Bihar Liquor Ban: बिहार में शराबबंदी के बीच नशे में धुत एंबुलेंस चालक का तांडव, छात्र की मौत से मचा कोहराम
Bihar Liquor Ban: बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को ठेंगा दिखाते हुए एक निजी एंबुलेंस चालक ने नशे की हालत में बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। शुक्रवार शाम जीप स्टैंड के पास नहर रोड पर शराब के नशे में चूर इस ड्राइवर ने सड़क पर जमकर उत्पात मचाया। तेज रफ्तार एंबुलेंस ने करीब एक किलोमीटर तक जो भी सामने आया, उसे अपनी चपेट में ले लिया। इस अनियंत्रित वाहन की टक्कर से आधे दर्जन से अधिक राहगीर घायल हो गए, जबकि 15 वर्षीय एक छात्र की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर राज्य में शराबबंदी की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

कोचिंग से घर लौट रहे दो भाई बने शिकार
हादसे का शिकार हुआ केशव कुमार उर्फ कुणाल, भेलवा गांव के शिक्षक उमाशंकर राम का पुत्र था और आठवीं कक्षा में पढ़ता था। वह अपने चचेरे भाई आकाश कुमार (14 वर्ष) के साथ कोचिंग से पढ़ाई कर घर लौट रहा था। तभी मौत बनकर आई तेज रफ्तार एंबुलेंस ने दोनों को जोरदार टक्कर मार दी। कुणाल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि आकाश की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एंबुलेंस इतनी तेज थी कि सड़क पर चल रहे लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे थे।
गर्भवती महिला सवार थी, फिर भी नशे में था चालक
हैरत की बात यह है कि जिस समय चालक संदीप कुमार उर्फ भट्टू यादव नशे में गाड़ी चला रहा था, उस वक्त एंबुलेंस में बनकटवा के बकुलिया गांव की एक आठ महीने की गर्भवती महिला भी सवार थी। महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। मरीज की जान जोखिम में डालकर शराब का सेवन करने की बात जानकर स्थानीय लोग आगबबूला हो गए। गुस्साई भीड़ ने एंबुलेंस को घेर लिया और चालक को पकड़कर उसकी जमकर धुनाई कर दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लहूलुहान चालक को हिरासत में लेकर अस्पताल पहुंचाया।
मेडिकल जांच में हुई शराब पीने की पुष्टि
पुलिस इंस्पेक्टर रंजय कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि ‘ब्रेथ एनालाइजर’ टेस्ट में चालक के शराब पीने की पुष्टि हुई है। पुलिस के अनुसार, एंबुलेंस आदापुर थाना क्षेत्र के किसी व्यक्ति की है। आरोपी ड्राइवर के खिलाफ मद्यनिषेध कानून और गैर-इरादतन हत्या की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराबबंदी वाले राज्य में चालक को शराब कहां से उपलब्ध हुई।
शराबबंदी कानून और धरातल की चुनौतियां
बिहार में अप्रैल 2016 से ही पूर्ण शराबबंदी लागू है, जिसके तहत शराब का उत्पादन, बिक्री और सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक लाखों मामले दर्ज हुए हैं और बड़ी संख्या में लोग जेल की हवा खा रहे हैं। कई सरकारी कर्मचारियों को भी इस कानून के उल्लंघन में अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है। इसके बावजूद, पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी और जहरीली शराब के निर्माण की खबरें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मोतिहारी की इस ताजा घटना ने यह साफ कर दिया है कि कड़े कानूनों के बाद भी अपराधियों और शराब माफियाओं के हौसले पस्त नहीं हुए हैं।



