BiharPolitics – सम्राट चौधरी सरकार के कैबिनेट विस्तार की तस्वीर साफ
BiharPolitics – बिहार में नई सरकार बनने के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तस्वीर लगभग साफ हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का पहला कैबिनेट विस्तार 7 मई को पटना के गांधी मैदान में होने जा रहा है। इस विस्तार को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा और जनता दल यूनाइटेड के बीच तय हुए शक्ति संतुलन को लेकर हो रही है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक इस बार सरकार में सीटों के बंटवारे का तरीका पहले की तुलना में अलग रखा गया है।

करीब तीन सप्ताह से मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों के सहारे चल रही सरकार में अब विभिन्न दलों के नेताओं को शामिल किया जाएगा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अंदर लंबे विचार-विमर्श के बाद मंत्रियों की संख्या को लेकर सहमति बनी है। जानकारी के अनुसार भाजपा और जदयू दोनों को बराबर प्रतिनिधित्व मिलेगा।
भाजपा और जदयू के बीच बराबरी का फार्मूला
एनडीए से जुड़े सूत्रों के मुताबिक नई कैबिनेट में भाजपा और जदयू के मंत्रियों की संख्या समान रहेगी। दोनों दलों को 16-16 स्थान देने पर सहमति बनी है। इसमें मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। ऐसे में भाजपा के कोटे से 15 और जदयू की ओर से 14 नेताओं को मंत्री पद मिल सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह व्यवस्था पहले की सरकारों से अलग है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकारों में अक्सर मुख्यमंत्री पद जदयू के पास रहने के बदले भाजपा को मंत्रिमंडल में अधिक हिस्सेदारी मिलती रही थी। इस बार समीकरण पूरी तरह बदलते दिखाई दे रहे हैं।
सहयोगी दलों को भी मिलेगा प्रतिनिधित्व
एनडीए के अन्य सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाएगा। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा-आर को दो मंत्री पद मिलने की संभावना है। वहीं जीतनराम मांझी की पार्टी हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो को एक-एक मंत्री पद दिया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि पहले से मंत्री रहे कुछ नेताओं की वापसी भी लगभग तय मानी जा रही है। इनमें संजय पासवान, संतोष सुमन मांझी, संजय सिंह और दीपक कुशवाहा जैसे नाम चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम सूची पर आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
दिल्ली बैठक के बाद बनी सहमति
कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप देने से पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में भाजपा नेतृत्व और सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक में मंत्रिमंडल की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस बैठक में जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतनराम मांझी भी शामिल रहे। बैठक के बाद सम्राट चौधरी पटना लौटे और इसके तुरंत बाद मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख तय कर दी गई।
पुराने मॉडल से अलग दिख रही नई सरकार
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सम्राट चौधरी सरकार का ढांचा पिछले वर्षों की तुलना में अलग नजर आ रहा है। 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद बनी सरकार में भाजपा को 16 और जदयू को 14 मंत्री पद मिले थे। बाद में नीतीश कुमार ने अपने कोटे के कुछ पद खाली भी रखे थे।
इस बार दोनों दलों के बीच बराबरी का फार्मूला अपनाकर गठबंधन के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। माना जा रहा है कि कुछ मंत्री पद भविष्य की राजनीतिक जरूरतों को देखते हुए खाली भी रखे जा सकते हैं।
अब सभी की नजर 7 मई को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी है, जहां नई सरकार की टीम पहली बार पूरी ताकत के साथ सामने आएगी।