Munger Anganwadi Child Abuse Incident: तार-तार हुई रिश्तों की मर्यादा, न्याय मांगने पर कुल्हाड़ी से हुआ प्रहार
Munger Anganwadi Child Abuse Incident: बिहार के मुंगेर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने समाज की सुरक्षा व्यवस्था और नैतिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जमालपुर थाना क्षेत्र के दौलतपुर में स्थित एक आंगनबाड़ी केंद्र, जिसे बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र माना जाता है, वहां दो मासूम बच्चियों के साथ घिनौनी हरकत की गई। कुछ असामाजिक तत्वों ने इन नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर वहां बुलाया और उन्हें (inappropriate digital content) दिखाकर उनके मन मस्तिष्क को दूषित करने का प्रयास किया। यह घटना दर्शाती है कि समाज के कुछ हिस्सों में विकृति किस कदर घर कर चुकी है कि वे बच्चों को भी अपना शिकार बनाने से नहीं हिचक रहे।

खौफ के साये में कटी वो पांच काली रातें
पीड़ित बच्चियों की मां द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह पूरी वारदात करीब पांच दिन पहले की है। आरोपी उन बच्चियों को फुसलाकर सुनसान आंगनबाड़ी भवन ले गए थे, जहाँ उन्हें अश्लील वीडियो दिखाए गए। बच्चियां किसी तरह अपनी जान और गरिमा बचाकर वहां से भाग निकलीं, लेकिन (psychological trauma impact) इतना गहरा था कि उन्होंने डर के मारे कई दिनों तक यह बात किसी को नहीं बताई। जब परिजनों को इस बात की भनक लगी और उन्होंने विश्वास में लेकर पूछा, तब जाकर उस खौफनाक सच का खुलासा हुआ जिसने पूरे परिवार के होश उड़ा दिए।
इंसाफ की गुहार पर खूनी संघर्ष का तांडव
जब पीड़ित परिवार ने हिम्मत जुटाकर आरोपियों के घर जाकर इस घृणित कृत्य का विरोध किया, तो उन्हें न्याय मिलने के बजाय हिंसा का सामना करना पड़ा। आरोपी राम बहादुर मंडल और उसके तीनों बेटों ने अपनी गलती मानने के बजाय (violent physical assault) शुरू कर दी। विवाद इतना बढ़ा कि आरोपियों ने लाठी-डंडों और कुल्हाड़ी जैसे जानलेवा हथियारों से पीड़ित परिवार पर हमला बोल दिया। इस बर्बरता में बच्चियों के पिता का सिर फट गया और उनके देवर भी लहूलुहान होकर गंभीर रूप से घायल हो गए, जो समाज की हिंसक मानसिकता का डरावना चेहरा है।
पुलिस की त्वरित दबिश और आरोपियों की घेराबंदी
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए आदर्श थाना जमालपुर की पुलिस तुरंत हरकत में आई। एसएचओ पंकज कुमार पासवान के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसकी कमान एसआई यशोदा कुमारी को सौंपी गई। पुलिस ने (criminal identification process) को तेज करते हुए नामजद चारों आरोपियों—राम बहादुर मंडल, रूपम कुमार उर्फ प्रीतम, चंदन कुमार और बेचन कुमार को उनके ठिकानों से दबोच लिया। पुलिस की इस मुस्तैदी ने पीड़ित परिवार को यह भरोसा दिलाया है कि कानून अभी जिंदा है और अपराधियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी।
आंगनबाड़ी केंद्रों की सुरक्षा और निगरानी पर सवाल
इस घटना ने सरकारी संस्थानों, विशेषकर आंगनबाड़ी केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आखिर कैसे बाहरी लोग इन परिसरों का उपयोग (illegal activities monitoring) के बिना अश्लील कृत्यों के लिए कर पा रहे हैं? स्थानीय प्रशासन को अब इन केंद्रों की कार्यप्रणाली और वहां तैनात कर्मियों की जवाबदेही तय करनी होगी। यदि ऐसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों पर भी बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो अभिभावकों का तंत्र पर से विश्वास उठना लाजमी है।
पीड़ित बच्चियों के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती
कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ अब सबसे बड़ी जरूरत उन बच्चियों की काउंसलिंग और मानसिक पुनर्वास की है। इस उम्र में देखी गई अश्लीलता और उसके बाद परिवार पर हुए हिंसक हमले उनके कोमल मन पर (long term psychological effects) छोड़ सकते हैं। समाज और प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि वे बच्चियां खुद को दोषी न समझें और सामान्य जीवन में लौट सकें। न्याय केवल गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि उस सुरक्षात्मक वातावरण के निर्माण से मिलेगा जहां भविष्य में ऐसी कोई हिमाकत न कर सके।
पुलिस प्रशासन का सख्त रुख और कानूनी धाराएं
आदर्श थाना पुलिस ने इस मामले में पोक्सो एक्ट (POCSO) और मारपीट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। एसएचओ पंकज कुमार पासवान ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में (zero tolerance policy) अपनाई जा रही है। आरोपियों को कोर्ट में पेश कर कड़ी सजा दिलाने की तैयारी की जा रही है। पुलिस का यह कड़ा संदेश अन्य असामाजिक तत्वों के लिए चेतावनी है कि वे कानून के लंबे हाथों से बच नहीं पाएंगे।
सामाजिक जागरूकता और एकजुटता का समय
मुंगेर की इस घटना ने समाज के हर जिम्मेदार नागरिक को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हमें अपने आस-पास की गतिविधियों के प्रति (vigilant community behavior) अपनाने की जरूरत है। यदि हम अपने बच्चों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो केवल पुलिस पर निर्भर रहने के बजाय हमें खुद भी सजग होना होगा। अपराधियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले इस परिवार की हिम्मत काबिले तारीफ है, और अब पूरे समाज को उनके साथ खड़ा होना चाहिए ताकि न्याय की यह लड़ाई अंजाम तक पहुंच सके।



