीक आंकड़े तय नहीं किए हैं, लेकिन शुरुआती संकेतों की मानें तो यह बढ़ोतरी हर बार लगभग 2% के आसपास रह सकती है। इसका मतलब है कि साल के अंत तक कार की कीमत शुरुआती कीमत से 8 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकती है। यह (Quarterly Price Adjustment) रणनीति मर्सिडीज को फॉरेक्स चुनौतियों से लड़ने में मदद करेगी, लेकिन लग्जरी सेगमेंट के खरीदारों के लिए यह बजट मैनेजमेंट की एक नई चुनौती पेश करेगी।

बचत का अंतिम अवसर और भविष्य की रणनीति

अगर आप मर्सिडीज-बेंज की किसी क्लासिक सेडान या दमदार SUV को अपना बनाने की योजना बना रहे हैं, तो वर्तमान समय ही आपके लिए सबसे ज्यादा बचत वाला साबित हो सकता है। जैसे-जैसे साल आगे बढ़ेगा, इन कारों की (Strategic Car Purchase) कीमतें चढ़ती जाएंगी। संतोष अय्यर के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में प्रीमियम कारों का बाजार मुद्रा स्थिरता पर बहुत अधिक निर्भर करेगा और फिलहाल राहत के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।

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