US Greenland Annexation Rumors: क्या अगला नंबर ग्रीनलैंड का है, वेनेजुएला के बाद ट्रंप प्रशासन की इस रहस्यमयी पोस्ट ने दुनिया को हिलाया…
US Greenland Annexation Rumors: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में कभी-कभी एक तस्वीर पूरे युद्ध से ज्यादा शोर मचा देती है। ट्रंप प्रशासन के सबसे शक्तिशाली चेहरों में से एक, स्टीफन मिलर की पत्नी कैटी मिलर ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा धमाका किया है, जिसकी गूँज वाशिंगटन से लेकर कोपेनहेगन तक सुनाई दे रही है। उन्होंने ग्रीनलैंड के नक्शे को अमेरिकी ध्वज के रंगों में रंगे हुए पोस्ट किया और उस पर सिर्फ एक शब्द लिखा— ‘जल्द ही’ (Soon)। यह पोस्ट उस वक्त आई जब अमेरिका ने वेनेजुएला में (Military intervention) को अंजाम देकर निकोलस मादुरो को कब्जे में लिया है, जिससे यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या ग्रीनलैंड पर भी कब्जा होने वाला है?

ट्रंप की पुरानी ‘इच्छा’ और राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क
डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड प्रेम किसी से छिपा नहीं है। वे लंबे समय से इस विशाल बर्फ से ढके द्वीप को अमेरिकी (National security) के लिए अनिवार्य बता चुके हैं। ‘द अटलांटिक’ को दिए एक ताजा साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट रूप से दोहराया, “हमें ग्रीनलैंड की जरूरत है, बिल्कुल।” ट्रंप का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस की बढ़ती घुसपैठ को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण समय की मांग है। वेनेजुएला की सफल कार्रवाई के बाद ट्रंप के इरादे अब और भी दृढ़ नजर आ रहे हैं।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड का कड़ा पलटवार: “बिकाऊ नहीं है हमारा देश”
कैटी मिलर की इस पोस्ट को डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेतृत्व ने अत्यंत अपमानजनक और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। डेनमार्क के राजदूत जेस्पर मोलर सोरेनसेन ने (Diplomatic integrity) का हवाला देते हुए याद दिलाया कि ग्रीनलैंड पहले से ही नाटो (NATO) का हिस्सा है और अमेरिका को मित्र देशों की क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। ग्रीनलैंड के प्रीमियर जेंस फ्रेडरिक नीलसेन ने स्पष्ट कर दिया कि उनके राष्ट्र का भविष्य किसी सोशल मीडिया पोस्ट से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और उनके लोगों की इच्छा से तय होगा।
मार्को रूबियो की चुप्पी और उभरते हुए संकेत
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस आग में घी डालने का काम किया है। रूबियो ने हाल ही में संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप जो कहते हैं, उसे वास्तविकता में बदलने का माद्दा रखते हैं। रूबियो के अनुसार, (Arctic shipping lanes) और खनिज संसाधनों पर नियंत्रण भविष्य की वैश्विक राजनीति की धुरी है। उन्होंने वेनेजुएला में अमेरिकी प्रभुत्व की तुलना करते हुए संकेत दिया कि अमेरिका अब अपने पश्चिमी गोलार्ध और रक्षा क्षेत्र में किसी भी तरह की चुनौती को स्वीकार नहीं करेगा।
वेनेजुएला के बाद क्या ग्रीनलैंड ‘टारगेट’ पर है?
सोशल मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अब यह चर्चा आम हो गई है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी सिर्फ एक शुरुआत थी। (Geopolitical expansion) की इस नई लहर में ग्रीनलैंड अगला लक्ष्य हो सकता है। ट्रंप द्वारा लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त करना इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। कई यूरोपीय देश इस स्थिति को बड़ी चिंता के साथ देख रहे हैं, क्योंकि वेनेजुएला जैसी कार्रवाई किसी नाटो सहयोगी के क्षेत्र में होने की कल्पना ही भयावह है।
संसाधनों की जंग और आर्कटिक का नया ‘ग्रेट गेम’
ग्रीनलैंड केवल बर्फ का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह तेल, गैस और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare earth elements) का खजाना है। जैसे-जैसे आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, वहां के समुद्री मार्ग और संसाधन भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ट्रंप प्रशासन की (Economic strategy) इसी खजाने पर नियंत्रण पाना है। कैटी मिलर की पोस्ट को इस रणनीतिक महत्वाकांक्षा का एक अनौपचारिक ऐलान माना जा रहा है, जो बताता है कि अमेरिका अब कूटनीतिक शिष्टाचार के बजाय सीधे कार्रवाई की भाषा बोल रहा है।
सहयोगियों के बीच दरार और नाटो का भविष्य
इस विवाद ने अमेरिका और उसके पुराने सहयोगियों के बीच गहरी दरार पैदा कर दी है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने कड़े शब्दों में ट्रंप से इन (Annexation threats) को बंद करने का आग्रह किया है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक सहयोगी के प्रति किया गया दुर्व्यवहार बताया। यदि अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर अपने रुख पर अड़ा रहता है, तो नाटो के भीतर एक बड़ा संकट पैदा हो सकता है, जो पूरे यूरोपीय सुरक्षा ढांचे को हिला कर रख देगा।



