Jaunpur News: जौनपुर में युवक ने एमबीबीएस सीट पाने के लिए खुद का पैर काटा
Jaunpur News: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है जिसने पुलिस प्रशासन और आम जनता सबको हैरान कर दिया है। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खलीलपुर गांव में एक युवक ने डॉक्टर बनने के जुनून में कुछ ऐसा कदम उठाया जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। शुरुआत में इस मामले को बदमाशों का जानलेवा हमला माना जा रहा था, लेकिन जब पुलिस ने गहराई से तफ्तीश की तो इस खौफनाक साजिश की परतें एक-एक कर खुलने लगीं। यह पूरी कहानी एक युवक की अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए खुद को शारीरिक क्षति पहुँचाने की है।

अज्ञात बदमाशों के हमले की झूठी कहानी
घटना की शुरुआत शुक्रवार की आधी रात के वक्त हुई। शनिवार की सुबह स्थानीय पुलिस को यह सूचना दी गई कि 25 साल के सूरज भास्कर नाम के युवक पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने जानलेवा हमला किया है। शिकायत में बताया गया कि बदमाशों ने न केवल सूरज को बेरहमी से पीटा बल्कि उसका बायां पैर काटकर अपने साथ ले गए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने इसे हत्या के प्रयास की धारा में दर्ज किया और अपराधियों की धरपकड़ के लिए घेराबंदी शुरू कर दी। गांव में दहशत का माहौल था और हर कोई इस क्रूरता की निंदा कर रहा था।
पुलिस जांच में मिलने लगे संदिग्ध सबूत
सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता के नेतृत्व में जब जांच शुरू हुई तो पुलिस को सूरज के बयानों में काफी अंतर नजर आया। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने पर पुलिस को वहां से कुछ ऐसे साक्ष्य मिले जिन्होंने कहानी का रुख ही बदल दिया। खेत में पुलिस को कुछ खाली इंजेक्शन के रैपर और सुन्न करने वाली दवाइयां मिलीं। इसके साथ ही जब पुलिस ने युवक के कॉल रिकॉर्ड्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की तो शक की सुई खुद सूरज की ओर घूमने लगी। पुलिस को अंदेशा हो गया कि यह बाहरी हमला नहीं बल्कि एक सोची-समझी योजना का हिस्सा है।
आरक्षण का लाभ लेने की खतरनाक साजिश
जब पुलिस ने सूरज की निजी डायरी और उसके मोबाइल को खंगाला तो चौंकाने वाला सच सामने आया। सूरज किसी भी कीमत पर एमबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहता था। उसने अपनी डायरी में साल 2026 के लक्ष्यों में साफ तौर पर लिखा था कि उसे हर हाल में मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेना है। सामान्य श्रेणी या अन्य प्रतिस्पर्धी कोटे में सफलता न मिलने की आशंका के चलते उसने दिव्यांग कोटे का लाभ लेने का मन बनाया। सूरज को लगा कि यदि वह शारीरिक रूप से अक्षम हो जाता है तो उसे आरक्षण के तहत आसानी से मेडिकल सीट मिल जाएगी।
वाराणसी के बीएचयू से जुटाया पूरा विवरण
जांच के दौरान यह भी पता चला कि सूरज इस योजना पर काफी समय से काम कर रहा था। वह अक्टूबर के महीने में वाराणसी स्थित बीएचयू गया था। वहां उसने दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के नियम, उसके लिए जरूरी मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया और आरक्षण के प्रतिशत के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाई थी। उसने इंटरनेट और अन्य माध्यमों से यह भी सीखा कि बिना अधिक दर्द के अंग को कैसे अलग किया जा सकता है। इसी जानकारी के आधार पर उसने शुक्रवार रात को खुद को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया और ग्राइंडर मशीन की मदद से अपने पैर के पंजों को शरीर से अलग कर दिया।
अस्पताल में उपचार और आगे की कार्रवाई
फिलहाल सूरज का इलाज अस्पताल में चल रहा है और उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवक अभी विस्तृत पूछताछ की स्थिति में नहीं है, लेकिन अब तक के सभी साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि इस घटना में कोई भी बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं था। पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने उसे ग्राइंडर मशीन और प्रतिबंधित इंजेक्शन उपलब्ध कराए। यह मामला समाज के सामने एक कड़वा सच पेश करता है कि सफलता की अंधी दौड़ में युवा किस हद तक आत्मघाती कदम उठा रहे हैं



