EWS Certificate Validity Rules: EWS सर्टिफिकेट की वैधता पर आयोग ने किया धमाका, अब नहीं चलेगा अफसरों का बहाना…
EWS Certificate Validity Rules: बिहार में सवर्ण समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के लिए एक बहुत ही राहत भरी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। ईडब्ल्यूएस (Economically Weaker Section) प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर अक्सर छात्रों और युवाओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी रहती थी, जिसे अब राज्य आयोग ने पूरी तरह साफ कर दिया है। मुजफ्फरपुर कलेक्ट्रेट में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि इस प्रमाणपत्र की शक्ति केवल वित्तीय वर्ष तक सीमित नहीं है।

वित्तीय वर्ष नहीं, जारी होने की तारीख से होगा हिसाब
राज्य आयोग ने आधिकारिक तौर पर यह निर्देश जारी किया है कि ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की वैधता उसके (Issuance Date) से पूरे एक साल तक मानी जाएगी। अब तक कई सरकारी कार्यालयों में इसे केवल 31 मार्च तक ही वैध माना जाता था, जिससे मार्च के महीने में प्रमाणपत्र बनवाने वाले युवाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। आयोग ने साफ कहा है कि अगर प्रमाणपत्र किसी भी महीने में जारी हुआ है, तो वह अगले साल उसी तारीख तक पूरी तरह मान्य रहेगा।
मुजफ्फरपुर में अधिकारियों के साथ बड़ी समीक्षा बैठक
उच्च जातियों के विकास के लिए गठित राज्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचन्द्र प्रसाद सिंह ने बुधवार को मुजफ्फरपुर में (Administrative Review) के दौरान जमीनी हकीकत का जायजा लिया। इस बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष राजीव रंजन और सदस्य जय कृष्ण झा भी मौजूद रहे। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि सवर्ण समाज के कई पात्र परिवारों को तकनीकी कारणों से इस आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिसे दुरुस्त करना आयोग की प्राथमिकता है।
आवेदनों के रिजेक्शन पर अब देना होगा ठोस कारण
अध्यक्ष महाचंद्र प्रसाद सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि अब से किसी भी (EWS Application) को बिना किसी ठोस वजह के निरस्त नहीं किया जा सकेगा। यदि कोई अधिकारी किसी आवेदन को खारिज करता है, तो उसे बाकायदा लिखित में कारण दर्ज करना होगा ताकि आवेदक को अपनी कमी पता चल सके। यह कदम भ्रष्टाचार और लापरवाही को रोकने के लिए उठाया गया है।
केवल 5 प्रतिशत लोगों तक पहुंच रहा है आरक्षण का लाभ
आयोग ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश करते हुए बताया कि राज्य में 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण की जगह मात्र 4 से 5 प्रतिशत लोग ही इसका लाभ उठा पा रहे हैं। (Social Empowerment) की इस दौड़ में सवर्ण समाज के गरीब परिवार पीछे छूट रहे हैं। आयोग ने अंचल स्तर पर स्वीकृत और अस्वीकृत आवेदनों की पूरी सूची एक महीने के भीतर तलब की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर लाभार्थी कम क्यों हैं।
वैधता को तीन साल करने की उठी पुरजोर मांग
समीक्षा बैठक के दौरान मौजूद बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों ने आयोग के सामने एक बहुत ही महत्वपूर्ण सुझाव रखा है। उन्होंने मांग की है कि ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की (Validation Period) को एक साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया जाए। उनका तर्क है कि बार-बार प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया से छात्रों का कीमती समय और पैसा बर्बाद होता है। इसके अलावा उम्र सीमा में भी छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।
केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय में भी मिले पूरा हक
बैठक में केवल राज्य की नौकरियों ही नहीं, बल्कि शिक्षा के बड़े संस्थानों पर भी चर्चा हुई। मांग उठी है कि केंद्रीय विद्यालय और (Navodaya Vidyalaya) में भी अन्य आरक्षित वर्गों की तरह ईडब्ल्यूएस श्रेणी के बच्चों को पूरी प्राथमिकता और आरक्षण मिले। साथ ही, निजी स्कूलों में आरटीई के तहत मिलने वाली सीटों पर भी इस वर्ग के गरीब बच्चों को कोटा देने की बात कही गई है ताकि उनकी प्रारंभिक शिक्षा बेहतर हो सके।
राष्ट्रीय भूमिहार ब्राह्मण परिषद के पांच बड़े सुझाव
मुजफ्फरपुर की इस बैठक में राष्ट्रीय भूमिहार ब्राह्मण परिषद ने भी अपना पक्ष मजबूती से रखा। परिषद ने (Five Point Demands) का एक ज्ञापन आयोग को सौंपा, जिसमें सवर्ण महिलाओं के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण, छात्रों के लिए विशेष छात्रावास, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र और एक ‘स्वर्ण बैंक’ की स्थापना जैसी क्रांतिकारी मांगें शामिल हैं। आयोग ने इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है।
सवर्ण समाज के उत्थान के लिए बनेगी नई नीति
आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि वे पूरे राज्य का दौरा कर रहे हैं ताकि सवर्ण समाज की वास्तविक स्थिति को समझा जा सके। उन्होंने कल्याण विभाग से अन्य वर्गों के लिए चल रही योजनाओं का (Data Collection) मांगा है, ताकि उसी तर्ज पर उच्च जातियों के गरीबों के लिए भी नई योजनाएं शुरू की जा सकें। आयोग जल्द ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिससे आने वाले समय में सवर्णों के लिए विकास के नए द्वार खुलेंगे।



