Devendra Fadnavis on Mahayuti Alliance Politics: देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र की राजनीति में ‘महाभारत’ और गठबंधन के रहस्यों से उठाया पर्दा
Devendra Fadnavis on Mahayuti Alliance Politics: महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों की तपिश और बीएमसी (BMC) के रण के बीच उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की वर्तमान सियासी हलचल पर अपनी खामोशी तोड़ी है। उन्होंने विपक्षी दलों के हमलों का कड़ा जवाब देते हुए साफ किया कि राजनीति केवल भावनाओं पर नहीं, बल्कि रणनीतियों पर चलती है। (political alliances in Maharashtra) को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने यह संदेश दिया कि राज्य के विकास और अपनी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सत्ता का होना अनिवार्य है, चाहे इसके लिए कुछ समझौते ही क्यों न करने पड़ें।

अजीत पवार के साथ गठबंधन और रणनीतिक लचीलापन
अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ हाथ मिलाने पर हो रही आलोचनाओं का उत्तर देते हुए फडणवीस ने उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि अजीत पवार के साथ गठबंधन एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। फडणवीस के अनुसार, वह एक ऐसे राजनेता हैं जो (strategic political flexibility) की कला में माहिर हैं और जानते हैं कि कब पीछे हटना है और कब आगे बढ़ना है। उनके इस लचीलेपन ने महायुति गठबंधन को एक नई मजबूती प्रदान की है, जो आने वाले समय में विरोधियों के लिए बड़ी चुनौती बनेगा।
सिद्धांतों की लड़ाई और महाभारत का वह ऐतिहासिक संदर्भ
अजीत पवार का पहले विरोध करने और अब साथ होने पर फडणवीस ने महाभारत का उदाहरण देते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब हम केवल अपने सिद्धांतों पर अड़े रहे, तो हमें राजनीतिक रूप से काफी नुकसान उठाना पड़ा। अपनी जनकल्याणकारी नीतियों को जमीन पर उतारने के लिए सत्ता की चाबी आवश्यक है। उन्होंने तर्क दिया कि (power vs principles debate) कोई नई बात नहीं है, क्योंकि महाभारत के धर्मयुद्ध में भी विजय प्राप्त करने के लिए कई तरह के समझौते किए गए थे। उनके अनुसार, यह निर्णय जनहित को ध्यान में रखकर लिया गया है।
2029 का विजन और महायुति की अटूट ताकत
स्थानीय निकाय चुनावों में भले ही गठबंधन के दल अलग-अलग चुनावी मैदान में हों, लेकिन देवेंद्र फडणवीस ने भविष्य की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने घोषणा की कि 2029 और उसके बाद के चुनावों के लिए (Mahayuti coalition strength) पूरी तरह अडिग और मजबूत है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता को आश्वस्त किया कि यह गठबंधन केवल तात्कालिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के दीर्घकालिक भविष्य और स्थिरता के लिए बनाया गया है, जो आने वाले सालों में राज्य की राजनीति की धुरी बना रहेगा।
फ्रीबीज की संस्कृति और चुनावी वादों का बढ़ता चलन
मुफ्त उपहारों या ‘फ्रीबीज’ की बढ़ती राजनीति पर फडणवीस ने बेबाकी से अपनी राय रखी। शिवसेना (यूबीटी) और मनसे द्वारा घरेलू सहायिकाओं को मासिक भत्ता देने के वादे और खुद बीजेपी द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स न बढ़ाने के वादों पर उन्होंने कहा कि यह वर्तमान का एक अनिवार्य (political trend of freebies) बन चुका है। उन्होंने स्वीकार किया कि आज के दौर में कोई भी राजनीतिक दल इससे बच नहीं सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि शायद पांच साल बाद जनता और राजनीति की प्राथमिकताएं बदलें और स्थिति में सुधार आए।
मुंबई की सड़कों को जाम मुक्त बनाने का मेगा प्लान
मुंबईकरों के लिए ईज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने हेतु फडणवीस ने बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स की रूपरेखा साझा की। उन्होंने वादा किया कि बांद्रा सी-लिंक से बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) तक एक विशेष (underground tunnel project Mumbai) का निर्माण किया जाएगा। इस योजना के तहत एक टनल कुर्ला की ओर और दूसरी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की ओर जाएगी, जिसे बाद में कोस्टल रोड से जोड़ दिया जाएगा। इस कदम से मुंबई की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होने की उम्मीद है।
प्रदूषण मुक्त मुंबई और सीवेज ट्रीटमेंट का विजन
बुनियादी ढांचे के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी बीजेपी के विजन का अहम हिस्सा है। फडणवीस ने बताया कि मुंबई में प्रदूषण को नियंत्रित करने और समुद्री जल को स्वच्छ रखने के लिए और अधिक (sewage treatment plants expansion) लगाए जाएंगे। इसके अलावा, मेट्रो लाइनों का विस्तार और उपनगरीय रेल नेटवर्क को अपग्रेड करना उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। उनका लक्ष्य मुंबई को एक विश्वस्तरीय महानगर के रूप में स्थापित करना है, जहां आधुनिकता और स्वच्छता का संतुलन हो।
अंबरनाथ की चूक और स्थानीय राजनीति के कड़वे सबक
अंबरनाथ में शिवसेना के साथ गठबंधन न हो पाने पर फडणवीस ने अपनी गलती स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं किया। उन्होंने माना कि स्थानीय नेताओं की आपसी और व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण वहां (local alliance failure reasons) पैदा हुई, जो एक रणनीतिक भूल थी। उन्होंने कहा कि राजनीति में व्यक्तिगत द्वेष से ऊपर उठकर संगठन के हित में सोचना जरूरी है। इस अनुभव से सीख लेते हुए पार्टी भविष्य में स्थानीय स्तर पर तालमेल बिठाने के लिए अधिक सतर्क रहेगी।
बीजेपी का आत्मविश्वास और सहयोग के खुले दरवाजे
देवेंद्र फडणवीस ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि बीजेपी अपने दम पर सत्ता में आने की क्षमता रखती है। उन्होंने पार्टी कैडर में जोश भरते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, लेकिन हम सहयोगियों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। (NCP Ajit Pawar collaboration) की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि भविष्य के लिए सहयोग के दरवाजे हमेशा खुले रखे गए हैं। पार्टी का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी स्थिर सरकार देना है जो केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सके।
महाराष्ट्र के विकास के लिए बदली रणनीति
फडणवीस का यह पूरा संबोधन इस बात का संकेत है कि बीजेपी अब ‘इमोशनल पॉलिटिक्स’ के बजाय ‘रिजल्ट ओरिएंटेड पॉलिटिक्स’ पर ध्यान दे रही है। (Maharashtra future development vision) को लेकर फडणवीस ने जो खाका खींचा है, वह स्पष्ट करता है कि उनके लिए सत्ता का अर्थ केवल पद नहीं, बल्कि विकास के कार्यों को गति देना है। अब देखना यह होगा कि जनता उनके इन तर्कों और वादों पर निकाय चुनाव और आगामी विधानसभा चुनावों में कितनी मुहर लगाती है।



