बिहार

EducationPolicy – बिहार में आरटीई के तहत निजी स्कूलों की मान्यता और नामांकन पर सख्त रुख

EducationPolicy – बिहार में शिक्षा का अधिकार कानून के तहत संचालित निजी विद्यालयों को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। आरटीई मानकों के पालन में लगातार हो रही लापरवाही को देखते हुए विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि तय समयसीमा के भीतर सभी लंबित मामलों का निपटारा हर हाल में किया जाएगा। इसी कड़ी में जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।

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आरटीई मान्यता से जुड़े हजारों मामले पोर्टल पर लंबित

शिक्षा विभाग की समीक्षा में यह सामने आया है कि राज्यभर में आरटीई के अंतर्गत निजी विद्यालयों की मान्यता से जुड़े 3014 मामले अब भी विभागीय पोर्टल पर लंबित हैं। इन प्रकरणों के कारण न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि पात्र बच्चों के नामांकन में भी देरी हो रही है। अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्द्र ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि 14 फरवरी तक इन मामलों का निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। विभाग ने साफ किया है कि तय समयसीमा का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

इनटेक कैपेसिटी न भरने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई

आरटीई नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों को अपनी निर्धारित इनटेक कैपेसिटी के अनुसार नामांकन करना अनिवार्य है। इसके बावजूद 4602 निजी विद्यालय ऐसे पाए गए हैं, जिन्होंने तय समय सीमा तक सीटों को नहीं भरा। शिक्षा विभाग ने पहले ही 25 जनवरी तक इनटेक कैपेसिटी पूरी करने का निर्देश दिया था, लेकिन अनुपालन नहीं होने पर अब इन स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन प्रक्रिया में देरी

आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नामांकन को लेकर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के तहत 65,505 आवेदन प्राप्त हुए हैं। हालांकि, इनमें से 34,374 आवेदन अब भी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों के स्तर पर जांच के लिए लंबित हैं। विभाग का कहना है कि इस तरह की देरी से नामांकन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और इसका सीधा असर अभिभावकों व छात्रों पर पड़ता है। इसलिए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को सत्यापन कार्य तत्काल पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई तय

शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्तर पर सत्यापन या जांच कार्य में अनावश्यक शिथिलता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि आरटीई जैसी संवेदनशील योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं है। समयबद्ध और पारदर्शी प्रक्रिया से ही योजना का उद्देश्य पूरा हो सकता है।

प्रतिपूर्ति राशि भुगतान की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

आरटीई के तहत नामांकित बच्चों के लिए निजी विद्यालयों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि को लेकर भी विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। जिलों में जांच प्रक्रिया जारी है और जिन जिलों से रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, वहां भुगतान की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हालांकि, कुछ जिलों से अब तक जांच रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण भुगतान रुका हुआ है। ऐसे सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी जांच रिपोर्ट तुरंत विभागीय पोर्टल पर अपलोड करें, ताकि निजी विद्यालयों को समय पर भुगतान किया जा सके।

समयबद्ध अनुपालन पर विभाग का जोर

शिक्षा विभाग का कहना है कि आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी स्तरों पर समन्वय और जवाबदेही आवश्यक है। मान्यता, नामांकन, सत्यापन और भुगतान—हर चरण में तय समयसीमा का पालन अनिवार्य किया गया है। विभाग ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे।

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