Trent Share Price Crash: ट्रेंट के शेयरों में मची भयंकर तबाही ने निवेशकों की उड़ाई नींद, डूब रहा है टाटा का यह दिग्गज…
Trent Share Price Crash: टाटा ग्रुप की रिटेल दिग्गज कंपनी ट्रेंट के लिए मंगलवार की सुबह किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। जैसे ही शेयर बाजार के कपाट खुले, निवेशकों के बीच (Stock market volatility) का असर साफ देखा गया और ट्रेंट के शेयर बुरी तरह चरमरा गए। शुरुआती कारोबार में ही इसमें 8 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे कंपनी का मार्केट कैप एक झटके में काफी कम हो गया। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि बिकवाली का यह दबाव अभी थमता नजर नहीं आ रहा है।

बिजनेस अपडेट के आते ही निवेशकों का भरोसा डगमगाया
ट्रेंट के शेयरों में इस अचानक आई गिरावट के पीछे चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के ताजा बिजनेस अपडेट को जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि कंपनी ने कुछ सकारात्मक आंकड़े भी पेश किए हैं, लेकिन (Investor sentiment analysis) के लिहाज से वे बाजार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। नतीजों के बाद निवेशकों में मुनाफावसूली और डर का माहौल देखा गया, जिसका सीधा असर स्क्रीन पर लाल निशानों के रूप में नजर आने लगा और शेयर गिरकर 4060.65 रुपये के स्तर पर आ गए।
रेवेन्यू में उछाल के बावजूद क्यों घबरा रहा है बाजार?
एक्सचेंज फाइलिंग के आंकड़ों पर नजर डालें तो ट्रेंट का रेवेन्यू सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 5220 करोड़ रुपये रहा है। पिछले साल यह आंकड़ा 4466 करोड़ रुपये था, लेकिन (Corporate revenue growth) की यह रफ्तार विश्लेषकों को प्रभावित करने में नाकाम रही। बाजार को उम्मीद थी कि त्योहारी सीजन और शादियों के दौर में टाटा की यह रिटेल कंपनी और भी बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन नतीजों ने सबको चौंका दिया।
डबल डिजिट ग्रोथ की सुस्ती बनी चिंता का कारण
चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में कंपनी का रेवेन्यू 18 प्रतिशत की दर से बढ़कर 14,604 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पहली नजर में यह आंकड़ा ठीक लग सकता है, लेकिन (Financial performance metrics) की तुलना जब पिछले साल से की जाती है, तो तस्वीर धुंधली नजर आती है। पिछले वित्त वर्ष की शुरुआती तीन तिमाहियों में कंपनी ने 40 से 50 प्रतिशत की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की थी, जिसके मुकाबले मौजूदा 18 प्रतिशत की वृद्धि को बाजार एक बड़ी गिरावट के रूप में देख रहा है।
एक साल में खाक हो गई निवेशकों की आधी दौलत
ट्रेंट के शेयरों का प्रदर्शन पिछले एक साल में बेहद निराशाजनक रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में यह स्टॉक 41 प्रतिशत से अधिक लुढ़क चुका है। जो शेयर 6 जनवरी 2025 को 6998.35 रुपये पर कारोबार कर रहा था, वह आज (Long term investment risks) की जीती-जागती मिसाल बन गया है। इस गिरावट ने उन लंबी अवधि के निवेशकों को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है, जिन्होंने टाटा के भरोसे इस कंपनी में बड़ी पूंजी निवेश की थी।
52 हफ्तों के शिखर से धड़ाम हुआ टाटा का यह स्टॉक
अगर ट्रेंट के शेयरों के उच्चतम स्तर की बात करें तो यह अपने 52 हफ्ते के हाई लेवल से 44 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुका है। कंपनी के शेयरों ने 7349.95 रुपये का शिखर छुआ था, लेकिन वहां से शुरू हुआ गिरावट का सिलसिला (Bearish market trend) में बदल गया है। पिछले 6 महीनों में ही कंपनी की वैल्यू में 25 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे तकनीकी चार्ट पर भी यह स्टॉक काफी कमजोर नजर आ रहा है।
बिकवाली के दबाव में पिस रहा है रिटेल सेक्टर
टाटा ग्रुप की इस कंपनी पर पिछले कुछ समय से लगातार सेलिंग प्रेशर देखा जा रहा है। बाजार के जानकारों का कहना है कि (Retail industry challenges) और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने ट्रेंट जैसी बड़ी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाला है। हालांकि ट्रेंट के पास ‘वेस्टसाइड’ और ‘जूडियो’ जैसे मजबूत ब्रांड्स हैं, लेकिन बदलती आर्थिक परिस्थितियों और घटती डिमांड ने कंपनी की ग्रोथ इंजन को धीमा कर दिया है, जिसका असर शेयर कीमतों पर स्पष्ट है।
क्या 52 हफ्ते के निचले स्तर की ओर बढ़ रहा है ट्रेंट?
फिलहाल ट्रेंट के शेयर अपने 52 हफ्ते के लो लेवल 3931.45 रुपये के बेहद करीब पहुंच गए हैं। यदि गिरावट का यह दौर जारी रहता है, तो यह (Technical support levels) को तोड़कर और नीचे जा सकता है। निवेशकों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह शेयर खरीदने का सही मौका है या अभी और गिरावट का इंतजार करना चाहिए। टाटा ग्रुप की साख को देखते हुए कुछ विश्लेषक इसे रिकवरी की उम्मीद भी मान रहे हैं, लेकिन फिलहाल बाजार का रुख नकारात्मक ही बना हुआ है



