Uttarakhand Weather Update 2026: क्या रूठ गई है कुदरत, उत्तराखंड में जानलेवा हुआ बारिश का सूखा, आखिर कब बरसेंगे बादल…
Uttarakhand Weather Update 2026: उत्तराखंड के मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों की चोटियों तक इस समय कुदरत का एक अजीब और डरावना मिजाज देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी दी है कि भले ही आसमान शुष्क रहे, लेकिन (Severe Cold Wave Conditions) के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होने वाला है। राज्य के मैदानी जिलों में घने कोहरे की सफेद चादर ने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है, वहीं ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पाला गिरने से हड्डियां कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है। यह स्थिति केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि पर्यावरण में आ रहे बड़े बदलावों की ओर एक गंभीर इशारा है।

कोहरे के आगोश में सिमटे मैदानी जिले
हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जनपदों में सुबह के वक्त दृश्यता शून्य के करीब पहुंच रही है, जिससे सड़क यातायात पूरी तरह ठप होने की कगार पर है। मौसम विभाग के अनुसार (Dense Fog Visibility Alerts) केवल इन दो जिलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नैनीताल, चम्पावत, पौड़ी और देहरादून के मैदानी इलाकों में भी कोहरे का जबरदस्त असर देखा जा रहा है। घने कोहरे के कारण दफ्तर जाने वालों और स्कूली बच्चों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि सूरज की किरणें दोपहर तक जमीन को छू नहीं पा रही हैं।
पहाड़ों में पाले का आतंक और फिसलन का डर
एक तरफ मैदान कोहरे से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ पहाड़ों में पाला लोगों की मुसीबत बढ़ा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के मुताबिक (Frost Risk in Mountains) के चलते सड़कों पर पाले की एक महीन परत जम रही है, जिससे वाहनों के फिसलने का खतरा बढ़ गया है। पहाड़ों में रात का तापमान जमाव बिंदु के आसपास पहुंचने से पानी की पाइपलाइनें तक जाम हो रही हैं। यह पाला न केवल बागवानी को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि पैदल चलने वाले स्थानीय निवासियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है।
रिकॉर्डतोड़ सूखा और प्यासी धरती की पुकार
उत्तराखंड के लिए सबसे चिंताजनक खबर यह है कि नवंबर और दिसंबर के बाद अब जनवरी का महीना भी पूरी तरह सूखा बीत रहा है। साल 2016 के बाद यह पहली बार है जब दिसंबर में एक बूंद बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार (Winter Rainfall Deficit) का स्तर इतना बढ़ गया है कि जनवरी के पहले सप्ताह में होने वाली औसत 8.6 एमएम बारिश इस बार शून्य रही है। बारिश और बर्फबारी न होने का सीधा असर राज्य के ग्लेशियरों और खेती-किसानी पर पड़ रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है।
खेती और सेहत पर मौसम की दोहरी मार
लंबे समय से सूखे के कारण उत्तराखंड की कृषि और बागवानी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बारिश न होने से रबी की फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। इसके साथ ही (Seasonal Health Issues) भी तेजी से बढ़ रहे हैं। सूखी ठंड और धूल के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत, खांसी और जुकाम जैसी बीमारियां घेर रही हैं। डॉक्टरों का मानना है कि जब तक अच्छी बारिश नहीं होती, तब तक वातावरण में मौजूद प्रदूषक तत्व और वायरस खत्म नहीं होंगे।
देहरादून में धूप और ठंड का अजीब खेल
राजधानी देहरादून में मौसम का एक अनोखा और विरोधाभासी रूप देखने को मिल रहा है। यहां दिन के समय चटख धूप खिलने से तापमान सामान्य से तीन डिग्री ऊपर चला जाता है, जिससे लोगों को हल्की गर्मी महसूस होती है। लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है, (Diurnal Temperature Variation) के कारण पारा अचानक गिर जाता है और कड़ाके की ठंड शुरू हो जाती है। बुधवार को देहरादून का अधिकतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो दिन में राहत तो देता है लेकिन रात की कंपकंपी को और भी ज्यादा कष्टदायक बना देता है।
ऊधमसिंह नगर में ‘कोल्ड डे’ का सितम
मैदानी क्षेत्रों में ऊधमसिंह नगर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बनी हुई है, जहां सूरज के दर्शन न होने के कारण (Cold Day Conditions) की घोषणा की गई है। जब अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे गिर जाता है और कोहरा छाया रहता है, तो उसे ‘शीत दिवस’ माना जाता है। यहां के लोग अलाव के सहारे दिन काटने को मजबूर हैं। प्रशासन ने जगह-जगह रैन बसेरों और अलाव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बेघर और जरूरतमंद लोगों को इस जानलेवा सर्दी से बचाया जा सके।
कब मिलेगी इस कड़ाके की ठंड से राहत
फिलहाल मौसम विभाग की भविष्यवाणियां किसी बड़े बदलाव की ओर संकेत नहीं कर रही हैं। आने वाले कुछ दिनों तक (Weather Forecast Uttarakhand) सामान्यतः शुष्क ही रहने वाला है। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता का इंतजार पूरे राज्य को है, क्योंकि वही एकमात्र जरिया है जो पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानों में बारिश ला सकता है। तब तक उत्तराखंड के निवासियों को इस सूखी ठंड, पाले और घने कोहरे के बीच ही अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना होगा।



