Tarique Rehman Vision for Bangladesh 2025: भविष्य के प्लान से दुनिया हैरान, बांग्लादेश के ‘मार्टिन लूथर किंग’ बनेंगे तारिक रहमान
Tarique Rehman Vision for Bangladesh 2025: बांग्लादेश की राजनीति ने वर्ष 2025 के समापन से ठीक पहले एक ऐसी करवट ली है, जिसकी गूंज पूरे दक्षिण एशिया में सुनाई दे रही है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व पीएम खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान 17 वर्षों के लंबे निर्वासन के बाद लंदन से अपनी सरजमीं पर लौट आए हैं। ढाका हवाई अड्डे से लेकर शहर की गलियों तक, लाखों समर्थकों की भीड़ ने जिस तरह उनका इस्तकबाल किया, उसने यह साफ कर दिया कि (Political Leadership Transition) की लहर अब बांग्लादेश में अपने चरम पर है। तारिक की यह लैंडिंग केवल एक नेता की वापसी नहीं, बल्कि एक नए राजनीतिक युग का आगाज मानी जा रही है।

‘आई हैव अ ड्रीम’ नहीं, ‘आई हैव अ प्लान’
अपनी पहली जनसभा को संबोधित करते हुए तारिक रहमान ने विश्व प्रसिद्ध नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर का जिक्र कर सबको चौंका दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह 1963 में किंग ने नस्लभेद के खिलाफ अपना सपना (I Have a Dream) साझा किया था, वैसे ही उनके पास भी बांग्लादेश के लिए एक व्यापक विजन है। रहमान ने जोर देकर कहा कि उनके पास केवल एक कोरा सपना नहीं बल्कि एक ठोस (Strategic National Plan) है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश के हर नागरिक के हितों की रक्षा करना, क्षेत्रीय विकास को गति देना और आम आदमी के भाग्य को बदलना है।
1971 के बाद 2024 को बताया ‘दूसरी आजादी’
तारिक रहमान ने अपने भाषण में 1971 के मुक्ति संग्राम और 2024 के हालिया राजनीतिक विद्रोह के बीच एक गहरा संबंध स्थापित किया। उन्होंने कहा कि देश ने पहली बार 1971 में स्वाधीनता हासिल की थी, लेकिन 2024 में बांग्लादेश के लोगों ने अपनी संप्रभुता और लोकतंत्र की रक्षा कर ‘दूसरी आजादी’ (Second Liberation of Bangladesh) पाई है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि यदि इस नए प्लान को धरातल पर उतारना है, तो हर व्यक्ति को कंधे से कंधा मिलाकर साथ देना होगा। उनके अनुसार, यह लड़ाई अब केवल सत्ता की नहीं बल्कि लोगों के बोलने के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा की है।
भेदभाव मुक्त मुल्क का संकल्प और शांति का संदेश
अपने 15 मिनट के संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली संबोधन में तारिक रहमान ने तीन बार ‘शांति’ शब्द का उपयोग किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएनपी का भरोसा एक ऐसे देश में है जहां मजहब या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को निशाना नहीं बनाया जाएगा। (Inclusive Governance Framework) की बात करते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश यहां रहने वाले हर व्यक्ति का मुल्क है और किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका यह संदेश अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अल्पसंख्यकों के बीच विश्वास बहाली की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
शहीद उस्मान हादी के खून का हिसाब और लोकतंत्र का कर्ज
भाषण के सबसे भावुक क्षणों में तारिक रहमान ने शरीफ उस्मान हादी को याद किया, जिनकी हाल ही में हत्या कर दी गई थी। हादी को लोकतंत्र का सिपाही बताते हुए रहमान ने कहा कि उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। (Human Rights and Justice) की मांग करते हुए उन्होंने संकल्प लिया कि देश हादी के खून का कर्ज चुकाए बिना चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी सरकार बनने पर उन सभी लोगों को न्याय दिलाया जाएगा जिन्होंने लोकतंत्र की बहाली के संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति दी है।
चुनावी रैलियों का शंखनाद और पीएम की दावेदारी
तारिक रहमान की वापसी के साथ ही बांग्लादेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वे जल्द ही देशव्यापी (Election Campaign Rallies) की शुरुआत करेंगे। अवामी लीग के कमजोर होने के बाद तारिक को भविष्य के प्रधानमंत्री के तौर पर सबसे मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। उनके भाषण ने यह संकेत दे दिए हैं कि वे अब केवल एक पार्टी नेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय नायक की छवि के साथ जनता के बीच जाएंगे। ढाका में उमड़ी यह भीड़ इस बात का प्रमाण है कि बीएनपी का जनाधार अब पहले से कहीं अधिक संगठित और उत्साहित है।
क्या तारिक रहमान बदल पाएंगे बांग्लादेश की तकदीर?
तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक अस्थिरता को ठीक करना है। उनके (Economic Development Proposals) में सामान्य लोगों के जीवन स्तर को सुधारने की बात कही गई है, लेकिन इसे लागू करना कांटों भरी राह हो सकती है। 17 साल देश से बाहर रहने के कारण उन पर लगे पुराने आरोपों और विवादों को पीछे छोड़कर जनता का पूर्ण विश्वास जीतना उनके लिए अनिवार्य होगा। हालांकि, उनके नए ‘प्लान’ ने युवाओं और मध्यम वर्ग में एक नई उम्मीद जरूर जगा दी है।
दक्षिण एशिया की राजनीति पर असर
बांग्लादेश में इस सत्ता परिवर्तन का असर केवल सीमा के भीतर ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों पर भी पड़ेगा। (Regional Geopolitics Shift) के तहत भारत और अन्य पड़ोसी देशों की नजरें इस बात पर होंगी कि तारिक रहमान की विदेश नीति कैसी रहती है। शांति और सबको साथ लेकर चलने के उनके वादे ने फिलहाल सकारात्मक संकेत दिए हैं। दिसंबर 2025 की यह शाम बांग्लादेश के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है, जो यह तय करेगी कि आने वाले दशकों में यह देश किस दिशा में आगे बढ़ेगा।



