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Indian Student Death In Germany: खुशियों की जगह मातम! संक्रांति पर घर आने की थी तैयारी पर तिरंगे में लिपटकर आएगा तेलंगाना का लाल

Indian Student Death In Germany: तेलंगाना के एक छोटे से गांव से जर्मनी तक का सफर तय करने वाले 25 वर्षीय हृतिक रेड्डी के लिए भविष्य की योजनाएं बहुत बड़ी थीं। वह अपनी आंखों में बेहतर भविष्य के सपने लिए यूरोप गया था, लेकिन किसे पता था कि नए साल की खुशियां एक कभी न खत्म होने वाले मातम में बदल जाएंगी। जर्मनी में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा (international student safety issues) यह युवा आज हमारे बीच नहीं है। उसकी मौत की खबर ने न केवल उसके परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि विदेश में पढ़ रहे हजारों छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

Indian Student Death In Germany
Indian Student Death In Germany

नए साल का जश्न और काल बनकर आई वह आग

हादसा बर्लिन के एक अपार्टमेंट में बुधवार देर रात पेश आया, जब पूरी दुनिया नए साल के स्वागत में डूबी हुई थी। स्थानीय अधिकारियों की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, जिस अपार्टमेंट में हृतिक रहता था, वहां अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि बचने का कोई रास्ता नहीं बचा। चारों तरफ से घिर चुके (emergency fire evacuation) के डर और धुएं के बीच हृतिक ने अपनी जान बचाने का आखिरी प्रयास किया। उसने अपार्टमेंट की ऊपरी मंजिल से छलांग लगा दी, जो उसके जीवन की आखिरी कोशिश साबित हुई।


आखिरी उम्मीद भी टूटी: अस्पताल में थमीं सांसे

ऊंचाई से गिरने के कारण हृतिक के सिर में गंभीर चोटें आईं, जिससे वह लहूलुहान हो गया। मौके पर मौजूद लोगों और बचाव दल ने उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों की एक टीम ने उसे बचाने के लिए घंटों मेहनत की, लेकिन (critical head injury treatment) के बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इलाज के दौरान हृतिक ने दम तोड़ दिया। उसके दोस्तों और साथ रहने वाले अन्य छात्रों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल था कि कुछ देर पहले तक हंसने-खेलने वाला उनका साथी अब हमेशा के लिए खामोश हो गया है।


तिरंगे में वापसी का इंतजार: सरकार से मदद की गुहार

हृतिक की दुखद मृत्यु के बाद जर्मनी में भारतीय दूतावास सक्रिय हो गया है। शोकाकुल परिवार और हृतिक के दोस्तों ने भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) से संपर्क साधा है। वे चाहते हैं कि (repatriation of mortal remains) की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि हृतिक का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव मलकापुर में किया जा सके। तेलंगाना के जनगांव जिले के इस छोटे से गांव में आज हर आंख नम है और लोग अपने लाल के अंतिम दर्शन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।


संक्रांति का वह अधूरा वादा: मां का इंतजार रह गया अधूरा

हृतिक रेड्डी जून 2023 में मैगडेबर्ग की यूरोप यूनिवर्सिटी से एमएस (MS) करने जर्मनी गया था। वह एक मेधावी छात्र था और अपने परिवार का सहारा बनना चाहता था। उसने पिछले साल दशहरा की छुट्टियां (overseas education planning) और पढ़ाई के चलते रद्द कर दी थीं। उसने अपनी मां से वादा किया था कि वह जनवरी के दूसरे हफ्ते में संक्रांति का त्यौहार मनाने घर आएगा। मां ने उसके स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी थीं, लेकिन घर आने की उस तारीख से पहले ही उसकी मौत की खबर पहुंच गई।


जांच के घेरे में हादसा: आखिर कैसे लगी अपार्टमेंट में आग?

जर्मनी के स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में गहन जांच के आदेश दिए हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अपार्टमेंट में आग लगने की असली वजह क्या थी। क्या यह नए साल की आतिशबाजी का नतीजा था या कोई शॉर्ट सर्किट? पुलिस (criminal investigation into fire) और फॉरेंसिक साक्ष्यों के जरिए सच्चाई का पता लगाने की कोशिश कर रही है। हृतिक के सहपाठियों का कहना है कि अपार्टमेंट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी, जिसके कारण आग इतनी जल्दी भयावह रूप ले ली।


विदेश में बढ़ते हादसे: भारतीय छात्रों की सुरक्षा पर चिंता

यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय छात्र की विदेशी जमीन पर इस तरह मौत हुई है। हाल के दिनों में टोरंटो से लेकर रूस तक कई दुखद घटनाएं सामने आई हैं। हृतिक की मौत ने (safety of indian students abroad) पर एक गंभीर विमर्श छेड़ दिया है। अभिभावक अब अपने बच्चों को विदेश भेजने से पहले वहां की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन सुविधाओं को लेकर डरे हुए हैं। सरकारों को चाहिए कि वे विदेशी शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर भारतीय छात्रों के लिए एक बेहतर सुरक्षा कवच तैयार करें।

आज मलकापुर गांव की गलियां खामोश हैं। जिस घर से शहनाई बजने या त्यौहार की खुशियां आने की उम्मीद थी, वहां अब केवल रोने की आवाजें आ रही हैं। हृतिक की मृत्यु (tragic loss of young talent) का एक ऐसा उदाहरण है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। एक होनहार इंजीनियर जो देश का नाम रोशन कर सकता था, वह प्रशासनिक खामियों या एक हादसे की भेंट चढ़ गया। अब पूरा गांव और परिवार बस यही प्रार्थना कर रहा है कि उनका बेटा जल्द से जल्द अपनी मिट्टी में लौट आए।

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