Trump Greenland Annexation Plan: ट्रंप की ग्रीनलैंड कब्जा धमकी से दुनिया में मचा हड़कंप, क्या 2026 में अमेरिका का हिस्सा बन जाएगा यह बर्फीला द्वीप…
Trump Greenland Annexation Plan: दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड पर इन दिनों युद्ध के काले बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विस्तारवादी नीतियों ने सबको हैरान कर दिया है। ट्रंप की हालिया धमकियों और सोशल मीडिया पोस्ट्स के बाद ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन ने अपने नागरिकों को (Military Invasion Preparedness) के लिए सतर्क रहने का आदेश जारी किया है। हालांकि पीएम नीलसन ने स्पष्ट किया है कि सीधे संघर्ष की संभावना फिलहाल कम है, लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों में किसी भी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।

ट्रंप का एआई वार और सोशल मीडिया पर नया दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी मंशा साफ करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है और एक ऐसी तस्वीर साझा की है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तूफान ला दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक एआई जनरेटेड फोटो पोस्ट की है जिसमें वह ग्रीनलैंड की बर्फीली जमीन पर (American Sovereignty Symbols) के रूप में अमेरिकी झंडा गाड़ते हुए नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर में उनके साथ जेडी वैंस और मार्को रूबियो भी मौजूद हैं और वहां एक बोर्ड लगा है जिस पर लिखा है कि 2026 में ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा बन चुका है।
नागरिकों के लिए इमरजेंसी टास्क फोर्स का गठन
ग्रीनलैंड की सरकार ने केवल चेतावनी देकर पल्ला नहीं झाड़ा है, बल्कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री ने अधिकारियों के साथ मिलकर एक विशेष (Crisis Management Task Force) बनाने का निर्णय लिया है जो किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने की योजना तैयार करेगी। सरकार ने अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपने घरों में कम से कम 5 दिनों का पर्याप्त भोजन और रसद जमा करके रखें ताकि अचानक हमले या उथल-पुथल की स्थिति में वे सुरक्षित रह सकें।
नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने का बदला और ट्रंप की जिद
ट्रंप की इस आक्रामक नीति के पीछे की वजहें जितनी रणनीतिक हैं, उतनी ही व्यक्तिगत भी बताई जा रही हैं। उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्योंकि उन्हें (Nobel Peace Prize) से सम्मानित नहीं किया गया, इसलिए अब वे शांति बनाए रखने के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय नियम या बाध्यता को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप का यह बयान साफ करता है कि वे अब अपनी शर्तों पर वैश्विक सीमाओं को फिर से परिभाषित करना चाहते हैं।
यूरोपीय देशों में विरोध की लहर और टैरिफ की धमकी
ट्रंप के इस कदम ने नाटो और यूरोपीय सहयोगियों के बीच गहरी दरार पैदा कर दी है क्योंकि ग्रीनलैंड तकनीकी रूप से डेनमार्क का हिस्सा है। डेनमार्क, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देशों ने अमेरिकी रुख का कड़ा विरोध किया है, लेकिन ट्रंप अपनी (International Trade Policy) का इस्तेमाल हथियार की तरह कर रहे हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि जो देश ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका का समर्थन नहीं करेंगे, उन्हें भारी आर्थिक टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
क्या सुरक्षा कारणों से जरूरी है ग्रीनलैंड पर कब्जा
व्हाइट हाउस के गलियारों में ग्रीनलैंड को खरीदने या उस पर नियंत्रण पाने की बात को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए (Geopolitical Strategic Importance) के लिहाज से ग्रीनलैंड का अमेरिका के पास होना अनिवार्य है। ट्रंप ने एक अन्य नक्शा भी साझा किया है जिसमें न केवल ग्रीनलैंड बल्कि कनाडा के भी कुछ हिस्सों को अमेरिकी मानचित्र में समाहित दिखाया गया है, जो उनकी ‘ग्रेटर अमेरिका’ की सोच को दर्शाता है।
पीएम नीलसन की नागरिकों से शांति और तैयारी की अपील
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भावनात्मक रुख अपनाते हुए जनता को धैर्य रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में वे अपनी (Territorial Integrity Protection) के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी विदेशी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। हालांकि प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे दैनिक जीवन में आने वाली किसी भी उथल-पुथल के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें क्योंकि ट्रंप के अनिश्चित फैसलों का असर कभी भी धरातल पर दिख सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर छिड़ी वर्चस्व की नई जंग
जैसे-जैसे 2026 की समयसीमा करीब आ रही है, दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों की नजरें आर्कटिक महासागर पर टिक गई हैं। यह केवल एक जमीन के टुकड़े का विवाद नहीं है, बल्कि (Global Superpower Conflict) का नया केंद्र बन गया है जहां एक तरफ ट्रंप की हठधर्मिता है और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय कानून। आने वाले कुछ महीने तय करेंगे कि क्या ग्रीनलैंड अपनी आजादी बरकरार रख पाएगा या दुनिया के नक्शे पर एक नई राजनीतिक सीमा का उदय होगा।



