Darbhanga Student Suicide Case: न्याय से हार गई दरभंगा की बेटी, सिस्टम की बेरुखी ने छीन ली दसवीं की छात्रा की सांसें
Darbhanga Student Suicide Case: बिहार के दरभंगा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इंसानियत और कानून व्यवस्था दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बिशनपुर थाना क्षेत्र के एक शांत गांव में रहने वाली 10वीं की एक छात्रा ने समाज की कुरीतियों और मनचलों के आतंक से तंग आकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह केवल एक (Teenage Girl Suicide) का मामला नहीं है, बल्कि उस डर की पराकाष्ठा है जो एक मासूम बच्ची के मन में घर कर गई थी। जब रक्षक ही मौन हो जाएं और समाज मूकदर्शक बन जाए, तो एक छात्रा के पास मौत को गले लगाने के अलावा शायद कोई रास्ता नहीं बचा था।

दबंगई की हद और शादी का जबरन दबाव
मृतका के पिता ने जो आपबीती सुनाई है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। गांव का ही एक युवक पिछले काफी समय से छात्रा को अपना शिकार बनाने की कोशिश कर रहा था। वह न केवल रास्ते में छेड़खानी करता था, बल्कि (Harassment and Stalking) की सारी हदें पार करते हुए उस पर शादी का दबाव भी बना रहा था। बार-बार फोन करना और धमकियां देना उस युवक का रोज का काम बन गया था। एक पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी और लाडली बेटी, जो अभी दुनिया को समझने की कोशिश कर रही थी, उसे इस कदर प्रताड़ित किया गया कि उसका घर से निकलना दूभर हो गया।
जब पुलिस की चौखट से खाली हाथ लौटी मासूम
इस पूरे मामले में सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि पीड़ित छात्रा ने हार नहीं मानी थी। उसने खुद को बचाने की कोशिश की थी और पूर्व में (Local Police Station Application) देकर न्याय की गुहार लगाई थी। पिता का आरोप है कि अगर समय रहते उस शिकायत पर ठोस कार्रवाई की गई होती, तो आज उनकी बेटी जिंदा होती। यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि सिस्टम की सुस्ती और शिकायतों को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति किस तरह मासूम जिंदगियों को मौत के मुहाने पर धकेल देती है।
पिता की अनुपस्थिति में घर पर हुआ तांडव
बुधवार की सुबह जब छात्रा के पिता अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए सब्जी बेचने बाजार गए थे, तभी उस दरिंदे ने मौका पाकर घर पर धावा बोल दिया। आरोपी युवक अपने कुछ साथियों के साथ (Home Trespassing and Intimidation) की नीयत से वहां पहुंचा और जमकर हंगामा किया। घर की चारदीवारी के भीतर खुद को असुरक्षित महसूस करते हुए और समाज में बदनामी के डर से वह छात्रा इस कदर टूट गई कि उसने दुपट्टे का फंदा बनाकर अपनी जान दे दी। जब पिता घर लौटे, तो उन्हें अपनी बेटी की मुस्कान नहीं, बल्कि उसकी ठंडी पड़ी लाश मिली।
पोस्टमार्टम की औपचारिकता और बिलखता परिवार
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस मौके पर पहुंची और शव को फंदे से उतारकर (Forensic Medical Examination) के लिए भेज दिया। छात्रा के घर में अब केवल चीखें और मातम का सन्नाटा बचा है। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी होने के नाते वह सबकी आंखों का तारा थी, लेकिन उसकी असमय मृत्यु ने पूरे परिवार को उम्र भर का घाव दे दिया है। गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं, लेकिन आरोपी की दबंगई के आगे बोलने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है।
थानाध्यक्ष का बयान और जांच का आश्वासन
बिशनपुर थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने मीडिया को बताया कि छात्रा के पिता ने गांव के ही एक युवक के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस का दावा है कि (Ongoing Criminal Investigation) के तहत साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। हालांकि, ग्रामीण अब पुलिस के इन आश्वासनों पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि उनका मानना है कि अगर पुलिस पहले ही सक्रिय हो जाती, तो यह नौबत ही नहीं आती। अब देखना यह है कि क्या इस बेटी को मरणोपरांत न्याय मिल पाएगा?
शिक्षा और सुरक्षा के बीच की गहरी खाई
यह घटना बिहार के उन तमाम जिलों के लिए एक चेतावनी है जहां लड़कियां शिक्षा हासिल करने के लिए घर से बाहर निकलती हैं। अगर (Women Safety in Rural Areas) केवल कागजों तक सीमित रहेगी, तो कोई भी पिता अपनी बेटी को स्कूल भेजने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा। 10वीं की वह छात्रा केवल एक परीक्षा की तैयारी नहीं कर रही थी, बल्कि वह अपने भविष्य के सपने बुन रही थी, जिन्हें छेड़खानी के एक घिनौने खेल ने हमेशा के लिए दफन कर दिया। समाज को सोचना होगा कि हम किस दिशा में जा रहे हैं।
आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की उठती मांग
दरभंगा के इस गांव में तनाव व्याप्त है और लोग अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। (Immediate Arrest Demand) को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह जल्द से जल्द मुख्य आरोपी और उसके साथियों को सलाखों के पीछे भेजे। जब तक दोषियों को उनके किए की सजा नहीं मिलेगी, तब तक इस तरह की मानसिकता वाले अपराधियों के हौसले बुलंद रहेंगे। न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर है और इस मामले में तो न्याय पहले ही बहुत देर से आ रहा है।



