उत्तराखण्ड

Ankita Bhandari Case: क्या अंकिता को मिलेगा इंसाफ, कांग्रेस के इस बड़े ऐलान से हिल जाएगी सत्ता की कुर्सी…

Ankita Bhandari Case: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड ने एक बार फिर देवभूमि की शांत फिजाओं में आक्रोश का सैलाब ला दिया है। इंसाफ की कड़वी सच्चाई और रसूखदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। पार्टी ने इस संवेदनशील मुद्दे पर (Political Protest Strategy) को अंतिम रूप देते हुए चरणबद्ध आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने साफ कर दिया है कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलता और पर्दे के पीछे छिपे ‘वीआईपी’ बेनकाब नहीं होते, यह संघर्ष थमने वाला नहीं है।

Ankita Bhandari Case
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ब्लॉक स्तर से शुरू होगा विरोध का स्वर

कांग्रेस के रणनीतिकारों ने इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर योजना तैयार की है। गणेश गोदियाल ने महिला कांग्रेस और यूथ कांग्रेस सहित सभी आनुषंगिक संगठनों को 27 दिसंबर से मैदान में उतरने का कड़ा निर्देश दिया है। यह (Grassroots Activism Campaign) सीधे ब्लॉक स्तर पर आयोजित किया जाएगा, जहां कार्यकर्ता घर-घर जाकर सरकार की कथित नाकामियों को उजागर करेंगे। कांग्रेस का मानना है कि जनता के बीच जाकर ही इस हत्याकांड की कड़ियों और सत्ता के संरक्षण की हकीकत को सामने रखा जा सकता है।

नए साल में गढ़वाल मंडल में महासंग्राम की आहट

आंदोलन की रूपरेखा केवल दिसंबर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जनवरी 2026 तक खींचने की योजना है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि जनवरी के पहले सप्ताह में गढ़वाल मंडल में एक विशाल ‘अंकिता भंडारी को इंसाफ दो’ (Ankita Bhandari Case) रैली का आयोजन किया जाएगा। इस (Mass Mobilization Rally) के जरिए पार्टी अपनी ताकत का अहसास कराएगी और सरकार पर दबाव बनाएगी। इस रैली को अंकिता हत्याकांड की जांच में आ रही अड़चनों के खिलाफ एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

वायरल वीडियो और सरकार की भूमिका पर तीखे सवाल

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से मुखातिब होते हुए गणेश गोदियाल ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अंकिता हत्याकांड में सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों की भूमिका अब किसी से छिपी नहीं है। गोदियाल ने तर्क दिया कि (Evidentiary Video Leak) और ऑडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर रसूखदारों की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं। उनके अनुसार, कुछ मोहरों को जेल भेजकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती, क्योंकि असली गुनहगार अभी भी कानून की पहुंच से बाहर हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत का भावनात्मक दर्द

अंकिता हत्याकांड की गूंज केवल विपक्ष तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर भी नैतिक सवाल खड़े कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत ने इस विषय पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की छवि खराब करने वालों को माफी नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने (Moral Responsibility Standard) पर जोर देते हुए कहा कि अपराधी चाहे सगा संबंधी ही क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए। त्रिवेंद्र ने स्वीकार किया कि महिलाओं के प्रति ऐसे अपराधों की खबरें सुनकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से अत्यंत पीड़ा होती है।

नारों की हकीकत और महिला सुरक्षा का संकट

गणेश गोदियाल ने भाजपा के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारों पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे केवल एक दिखावा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि (Women Empowerment Challenges) के दौर में भाजपा के नेता ही महिलाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष का दावा है कि जब से प्रदेश में वर्तमान सरकार आई है, तब से महिलाओं के खिलाफ अपराधों के ग्राफ में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। उन्होंने सत्ता पर आरोप लगाया कि वह अपने उन नेताओं को संरक्षण दे रही है जो घिनौने अपराधों में संलिप्त पाए जाते हैं।

सीबीआई जांच की मांग पर अड़ा विपक्ष

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक बार फिर उच्च स्तरीय जांच की वकालत की है। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि इंसानियत का सवाल है, इसलिए सरकार को तुरंत (CBI Investigation Demand) को स्वीकार करना चाहिए। आर्य ने चेतावनी दी कि जब सत्ता और अनैतिक रसूख का गठजोड़ होता है, तो आम आदमी की बेटियों की सुरक्षा भगवान भरोसे हो जाती है। उनके अनुसार, हाल ही में सामने आए नए तथ्यों ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है और अब दूध का दूध और पानी का पानी होना जरूरी है।

रसूख और पैसे के गठजोड़ पर कड़ा प्रहार

यशपाल आर्य ने अपने बयान में अंकिता हत्याकांड को ‘सत्ता-संरक्षित दरिंदगी’ का एक भयावह उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि (Political Nexus Analysis) यह स्पष्ट करता है कि कैसे प्रभावशाली लोग कानून को अपनी मुट्ठी में रखने का प्रयास करते हैं। देवभूमि की पवित्रता और बेटियों के सम्मान को बचाने के लिए यह जरूरी है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो। आर्य का मानना है कि अगर अभी आवाज नहीं उठाई गई, तो भविष्य में न्याय की उम्मीद करना बेमानी होगा, क्योंकि पैसे और रसूख की ताकत सत्य को दबाने की कोशिश कर रही है।

उत्तराखंड की देवतुल्य जनता से न्याय की अपील

कांग्रेस का यह चरणबद्ध आंदोलन अब केवल एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बनने की दिशा में अग्रसर है। पार्टी ने राज्य की महिलाओं और युवाओं से अपील की है कि वे (Public Justice Forum) का हिस्सा बनें और अपनी आवाज बुलंद करें। अंकिता के माता-पिता की आंखों के आंसू आज पूरे उत्तराखंड से सवाल पूछ रहे हैं। आने वाले दिनों में ब्लॉक स्तर पर होने वाले प्रदर्शन और जनवरी की महा-रैली यह तय करेगी कि उत्तराखंड की राजनीति में शुचिता और न्याय का स्थान कहां है।

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