Beur Jail Drug Smuggling Syndicate: बेऊर जेल के सुरक्षा चक्र को भेदने वाले नशे के सौदागरों का हुआ अंत, पुलिस ने दबोचा गिरोह
Beur Jail Drug Smuggling Syndicate: बिहार की राजधानी पटना में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। बेऊर थाने की पुलिस ने जेल के भीतर प्रतिबंधित मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले एक संगठित सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ फेंका है। इस (Criminal Investigation and Crackdown) के दौरान पुलिस ने गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। इन अपराधियों के पास से न केवल भारी मात्रा में गांजा और स्मैक बरामद हुआ है, बल्कि अवैध धंधे से कमाई गई नकद राशि भी पुलिस के हाथ लगी है।

जेल की सलाखों के पीछे से विक्की कुमार बुनता था जाल
पुलिस की तफ्तीश में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस पूरे काले कारोबार का मास्टरमाइंड जेल के अंदर ही बंद है। कुख्यात कैदी विक्की कुमार जेल के भीतर मादक पदार्थों का मुख्य सप्लायर बना हुआ था, जो (Narcotics Distribution Channel) को कुशलता से संचालित कर रहा था। विक्की पर पहले से ही 12 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह बाहर मौजूद अपने गुर्गों से संपर्क कर नशे की खेप मंगवाता था और फिर उसे अन्य कैदियों के बीच ऊंचे दामों पर बेचता था।
ऊंचे मकान की छत से जेल में फेंका जाता था गांजा
इस गिरोह ने नशे को जेल की ऊंची दीवारों के पार पहुँचाने के लिए एक नायाब लेकिन बेहद खतरनाक तरीका खोज निकाला था। पुलिस ने जेल परिसर से बिल्कुल सटे एक मकान को चिह्नित किया है, जिसकी छत का उपयोग (Smuggling Prohibited Items) के लिए किया जाता था। गिरोह के सदस्य इस मकान की ऊंची छत पर चढ़कर गांजे और स्मैक के पैकेट जेल के अंदर एक तय स्थान पर फेंकते थे। इस खुलासे के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और पुलिस ने संबंधित मकान पर बुलडोजर कार्रवाई के लिए अनुशंसा की है।
बेऊर अखाड़ा के पास पुलिस ने बिछाया जाल
सिटी एसपी पश्चिम भानु प्रताप सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बेऊर अखाड़ा के पास कुछ अपराधी नशे की बड़ी डील करने वाले हैं। इस (Law Enforcement Intelligence Gathering) को पुख्ता करते हुए एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। पुलिस ने जब मौके पर छापेमारी की, तो शैलेंद्र मिस्त्री और गोविंद चौधरी नाम के दो अपराधियों को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। इनकी गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरे सिंडिकेट की कड़ियां एक-एक कर जुड़नी शुरू हुईं।
धनंजय और जितेंद्र के कबूलनामे ने खोला राज
गिरफ्तार शैलेंद्र और गोविंद से जब कड़ी पूछताछ की गई, तो उन्होंने बताया कि दुल्हिन बाजार का रहने वाला धनंजय उन्हें गांजे की सप्लाई देता था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए धनंजय को हिरासत में लिया। धनंजय ने पूछताछ में कुबूल किया कि (Organized Crime Network Operative) के रूप में वह गांजा लाकर जितेंद्र के घर पहुँचाता था। जितेंद्र वही व्यक्ति है जिसके मकान की छत जेल की दीवार से सटी हुई है। जितेंद्र ने भी स्वीकार किया कि वह अपने घर की छत का इस्तेमाल विक्की कुमार तक माल पहुँचाने के लिए करता था।
जेल प्रशासन को सुरक्षा सख्त करने का कड़ा निर्देश
इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद पटना पुलिस ने जेल प्रशासन को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इसमें सुरक्षा में रही चूक और चिह्नित मकान के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की बात कही गई है। पुलिस ने सुझाव दिया है कि (Correctional Facility Security Protocols) को और अधिक आधुनिक और अभेद्य बनाने की आवश्यकता है। जेल के आसपास के ऊंचे मकानों की निगरानी के लिए विशेष सुरक्षा दस्ते की तैनाती और सीसीटीवी कैमरों की रेंज बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
संगठित अपराध पर पटना पुलिस का प्रहार
पुलिस का मानना है कि यह केवल कुछ लोगों का समूह नहीं बल्कि एक सुव्यवस्थित संगठित सिंडिकेट है जो पटना और आसपास के इलाकों से मादक पदार्थ जुटाकर जेल की सप्लाई चैन को जिंदा रखे हुए था। इस (Gang Activity Monitoring) के जरिए पुलिस अब उन सफेदपोश लोगों की भी तलाश कर रही है जो पर्दे के पीछे से इन अपराधियों को संरक्षण दे रहे थे। विक्की कुमार जैसे अपराधियों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना ही पुलिस का अगला मुख्य लक्ष्य है।
अपराधियों के हौसले पस्त और न्याय की जीत
इस सफल ऑपरेशन के बाद पटना के आपराधिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। पकड़े गए चारों आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट और अन्य संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। (Public Safety and Justice) सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अब चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है ताकि इन नशा तस्करों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। राजधानी में नशे के खिलाफ अभियान अब और तेज कर दिया गया है ताकि युवाओं और जेल परिसर को इस जहर से मुक्त रखा जा सके।



