Patna NEET Aspirant Death Case: नीट छात्रा की मौत तो बस शुरुआत थी, मकान मालिक के फ्लैट में चलता था जिस्मफरोशी का धंधा…
Patna NEET Aspirant Death Case: बिहार की राजधानी पटना में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। कदमकुआं इलाके के शंभू हॉस्टल में रहने वाली छात्रा की जान जाने के बाद जब जांच शुरू हुई, तो पता चला कि यह केवल एक साधारण सुसाइड या मौत का मामला नहीं है। गिरफ्तार मकान मालिक मनीष रंजन पर अब लड़कियों के हॉस्टल की आड़ में (Sexe Racket Allegations) के गंभीर आरोप लगे हैं। इस खुलासे ने उन हजारों माता-पिता की नींद उड़ा दी है जिनकी बेटियां डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना लेकर पटना के हॉस्टलों में रह रही हैं।

रसूखदारों को लड़कियों की सप्लाई का सनसनीखेज दावा
इस पूरे मामले में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने एंट्री मारते हुए बेहद चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि मनीष रंजन केवल एक मकान मालिक नहीं था, बल्कि वह (Human Trafficking Link) के जरिए बड़े-बड़े रसूखदारों और रसूखदार नेताओं को लड़कियां सप्लाई करता था। सांसद ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि आरोपी को रिमांड पर लेकर कड़ी पूछताछ की जाए ताकि उन सफेदपोश चेहरों का पर्दाफाश हो सके जो इस घिनौने धंधे में शामिल थे।
हॉस्टल के ऊपर बने फ्लैट का रहस्यमयी ठिकाना
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि मनीष रंजन उसी बिल्डिंग के सबसे ऊपरी तल्ले पर बने एक लग्जरी फ्लैट में रहता था, जहाँ नीचे लड़कियों का हॉस्टल था। हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल, जो शंभू अग्रवाल की पत्नी हैं, ने वहां (Female Student Security) के साथ खिलवाड़ करते हुए मनीष को पूरी छूट दे रखी थी। बताया जा रहा है कि मनीष का आपराधिक इतिहास भी रहा है, फिर भी उसे लड़कियों के हॉस्टल के इतने करीब रहने की अनुमति दी गई, जो किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।
फरार संचालिका और उसके बेटों की तलाश तेज
नीट छात्रा की मौत के 13 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल और उसके दो बेटे घटना के तुरंत बाद से ही अंडरग्राउंड हो गए हैं। पुलिस की (Police Investigation Progress) पर भी अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर रसूखदार संचालिका तक कानून के हाथ क्यों नहीं पहुँच पा रहे हैं। इस बीच, हॉस्टल में रहने वाली अन्य लड़कियां इतनी दहशत में हैं कि उन्होंने अपने कमरे खाली कर दूसरे सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट होना शुरू कर दिया है।
मोबाइल लोकेशन ने खोली मकान मालिक की पोल
पुलिस की साइबर सेल ने जब मनीष रंजन के मोबाइल की जांच की, तो एक और बड़ा सबूत हाथ लगा। जिस दिन छात्रा जहानाबाद से पटना वापस आई थी, उसी दिन मनीष का (Digital Evidence Tracking) भी उसी रूट पर पाया गया। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि क्या मनीष उस छात्रा का पीछा कर रहा था या यह महज एक इत्तेफाक था। यह एंगल इस मामले को हत्या या आत्महत्या के लिए उकसाने की दिशा में एक नया मोड़ दे सकता है।
पटना के हॉस्टलों में प्रोटोकॉल की उड़ी धज्जियां
इस दुखद घटना ने पटना में कुकुरमुत्ते की तरह खुले सैकड़ों गर्ल्स हॉस्टलों की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय प्रशासन और (Urban Authority Regulations) की लापरवाही का आलम यह है कि शहर में चल रहे ज्यादातर हॉस्टलों का न तो रजिस्ट्रेशन है और न ही वहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम हैं। संचालक अपनी मर्जी से नियम बनाते हैं और सुरक्षा के नाम पर केवल एक केयरटेकर तैनात कर दिया जाता है। नीट छात्रा के मामले में भी केयरटेकर नीतू ही उसे अस्पताल लेकर गई थी, जबकि संचालिका गायब थी।
सुरक्षा जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति
हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि पिछले तीन सालों में कभी भी किसी सरकारी एजेंसी ने वहां आकर सुरक्षा व्यवस्था की जांच नहीं की। छात्राओं के अनुसार (Hostel Safety Audit) जैसे शब्दों का वहां कोई अस्तित्व नहीं था। वहां रहने वाली लड़कियों ने यह भी बताया कि हॉस्टल के बाहर आवारा लड़के अक्सर उन पर फब्तियां कसते थे और गंदे कमेंट्स करते थे, लेकिन न तो मकान मालिक और न ही स्थानीय पुलिस ने कभी इन शिकायतों पर ध्यान दिया।
रसूख और पैसे के आगे बेबस हुई व्यवस्था
नीट छात्रा की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि रसूखदार लोग किस तरह कानून की आंखों में धूल झोंकते हैं। इस मामले में आईएमए ने भी डीजीपी को पत्र लिखकर (Medical Legal Support) और मामले से जुड़े डॉक्टरों की सुरक्षा की मांग की है। लोगों का मानना है कि अगर समय रहते हॉस्टलों की मॉनिटरिंग की गई होती, तो शायद एक होनहार छात्रा को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। अब सबकी नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या मुख्य आरोपियों को सजा मिल पाएगी।
बेटियों की सुरक्षा के लिए उठ रही है बड़ी मांग
इस कांड के बाद पटना के छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि हर गर्ल्स हॉस्टल के बाहर (CCTV Surveillance Installation) अनिवार्य किया जाए और महिला पुलिस कर्मियों की एक विशेष टीम समय-समय पर हॉस्टलों का औचक निरीक्षण करे। यह मामला केवल एक मौत का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो हजारों मां-बाप अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए बाहर भेजते समय सरकार पर करते हैं। मनीष रंजन जैसे दरिंदों को सजा मिलना इस भरोसे को बहाल करने के लिए बेहद जरूरी है।



