Gorakhpur Blackmailing Gang Case: गोरखपुर की अंशिका सिंह के ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश और पुलिस कार्रवाई
Gorakhpur Blackmailing Gang Case: गोरखपुर के सिंघड़िया इलाके में एक अस्पताल मैनेजर पर जानलेवा हमले की घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश में सनसनी फैला दी है। इस मामले की मुख्य आरोपी अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा की गिरफ्तारी के बाद जो सच सामने आया, उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। जांच में पता चला है कि अंशिका कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि एक संगठित (Gorakhpur Blackmailing Gang Case) सिंडिकेट की मास्टरमाइंड थी। यह गिरोह पिछले कई सालों से प्रभावशाली लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे मोटी रकम वसूलने का काम कर रहा था। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश बताती है कि इस नेटवर्क की पहुंच शासन और प्रशासन के गलियारों तक फैली हुई थी।

फर्जी केस और अवैध उगाही का मायाजाल
अंशिका के काम करने का तरीका बेहद शातिर था, वह पहले लोगों को प्रेम जाल में फंसाती और फिर उन्हें झूठे मुकदमों की धमकी देती थी। सूत्रों के अनुसार, उसने अब तक करीब 150 लोगों को फर्जी (Crime Syndicate Investigation) दुष्कर्म के मामलों में फंसाने का डर दिखाकर करोड़ों रुपये की उगाही की है। पीड़ितों की सूची में केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि अयोध्या में तैनात एक क्षेत्राधिकारी (CO) और गोरखपुर के करीब 15 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा और करियर दांव पर होने के कारण अधिकतर लोगों ने चुपचाप उसकी मांगों को पूरा करना ही बेहतर समझा।
डिजिटल माध्यमों का हथियार के रूप में उपयोग
इस गिरोह ने आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का भरपूर दुरुपयोग किया है। अंशिका अक्सर सोशल मीडिया मैसेंजर के माध्यम से शिकार तलाशती थी और फिर वीडियो कॉल के जरिए उनसे संपर्क साधती थी। बातचीत के दौरान वह सामने वाले को अपनी बातों में उलझाकर उनकी निजी वीडियो (Cyber Blackmailing Network) रिकॉर्डिंग कर लेती थी। यही वीडियो बाद में ब्लैकमेलिंग का मुख्य जरिया बनते थे। इस डिजिटल जाल के कारण कई रसूखदार लोग चाहकर भी पुलिस के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए और वे आर्थिक रूप से बर्बाद होते चले गए।
पारिवारिक बिखराव और ग्रामीणों का अविश्वास
अंशिका के निजी जीवन और उसके गांव की स्थिति को देखें तो वहां भी उसकी छवि बेहद नकारात्मक रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कोरोना काल में पिता की मृत्यु के बाद इस परिवार का नैतिक पतन शुरू हुआ। गांव वालों ने धीरे-धीरे इस परिवार से दूरी बना ली क्योंकि उनकी (Suspicious Lifestyle Record) गतिविधियां संदिग्ध होती जा रही थीं। आलम यह था कि लोग उनके घर के पास से गुजरने में भी कतराते थे। गांव में चर्चा है कि पैसे के लालच में किसी पर भी इल्जाम लगा देना इस परिवार की आदत बन गई थी।
अपनों ने भी मोड़ा अंशिका से मुंह
एक अपराधी जब समाज की मर्यादाओं को लांघता है, तो सबसे पहले उसका परिवार ही प्रभावित होता है। अंशिका के मामले में भी ऐसा ही हुआ, जहां उसके सगे भाई ने भी करीब तीन साल पहले उससे सारे रिश्ते खत्म कर लिए। भाई ने शादी के बाद गांव छोड़ दिया और पुणे जाकर बस गया ताकि वह अपनी बहन और मां के काले कारनामों से (Broken Family Relationships) दूर रह सके। ग्रामीणों का मानना है कि जब घर के सदस्य ने ही साथ छोड़ दिया, तो बाहर के लोगों के लिए उन पर भरोसा करने का कोई कारण ही नहीं बचा था।
सीमित शिक्षा पर ऊंचा आपराधिक नेटवर्क
हैरानी की बात यह है कि अंशिका ने केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है और उसकी बहन भी महज दसवीं पास है। इसके बावजूद उसने जो आपराधिक नेटवर्क खड़ा किया, वह किसी मंझे हुए अपराधी से कम नहीं था। बिना उच्च शिक्षा के भी उसने जिस तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म और कानून की कमियों का फायदा (Criminal Intelligence Strategy) उठाया, वह हैरान करने वाला है। उसका प्रभाव और संपर्क इतने मजबूत थे कि वह बड़े-बड़े अधिकारियों को भी अपने इशारों पर नचाने की कोशिश करती थी।
गैंगस्टर एक्ट और पुलिस की कड़ी कार्रवाई
गोरखपुर पुलिस अब इस मामले में कोई ढील देने के मूड में नहीं है। अंशिका और उसके छह अन्य साथियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि जिस थार गाड़ी का वह उपयोग करती थी, वह चोरी की थी और उस पर अलग-अलग राज्यों की (Gangster Act Proceedings) फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई थीं। पुलिस ने इस मामले में जालसाजी और चोरी की धाराओं को भी जोड़ा है ताकि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
विलासिता पूर्ण जीवन ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
अंशिका की लग्जरी लाइफस्टाइल और महंगे शौक ही आखिरकार उसकी बर्बादी का कारण बने। एक साधारण पृष्ठभूमि वाली लड़की के पास महंगी गाड़ियां और हाई-प्रोफाइल जीवन देख पुलिस को शक हुआ। जब उसके गिरोह के दो अन्य सदस्य पकड़े गए, तो वह अंडरग्राउंड हो गई थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता ने उसे (High Profile Arrest) दबोच लिया। अब पुलिस इस पूरे गिरोह के वित्तीय लेनदेन और उनके अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है ताकि इस ब्लैकमेलिंग साम्राज्य को पूरी तरह खत्म किया जा सके।



