अंतर्राष्ट्रीय

Trump British Military Relations: डोनाल्ड ट्रंप का यू-टर्न! ब्रिटिश सैनिकों को बताया दुनिया का महानतम योद्धा

Trump British Military Relations: अफगानिस्तान युद्ध को लेकर दिए गए अपने बयानों पर ब्रिटेन में भारी नाराजगी झेलने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ब्रिटिश सैनिकों की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ब्रिटेन के सैनिकों को बहादुर और महान योद्धा बताते हुए कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन की सेनाओं के बीच का रिश्ता कभी टूट नहीं सकता। (Trump British Military Relations) के इस नए मोड़ ने दोनों देशों के बीच उपजे तनाव को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि ब्रिटेन की सैन्य शक्ति का कोई सानी नहीं है।

Trump British Military Relations
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स्टार्मर से बातचीत के बाद बदला ट्रंप का सुर

ट्रंप ने यह प्रशंसात्मक बयान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर से फोन पर हुई एक लंबी और विस्तृत बातचीत के बाद साझा किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि यूनाइटेड किंगडम के महान और बेहद बहादुर सैनिक हमेशा अमेरिका के साथ खड़े रहेंगे। (Keir Starmer Diplomatic Call) के दौरान दोनों नेताओं के बीच अफगानिस्तान के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध और आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ट्रंप ने विशेष रूप से अफगानिस्तान युद्ध में शहीद हुए 457 ब्रिटिश सैनिकों को “दुनिया के सबसे महान योद्धाओं” में से एक बताया और ब्रिटिश सेना की अदम्य इच्छाशक्ति की सराहना की।

दावोस में ट्रंप के विवादित बयान से मचा था बवाल

ट्रंप का यह नया रुख उनके उस पुराने बयान से बिल्कुल विपरीत है, जो उन्होंने इसी हफ्ते स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान दिया था। उस समय एक इंटरव्यू में उन्होंने (NATO Collective Defense Skepticism) जताते हुए कहा था कि उन्हें यकीन नहीं है कि नाटो के अन्य सदस्य देश संकट के समय अमेरिका का साथ देंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि गैर-अमेरिकी सैनिक अक्सर युद्ध में ‘फ्रंट लाइन से दूर’ रहते हैं। इस टिप्पणी को ब्रिटेन और यूरोप में न केवल अपमानजनक माना गया, बल्कि उन परिवारों के बलिदान का अनादर भी समझा गया जिन्होंने अपने प्रियजनों को युद्ध में खोया था।

स्टार्मर की आलोचना और ब्रिटिश जनता का आक्रोश

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने ट्रंप के पुराने बयानों को ‘अपमानजनक और बेहद शर्मनाक’ करार देते हुए कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसे शब्द उन वीर परिवारों की भावनाओं को गहरी चोट पहुँचाते हैं जिन्होंने देश सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया है। (British War Veterans Response) के रूप में विभिन्न सैन्य समूहों ने भी ट्रंप से माफी की मांग की थी। हालांकि, ट्रंप ने अपने नवीनतम बयान में सीधे तौर पर पुरानी बातों के लिए क्षमा नहीं मांगी है, लेकिन उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों की बहादुरी और हृदय की विशालता की जमकर तारीफ कर डैमेज कंट्रोल करने की पूरी कोशिश की है।

अफगानिस्तान में साझा संघर्ष और नाटो की भूमिका

ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो 9/11 हमलों के बाद अफगानिस्तान में अल-कायदा और तालिबान के खिलाफ चलाए गए अभियान में ब्रिटेन अमेरिका का सबसे बड़ा और विश्वसनीय सहयोगी रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में (International Military Coalition History) के तहत करीब 1.5 लाख से ज्यादा ब्रिटिश सैनिकों ने अपनी सेवाएं दीं। अमेरिका के बाद ब्रिटेन का सैन्य दल वहां सबसे बड़ा था और उन्होंने हेलमंद जैसे सबसे खतरनाक प्रांतों में मोर्चे को संभाला था। ट्रंप के हालिया यू-टर्न ने यह साबित कर दिया है कि रणनीतिक और ऐतिहासिक कारणों से अमेरिका के लिए ब्रिटेन की सैन्य मित्रता को नजरअंदाज करना लगभग नामुमकिन है।

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