Suspension of female sub inspector in Uttarakhand: न्याय दिलाने वाली महिला दरोगा ही निकली आरोपी की मददगार, लालकुआं में पुलिसिया खेल का हुआ भंडाफोड़
Suspension of female sub inspector in Uttarakhand: उत्तराखंड के नैनीताल जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लालकुआं क्षेत्र में एक दुष्कर्म पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय, जांच अधिकारी महिला दरोगा पर ही आरोपी को फायदा पहुंचाने और पीड़िता को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगा है। (Professional misconduct in police investigations) का यह मामला तब तूल पकड़ा जब पीड़िता ने सीधे उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई। विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और न्याय की उम्मीद लगाए बैठी पीड़िता को एक नई किरण दिखाई दी है।

प्रेम जाल और लिव-इन की आड़ में धोखा
इस पूरे विवाद की जड़ साल 2025 के एक संगीन मामले से जुड़ी है। लालकुआं कोतवाली में एक महिला ने तहरीर दी थी कि भगवत सरन नाम के एक शख्स ने उसे अपने प्रेम जाल में फंसाया। आरोपी ने शादी का झूठा झांसा देकर पीड़िता के साथ (Physical assault under false promise of marriage) जैसा अपराध किया और लंबे समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहा। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी न केवल पहले से शादीशुदा है, बल्कि उसके दो बच्चे भी हैं। जब पीड़िता ने अपने हक के लिए शादी का दबाव बनाया, तो आरोपी अपनी असली रंगत पर उतर आया और उसे जान से मारने की धमकियां देने लगा।
जब रक्षक ही बन गया भक्षक
पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ जब विवेचना महिला उपनिरीक्षक (एसआई) अंजू यादव को सौंपी गई। पीड़िता का आरोप है कि (Biased police investigation reports) तैयार करने के लिए दरोगा ने आरोपी से हाथ मिला लिया था। निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय, महिला दरोगा पीड़िता पर ही केस वापस लेने या बयान बदलने का दबाव बनाने लगी। एक महिला अधिकारी का दूसरी महिला के प्रति ऐसा संवेदनहीन व्यवहार देखकर स्थानीय लोग भी आक्रोशित हैं।
एसएसपी की आंतरिक जांच में खुली पोल
मामले की गंभीरता और पीड़िता के अविश्वास को देखते हुए एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने इस प्रकरण की आंतरिक जांच के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट में जो तथ्य निकलकर सामने आए, वे बेहद शर्मनाक थे। (Internal affairs probe in law enforcement) ने पुष्टि की कि एसआई अंजू यादव ने मामले की जांच बेहद सरसरी तौर पर की थी और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नजरअंदाज किया गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि दरोगा ने आरोपी भगवत सरन को कानूनी शिकंजे से बचाने के लिए उसे अनुचित लाभ पहुंचाने की पूरी कोशिश की थी।
पीड़िता को धमकाने का आरोप हुआ सिद्ध
विभागीय जांच में सबसे गंभीर बात यह निकलकर आई कि दरोगा अंजू यादव ने जांच के दौरान पीड़िता को ही डराया और धमकाया था। (Harassment of crime victims by officials) की इस पुष्टि ने पुलिस की छवि को धूमिल कर दिया है। एसएसपी ने पाया कि विवेचना अधिकारी ने आरोपी के रसूख के आगे घुटने टेक दिए थे और वह पीड़िता को ही दोषी ठहराने की साजिश रच रही थी। पुलिस मैनुअल के खिलाफ जाकर की गई इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि व्यवस्था के भीतर कुछ काली भेड़ें न्याय की राह में रोड़ा बनी हुई हैं।
एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी का कड़ा फैसला
जांच रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया। उन्होंने (Disciplinary action against sub inspector) के तहत एसआई अंजू यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। एसएसपी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वर्दी की धौंस दिखाकर किसी भी अपराधी को बचाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरोगा के निलंबन की खबर से लालकुआं क्षेत्र में उन लोगों को राहत मिली है जो इस मामले को करीब से देख रहे थे।
नए सिरे से शुरू होगी दुष्कर्म मामले की विवेचना
महिला दरोगा के निलंबन के बाद अब इस केस को एक नए और ईमानदार अधिकारी को सौंपने की तैयारी पूरी कर ली गई है। एसएसपी ने आश्वासन दिया है कि (Impartial criminal case reinvestigation) के जरिए उन तमाम साक्ष्यों को दोबारा इकट्ठा किया जाएगा जिन्हें पूर्व विवेचना अधिकारी ने गायब या कमजोर करने की कोशिश की थी। पुलिस प्रशासन का लक्ष्य अब यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी भगवत सरन को उसके किए की सजा मिले और पीड़िता को वह सम्मान और न्याय वापस मिल सके जिसकी वह हकदार है।
पुलिस महकमे के लिए एक कड़ा सबक
लालकुआं की इस घटना ने पूरे पुलिस महकमे को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर दिया है। दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामलों में अगर महिला अधिकारी ही पक्षपात करने लगें, तो समाज का कानून पर से भरोसा उठना तय है। (Police accountability and ethical standards) को बनाए रखने के लिए इस तरह की दंडात्मक कार्रवाइयां बहुत जरूरी हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भविष्य में भी अगर किसी अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग किया, तो उसके खिलाफ निलंबन से भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



