Sudden Alarm Heart Health Risks: आपके दिल को जानलेवा इलेक्ट्रिक शॉक दे रही है सुबह के खतरनाक अलार्म की आवाज
Sudden Alarm Heart Health Risks: सुबह की पहली किरण के साथ जब एक कर्कश अलार्म की आवाज सन्नाटे को चीरती है, तो वह केवल आपकी नींद नहीं तोड़ती, बल्कि आपके नाजुक दिल को एक गहरे ‘शॉक’ की स्थिति में डाल देती है। हममें से अधिकांश लोग इसे एक सामान्य आदत मानते हैं, लेकिन (Medical Science Perspectives on Alarms) के अनुसार, यह शरीर के साथ की जाने वाली एक हिंसक शुरुआत है। न्यूरोलॉजिस्ट और हृदय रोग विशेषज्ञों का दावा है कि गहरी नींद से अचानक झटके के साथ जागना ब्लड प्रेशर को किसी रॉकेट की तरह बढ़ा सकता है। यह ‘साइलेंट स्ट्राइक’ उन लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है जो पहले से ही हृदय संबंधी विकारों या तनाव से जूझ रहे हैं।

बायोलॉजिकल धमाका: क्या कहते हैं कार्डियोलॉजिस्ट?
सीके बिरला अस्पताल के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव कुमार गुप्ता इस स्थिति को एक ‘बायोलॉजिकल धमाका’ करार देते हैं। उनके अनुसार, जब आप (REM Sleep Cycles) यानी गहरी नींद के चरण में होते हैं, तो आपका हृदय और मस्तिष्क अपने सबसे शांत और स्थिर स्तर पर होते हैं। जैसे ही अलार्म बजता है, मस्तिष्क इसे किसी संभावित खतरे या हमले की तरह लेता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर का ‘फाइट या फ्लाइट’ सिस्टम सक्रिय हो जाता है और कोर्टिसोल व एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर अचानक आसमान छूने लगता है। यह स्थिति दिल की धड़कन को कुछ ही सेकंड में बेकाबू कर सकती है।
एड्रेनालाईन का स्पाइक और कमजोर दिल पर आघात
जब अलार्म की तेज आवाज कानों में पड़ती है, तो शरीर में एड्रेनालाईन का स्तर अचानक बढ़ जाता है। यह (Hormonal Surge Impact) न केवल ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है, बल्कि कमजोर धमनियों वाले लोगों के लिए यह स्थिति हार्ट फेलियर या एंजाइना का कारण भी बन सकती है। स्वस्थ शरीर तो इस झटके को सहन कर लेता है, लेकिन हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीजों के लिए सुबह की यह पहली आवाज किसी दुश्मन से कम नहीं होती।
स्लीप इनर्शिया और व्यायाम से भी अधिक हृदय पर दबाव
शोधकर्ताओं ने पाया है कि गहरी नींद के दौरान हमारा हार्ट रेट सबसे न्यूनतम स्तर पर होता है। अलार्म इस शांतिपूर्ण अवस्था को इतनी क्रूरता से तोड़ता है कि हृदय पर पड़ने वाला दबाव (Physical Stress Comparison) में किसी भारी व्यायाम के दौरान होने वाले दबाव से भी अधिक हो सकता है। इसे ‘स्लीप इनर्शिया’ के दौरान महसूस किया जाने वाला कार्डियोवैस्कुलर तनाव कहा जाता है, जो सुबह-सुबह आपके हृदय तंत्र को अस्त-व्यस्त करने के लिए काफी है।
स्नूज बटन: बार-बार दिया जाने वाला कार्डियोवैस्कुलर शॉक
अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो हर पांच मिनट में स्नूज बटन दबाते हैं, तो सावधान हो जाइए। जब आप (Snooze Button Dangers) के शिकार होते हैं, तो आपका शरीर हर 10 मिनट में एक नए ‘कार्डियोवैस्कुलर शॉक’ की स्थिति से गुजरता है। जैसे ही आप दोबारा नींद की आगोश में जाने लगते हैं, अलार्म फिर बज उठता है। यह बार-बार होने वाला उतार-चढ़ाव हृदय की धमनियों पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे लंबे समय में दिल की बीमारियां पनपने लगती हैं।
सुबह के समय ही क्यों आते हैं सबसे ज्यादा हार्ट अटैक?
आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि दिल के दौरे और स्ट्रोक के सबसे ज्यादा मामले सुबह के समय ही दर्ज किए जाते हैं। इसका मुख्य कारण शरीर की (Circadian Rhythm Disruption) और प्राकृतिक बायोलॉजिकल क्लॉक का बिगड़ना है। अलार्म की कर्कश आवाज नर्वस सिस्टम को उत्तेजित कर इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है। सुबह का समय शरीर के लिए पहले ही संवेदनशील होता है, और यह कृत्रिम शोर उस संवेदनशीलता को खतरे में बदल देता है।
सूरज की रोशनी: प्रकृति का सबसे सौम्य अलार्म
अगर आप अपने दिल को ‘अलार्म शॉक’ से बचाना चाहते हैं, तो प्रकृति के करीब लौटें। सूरज की रोशनी सबसे बेहतरीन (Natural Wake Up Methods) में से एक है। जब सुबह की किरणें आपकी पलकों को छूती हैं, तो मस्तिष्क मेलाटोनिन बनाना बंद कर देता है और सेरोटोनिन बढ़ाता है, जिससे आप धीरे-धीरे और शांति से जागते हैं। रात को पर्दे थोड़े खुले रखने मात्र से आप इस प्राकृतिक प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं।
स्मार्ट गैजेट्स और हाइड्रेशन तकनीक का उपयोग
आजकल बाजार में ‘सनराइज अलार्म क्लॉक’ जैसे (Gradual Wake Up Technology) उपलब्ध हैं, जो धीरे-धीरे रोशनी बढ़ाकर आपको जगाते हैं। इसके अलावा, एक बहुत पुराना देसी नुस्खा है ‘हाइड्रेशन हैक’। सोने से पहले एक गिलास पानी पीकर सोएं, सुबह ब्लैडर का प्राकृतिक दबाव आपको बिना किसी कर्कश शोर के जगा देगा। साथ ही, अपनी ‘इंटरनल बायोलॉजिकल क्लॉक’ को प्रशिक्षित करने के लिए सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करें, ताकि अलार्म की जरूरत ही न पड़े।



