Rishikesh Religious Sentiment Case: मुर्दों के बिस्तर से चल रहा था मुनाफे का गंदा खेल, पुलिस के हत्थे चढ़े 3 आरोपी
Rishikesh Religious Sentiment Case: उत्तराखंड की पवित्र तीर्थनगरी ऋषिकेश से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया है, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी चोट पहुंचाई है। रानीपोखरी पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो मृत व्यक्तियों के अंतिम संस्कार के बाद फेंके गए सामान से व्यापार कर रहा था। (Religious Sentiments Hurt) के इस गंभीर मामले ने स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर हिंदू मान्यताओं और पवित्रता के सिद्धांतों के खिलाफ है।

श्मशान के बिस्तरों से रुई निकालने का घिनौना काम
पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी उन बिस्तरों और रजाई-गद्दों को निशाना बनाते थे जिन्हें परिजन मृत्यु के बाद त्याग देते थे। ऋषिकेश के पूर्णानंद घाट पर अंतिम संस्कार के बाद, लोग अक्सर मृतक के बिस्तर ‘सात मोड़’ नामक स्थान पर एक पीपल के पेड़ के नीचे छोड़ देते हैं। आरोपी (Dead Person Bedding Misuse) के तहत वहां से ये गंदे और पुराने बिस्तर उठाते थे और उनके भीतर से रुई निकालकर उसे नई रुई में मिला देते थे।
रानीपोखरी पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारी
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब रानीपोखरी निवासी अमित सिंह ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। अमित ने अपनी तहरीर में बताया कि ऋषिकेश क्षेत्र में कुछ लोग मृतकों की रुई को बाजार में खपा रहे हैं। थाना प्रभारी विकेंद्र चौधरी के नेतृत्व में पुलिस ने (Police Raid in Rishikesh) की कार्रवाई करते हुए रानीपोखरी चौक स्थित एक दुकान पर छापा मारा। मौके पर आरोपों की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को रंगे हाथों धर दबोचा।
अमरोहा और ऋषिकेश के आरोपियों का गठजोड़
पकड़े गए आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के अमरोहा निवासी सलमान (24 वर्ष) और उसके पिता हामिद अली (55 वर्ष) के रूप में हुई है। इनके साथ ऋषिकेश निवासी संजय (35 वर्ष) भी शामिल था, जो रजाई-गद्दों की डिलीवरी का काम करता था। (Interstate Criminal Nexus) के जरिए ये लोग इस काले धंधे को अंजाम दे रहे थे। संजय पुराने गद्दे इकट्ठा करके सलमान और हामिद को बेचता था, जो बाद में उस रुई को नया रूप देकर निर्दोष ग्राहकों को बेच देते थे।
आस्था और शुद्धता पर गहरा आघात
हिंदू धर्म में मृतक के बिस्तरों का इस्तेमाल वर्जित माना जाता है और उन्हें अशुद्ध समझकर त्याग दिया जाता है। ऐसे में उसी रुई को दोबारा बाजार में बेचना न केवल (Sacred Traditions Violation) है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा है। मृतक के कपड़ों या बिस्तरों में कई तरह के बैक्टीरिया या संक्रमण हो सकते हैं, जिन्हें अनजाने में लोग अपने घरों में ले जा रहे थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह खेल कितने समय से चल रहा था।
सात मोड़ और पीपल के पेड़ का काला सच
पुलिस पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि आरोपी विशेष रूप से ‘सात मोड़’ स्थित पीपल के पेड़ के नीचे नजर रखते थे। (Funeral Rituals Misuse) का फायदा उठाकर वे उन सामानों को उठाते थे जिन्हें लोग शोक की स्थिति में वहां छोड़ जाते थे। इस स्थान को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है, लेकिन आरोपियों ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया था। पुलिस ने वह सारा माल भी बरामद कर लिया है जो बाजार में बेचने के लिए तैयार किया गया था।
भारतीय न्याय संहिता के तहत कड़ी कार्रवाई
रानीपोखरी पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। (Legal Action Against Accused) सुनिश्चित करते हुए पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धोखाधड़ी करने के मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों और निवासियों ने प्रशासन से ऐसी दुकानों पर नियमित चेकिंग की मांग की है।
ग्राहकों के लिए विशेष चेतावनी और संदेश
ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब नए रजाई-गद्दे खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। (Consumer Awareness Tips) के तहत सलाह दी जा रही है कि केवल विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदारी करें और रुई की शुद्धता की जांच स्वयं करें। यह मामला एक बड़ा सबक है कि कैसे चंद रुपयों के लालच में लोग न केवल कानून तोड़ रहे हैं, बल्कि समाज की अटूट आस्था और स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं।
निष्कर्ष: शुद्धता और विश्वास की रक्षा जरूरी
तीर्थनगरी ऋषिकेश अपनी पवित्रता के लिए विश्व विख्यात है और इस तरह की घटनाएं इसकी छवि को धूमिल करती हैं। पुलिस की (Rishikesh Police Vigilance) ने समय रहते इस गिरोह को पकड़कर एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया है। अब यह समाज और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे ऐसी कुरीतियों और अपराधों के खिलाफ आवाज उठाएं ताकि भविष्य में कोई भी श्रद्धा और विश्वास के साथ ऐसा व्यापार करने की हिम्मत न कर सके।



