Global Peace Initiative: शांति के वैश्विक अखाड़े में पीएम मोदी की एंट्री से हैरान हुई दुनिया
Global Peace Initiative: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा और मध्य पूर्व में जारी अशांति को समाप्त करने के लिए एक अभूतपूर्व पहल की है। ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विशेष रूप से पत्र लिखकर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। इस ऐतिहासिक (International Diplomacy) कदम को ट्रंप ने वैश्विक संघर्षों को सुलझाने का एक साहसिक दृष्टिकोण बताया है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस निमंत्रण की पुष्टि करते हुए इसे भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण माना है।

आखिर क्या है यह बोर्ड ऑफ पीस
अमेरिकी प्रशासन इस निकाय को गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के रूप में देख रहा है। वॉशिंगटन का उद्देश्य (Geopolitical Stability) सुनिश्चित करना है ताकि गाजा और उसके आसपास के क्षेत्रों में फिर से समृद्धि लौट सके। यह बोर्ड केवल युद्ध को रोकने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में दुनिया के अन्य हिस्सों में चल रहे तनावों को कम करने में भी अपनी निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
गाजा के नवनिर्माण की बड़ी जिम्मेदारी
इस निकाय का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण कार्य गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण की देखरेख करना है। बोर्ड को वहां के शासन की निगरानी करने और वित्तपोषण का समन्वय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अगर भारत (Global Leadership) के मंच पर इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो वह गाजा में मानवीय सहायता और आधारभूत ढांचे के विकास में अपनी विशेषज्ञता साझा कर सकेगा। यह एक ऐसा मंच होगा जहां दुनिया के दिग्गज देश मिलकर मानवता के लिए काम करेंगे।
सदस्यता की शर्तें और वित्तीय ढांचा
डोनाल्ड ट्रंप स्वयं इस शक्तिशाली बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे और भारत को शुरू में तीन साल की सदस्यता का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, लंबे समय तक स्थाई सदस्य बने रहने के लिए (Foreign Policy) के तहत देशों को आर्थिक योगदान देना अनिवार्य होगा। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि स्थाई सदस्यता के लिए प्रत्येक राष्ट्र को 1 बिलियन डॉलर का योगदान देना होगा, जिसका उपयोग गाजा के पुनर्निर्माण और बोर्ड की शांति गतिविधियों के लिए किया जाएगा।
शुरुआती तीन साल और भारत की स्थिति
भारत के लिए सबसे राहत की बात यह है कि शुरुआती तीन सालों की सदस्यता के लिए किसी भी प्रकार के वित्तीय योगदान की आवश्यकता नहीं होगी। इस अवधि के दौरान शामिल राष्ट्र गाजा में सीजफायर के बाद (Security Council) की गतिविधियों और नई फिलिस्तीनी समिति के गठन पर पैनी नजर रखेंगे। भारत जैसे देश की मौजूदगी वहां अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती और हमास के निशस्त्रीकरण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगी।
पीएम मोदी को लिखे पत्र के गहरे मायने
ट्रंप ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व क्षमता की जमकर सराहना की है और उन्हें इस शानदार प्रयास का अहम हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार (Strategic Partnership) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला यह निमंत्रण गाजा में स्थायी शांति लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ट्रंप ने अपनी शांति योजना के 20-सूत्री रूपरेखा का जिक्र करते हुए भारत को एक न्यायप्रिय और प्रभावी शासन का समर्थक बताया है।
दुनिया के 50 देशों को मिला न्योता
भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जिसे इस बोर्ड में बुलाया गया है; ट्रंप ने इजरायल, मिस्र, तुर्की, कतर, पाकिस्तान, कनाडा और अर्जेंटीना समेत लगभग 50 देशों को न्योता भेजा है। इन (Bilateral Relations) के समीकरणों को देखते हुए इस बोर्ड का स्वरूप बेहद व्यापक होने वाला है। उम्मीद जताई जा रही है कि दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान सदस्यों की आधिकारिक सूची पर अंतिम मुहर लग सकती है।
बोर्ड की कार्यकारी समिति में बड़े नाम
व्हाइट हाउस ने बोर्ड के विजन को धरातल पर उतारने के लिए एक बेहद प्रभावशाली कार्यकारी समिति का गठन किया है। इस समिति में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और जारेड कुशनर जैसे कद्दावर राजनेताओं के साथ-साथ विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और टोनी ब्लेयर (Global Economy) के विशेषज्ञों के नाम शामिल हैं। इतने बड़े स्तर की समिति यह दर्शाती है कि ट्रंप प्रशासन इस बार मध्य पूर्व की समस्या का जड़ से समाधान करने के प्रति बेहद गंभीर है।
भारत के लिए इस अवसर की अहमियत
अगर पीएम मोदी इस निमंत्रण को स्वीकार करते हैं, तो यह भारत के लिए विश्व गुरु बनने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। मध्य पूर्व में भारत के आर्थिक और कूटनीतिक हित (Conflict Resolution) से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इस बोर्ड का हिस्सा बनकर भारत न केवल वैश्विक शांति में अपना योगदान देगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपनी वीटो जैसी ताकत का अहसास भी कराएगा। अब पूरी दुनिया की नजरें भारत के अगले कदम पर टिकी हैं।



