Voter list accuracy: वैश्विक लोकतंत्र में मतदाता सूची शुद्धीकरण की दिशा में भारत की पहल
Voter list accuracy: भारत में शुरू किया गया मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का मॉडल अब केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक प्रभावी उदाहरण के रूप में उभर रहा है। हाल ही में भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह स्पष्ट हुआ कि voter list accuracy और transparent election system जैसे मुद्दे अब वैश्विक प्राथमिकता बन चुके हैं। इस सम्मेलन में भाग लेने वाले अनेक देशों ने अपने-अपने यहां मतदाता सूची के शुद्धीकरण को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वैश्विक सहभागिता
‘लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर भारत का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन’ के दौरान 42 देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों और 27 देशों के मिशन प्रमुखों ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन का उद्देश्य election management, democratic process और voter identification जैसे विषयों पर साझा समझ विकसित करना था। विभिन्न सत्रों में इस बात पर गहन चर्चा हुई कि किस प्रकार मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय और अद्यतन बनाया जा सकता है, ताकि चुनावों में किसी भी प्रकार की त्रुटि या अपारदर्शिता न रहे।
मतदाता सूची शुद्धीकरण पर सामूहिक सहमति
सम्मेलन के अंतिम दिन सभी देशों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि clean voter database किसी भी लोकतंत्र की आधारशिला होती है। कई देशों ने स्वीकार किया कि duplicate voters, incorrect entries और outdated records जैसी समस्याएं चुनावी विश्वास को कमजोर करती हैं। ऐसे में भारत का special intensive revision मॉडल उनके लिए एक practical framework के रूप में सामने आया है, जिसे वे अपने देशों की परिस्थितियों के अनुसार अपनाने पर विचार कर रहे हैं।
दिल्ली घोषणा 2026 के पांच प्रमुख स्तंभ
समापन सत्र में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ‘दिल्ली घोषणा 2026’ को प्रस्तुत किया। इस घोषणा में पांच प्रमुख स्तंभों को रेखांकित किया गया है, जिनमें voter list accuracy, election operations, research and publication, technology use और training and capacity building शामिल हैं। सभी चुनाव प्रबंधन निकायों ने इन स्तंभों पर संयुक्त रूप से कार्य करने और समय-समय पर अपनी प्रगति की समीक्षा करने का संकल्प लिया।
प्रौद्योगिकी और पहचान प्रणाली पर विशेष जोर
सम्मेलन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि प्रत्येक योग्य मतदाता को photo voter id उपलब्ध कराना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करता है। digital election tools और secure identification systems के उपयोग से न केवल मतदान प्रक्रिया सरल होती है, बल्कि चुनावों में transparency और credibility भी बढ़ती है। कई देशों ने भारत के अनुभव से सीख लेते हुए technology driven election reforms को अपनाने की इच्छा जताई।
भारत में गहन विमर्श और भविष्य की योजना
तीन दिनों तक भारत मंडपम में आयोजित विभिन्न सत्रों में भारत के निर्वाचन आयोग ने special intensive revision प्रक्रिया पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इस दौरान international delegates ने प्रश्न पूछे और अपने-अपने देशों के अनुभव साझा किए। अंत में यह भी तय किया गया कि सभी देश 3, 4 और 5 दिसंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान में पुनः एकत्र होंगे, ताकि अब तक की प्रगति की समीक्षा की जा सके।
लोकतंत्र की नींव के रूप में शुद्ध मतदाता सूची
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि कानून के अनुसार तैयार की गई शुद्ध मतदाता सूची किसी भी लोकतंत्र की नींव होती है। यदि मतदाता सूची विश्वसनीय होगी तो election integrity अपने आप मजबूत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सभी चुनाव प्रबंधन निकायों को voter awareness और inclusive participation पर निरंतर कार्य करना चाहिए।
व्यापक भागीदारी और विशेषज्ञ संवाद
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में लगभग एक हजार से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी, शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि और चुनावी विशेषज्ञ शामिल थे। इन सभी ने लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए अपने विचार और शोध साझा किए। यह सम्मेलन इस बात का संकेत है कि भारत अब global democracy leadership की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।



