Cyber Fraud Prevention Awareness: सावधान! आपके बैंक बैलेंस को जीरो कर सकता है मोबाइल पर आया एक छोटा सा मैसेज
Cyber Fraud Prevention Awareness: आज के दौर में जहां हम हर काम के लिए तकनीक पर निर्भर हैं, वहीं साइबर अपराधियों ने लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने का एक नया और बेहद शातिर तरीका ढूंढ निकाला है। हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का झूठा डर दिखाकर लोगों को ठगा जा रहा है। अपराधी (Cyber Security Threats) का फायदा उठाकर आपके डर और जल्दबाजी को अपना हथियार बना रहे हैं। यदि आपके पास भी मोबाइल पर कोई ऐसा संदेश आता है जो आपको चालान भरने के लिए उकसाता है, तो समझ लीजिए कि आप एक सोची-समझी साजिश के निशाने पर हैं।

कैसे बुना जाता है फर्जी चालान का मायाजाल
ठगी की शुरुआत एक साधारण से दिखने वाले टेक्स्ट मैसेज से होती है, जिसमें दावा किया जाता है कि आपके वाहन का चालान काटा गया है। इस मैसेज में एक लिंक होता है जिस पर क्लिक करते ही एक ऐसी वेबसाइट खुलती है जो दिखने में बिल्कुल आधिकारिक सरकारी पोर्टल जैसी लगती है। इस (Fake Website Identification) की चुनौती इतनी बड़ी है कि आम नागरिक इसके लोगो और भाषा को देखकर आसानी से धोखा खा जाते हैं। ठगों ने इन वेबसाइट्स को इस तरह डिजाइन किया है कि वे पूरी तरह से विश्वसनीय और पेशेवर महसूस होती हैं, जिससे पीड़ित का संदेह खत्म हो जाता है।
तीन विकल्पों के पीछे छिपा है खतरनाक सच
जब कोई व्यक्ति उस फर्जी वेबसाइट पर पहुंचता है, तो उसे बिल्कुल सरकारी ई-चालान पोर्टल की तरह ही तीन विकल्प दिए जाते हैं—वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, चालान नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर। जैसे ही आप इनमें से कोई भी विवरण भरते हैं और ‘गेट डिटेल’ पर क्लिक करते हैं, सिस्टम एक डमी चालान और करीब एक हजार रुपये की पेनल्टी दिखाने लगता है। यह (Phishing Attack Techniques) का एक हिस्सा है, जिसके जरिए पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वाकई में उसकी कोई पेनल्टी बकाया है और वह इसे जल्द से जल्द चुकाने की कोशिश करता है।
भुगतान के नाम पर खाते की पूरी सफाई
जैसे ही यूजर ‘पे नाउ’ या भुगतान के बटन पर क्लिक करता है, उसे एक ऐसे पेज पर ले जाया जाता है जहां एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग की पूरी जानकारी मांगी जाती है। कई बार ये अपराधी ट्रांजेक्शन पूरा करने के नाम पर आपके मोबाइल पर आने वाला ओटीपी भी मांग लेते हैं। जैसे ही आप यह (Sensitive Data Protection) साझा करते हैं, कुछ ही पलों के भीतर आपके बैंक खाते से पूरी रकम साफ कर दी जाती है। यह पूरी प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि पीड़ित को संभलने या ट्रांजेक्शन रोकने का मौका तक नहीं मिलता।
सरकारी विभाग कभी नहीं भेजते भुगतान का लिंक
इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी सरकारी संस्था या परिवहन विभाग कभी भी सीधे मैसेज के जरिए भुगतान करने के लिए कोई लिंक नहीं भेजता है। आधिकारिक नियमों के अनुसार, चालान की जानकारी और उसका सुरक्षित भुगतान केवल (Official Government Portals) जैसे कि ‘parivahan.gov.in’ पर ही किया जाना चाहिए। यदि कोई मैसेज आपको किसी अन्य लिंक पर भेज रहा है, तो वह शत-प्रतिशत फर्जी है। सरकार की प्रणाली पारदर्शी है और वह कभी भी आपसे आपकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी मैसेज के जरिए नहीं मांगती।
साइबर विशेषज्ञों की सलाह और सुरक्षा मंत्र
साइबर सुरक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस तरह की ठगी से बचने का एकमात्र तरीका जागरूकता और धैर्य है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक को खोलने से पहले उसकी यूआरएल (URL) की जांच जरूर करें। इस (Digital Safety Measures) को अपनाकर आप बड़े नुकसान से बच सकते हैं। कभी भी हड़बड़ी में कोई भुगतान न करें, खासकर तब जब वह मैसेज किसी अज्ञात नंबर से आया हो। आपके बैंक का पिन या ओटीपी आपकी अपनी संपत्ति है, जिसे किसी भी परिस्थिति में किसी वेबसाइट या व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
पुलिस और साइबर सेल की सक्रियता
देशभर की पुलिस और साइबर सेल इस नए ट्रेंड को लेकर अलर्ट मोड पर हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को ठगने वाले गिरोहों पर नकेल कसी जा रही है। पुलिस (Crime Reporting Procedure) के बारे में बताते हुए कहती है कि यदि आप किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि देखते हैं या गलती से ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो बिना समय गंवाए कार्रवाई करें। समय पर दी गई सूचना आपके पैसे वापस दिलाने में मदद कर सकती है और अपराधियों तक पहुंचने का रास्ता साफ कर सकती है।
ठगी होने पर क्या करें और कहां जाएं
अगर दुर्भाग्यवश आप इस जाल में फंस जाते हैं और आपके खाते से पैसे कट जाते हैं, तो घबराने के बजाय तुरंत कदम उठाएं। सबसे पहले अपने बैंक को सूचित कर कार्ड या खाता ब्लॉक कराएं। इसके तुरंत बाद (Cyber Crime Helpline 1930) पर कॉल करें या नजदीकी थाने में जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। आप ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी अपनी रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं। याद रखें, आपकी सतर्कता न केवल आपके पैसे बचाएगी, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी इन डिजिटल लुटेरों से सुरक्षित रखने में मदद करेगी।



