Gaya Doctor Extortion Case: खौफ के साये में है गया का जीवनदाता, डॉक्टर से मांगी गई एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम रंगदारी…
Gaya Doctor Extortion Case: बिहार के गया जिले में कानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए अपराधियों ने एक बार फिर सनसनी फैला दी है। इस बार निशाना बने हैं मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सतेंद्र कुमार। अपराधियों ने बेखौफ होकर डॉक्टर से राशि की मांग की है। यह (extortion demand from doctor) केवल एक धमकी नहीं है, बल्कि उस पेशे पर हमला है जिसे समाज में भगवान का दर्जा दिया गया है। इस घटना ने गया के चिकित्सा जगत में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

दिसंबर की सर्द रातों में मौत की दस्तक
घटना की शुरुआत 27 दिसंबर को हुई, जब डॉ. सतेंद्र कुमार के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से बार-बार कॉल आने लगे। शुरुआती दौर में व्यस्तता के कारण डॉक्टर कॉल नहीं उठा सके, लेकिन जब उन्होंने वापस कॉल किया तो दूसरी तरफ से मौत का फरमान सुनाया गया। फोन करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने (criminal threat for life) देते हुए सीधे तौर पर एक करोड़ रुपये रंगदारी के रूप में मांगे। अपराधी ने साफ लफ्जों में कहा कि यदि पैसा नहीं पहुंचा, तो इसका अंजाम बेहद खतरनाक होगा।
अपराधियों का दुस्साहस और बार-बार आती धमकियां
अपराधी इतने बेखौफ थे कि पहली धमकी के बाद भी वे चुप नहीं बैठे। 30 दिसंबर को उसी नंबर से फिर कॉल आया और डॉक्टर को रुपये देने के लिए मजबूर किया गया। लगातार मिल रही इन धमकियों ने (organized crime in Bihar) की जड़ों को उजागर कर दिया है। डॉक्टर और उनका पूरा परिवार अब अपने ही घर में कैद होने को मजबूर है। रंगदारी की इस कॉल ने डॉक्टर की मानसिक शांति को पूरी तरह से भंग कर दिया है और वे अब हर अनजान फोन कॉल को डर की नजर से देख रहे हैं।
पश्चिम बंगाल से महाराष्ट्र तक फैला अपराधियों का जाल
डॉ. सतेंद्र कुमार की शिकायत के बाद पुलिस ने जब तकनीकी जांच शुरू की, तो मामले के तार दूसरे राज्यों से जुड़े मिले। पुलिस की (technical surveillance investigation) में यह खुलासा हुआ है कि पहली बार 27 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के आसनसोल से कॉल किया गया था। वहीं, 30 दिसंबर को आई दूसरी धमकी भरी कॉल की लोकेशन महाराष्ट्र में मिली है। इससे यह साफ होता है कि डॉक्टर को धमकाने वाला गिरोह पेशेवर है और अपनी पहचान छिपाने के लिए अंतरराज्यीय सिम कार्ड्स का इस्तेमाल कर रहा है।
मगध कॉलोनी में दहशत के साये में डॉक्टर का परिवार
डॉ. सतेंद्र कुमार गया शहर के पॉश इलाके मगध कॉलोनी में अपने परिवार के साथ निवास करते हैं। एक जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट होने के नाते उनकी सुरक्षा शहर के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गई है। इस (high profile extortion case) के बाद उनके घर के आसपास सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। परिवार के सदस्य अब घर से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं। डॉक्टर का कहना है कि वे केवल समाज की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन इस तरह की धमकियों ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ दिया है।
मगध मेडिकल पुलिस की जांच और आगामी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए मगध मेडिकल थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब (police action on extortionists) के तहत मोबाइल नंबर के टावर लोकेशन और कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है। थानाध्यक्ष ने भरोसा दिलाया है कि पुलिस अपराधियों के बहुत करीब है और जल्द ही इस अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा। हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है।
गया के चिकित्सा जगत में गहराता आक्रोश
इस घटना के बाद गया के डॉक्टरों के बीच भारी रोष देखा जा रहा है। आईएमए (IMA) के स्थानीय सदस्यों ने मांग की है कि डॉक्टरों को विशेष सुरक्षा प्रदान की जाए। यदि (safety of medical professionals) सुनिश्चित नहीं की गई, तो डॉक्टर विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। गया पहले भी रंगदारी और अपहरण जैसी घटनाओं के लिए चर्चा में रहा है, लेकिन एक सरकारी अस्पताल के विभागाध्यक्ष को इस तरह निशाना बनाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है।
क्या फिर से लौट रहा है रंगदारी का काला दौर?
बिहार में पिछले कुछ समय से व्यवसायियों और डॉक्टरों से रंगदारी मांगने के मामलों में वृद्धि हुई है। गया की यह घटना (extortion culture in Bihar) की वापसी की ओर इशारा कर रही है। जब समाज का सबसे सम्मानित वर्ग यानी डॉक्टर ही सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या होगा? अपराधियों द्वारा करोड़ों की मांग करना यह दर्शाता है कि उन्हें कानून के लंबे हाथों का कोई डर नहीं रह गया है।
अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम का गठन
सूत्रों के अनुसार, गया पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए एक विशेष टीम (SIT for extortion case) का गठन किया है जो पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र पुलिस के संपर्क में है। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या अस्पताल का ही कोई कर्मचारी या कोई परिचित इस साजिश में शामिल है, जिसने डॉक्टर की आर्थिक स्थिति और उनके निजी नंबर की जानकारी अपराधियों तक पहुंचाई। कॉल करने वाले की आवाज की पहचान करने के लिए ऑडियो सैंपल्स का भी विश्लेषण किया जा सकता है।
सुरक्षा और न्याय की उम्मीद
डॉ. सतेंद्र कुमार जैसे समर्पित चिकित्सक से एक करोड़ की रंगदारी मांगना समाज के नैतिक पतन का संकेत है। अब पूरी उम्मीद गया पुलिस पर टिकी है कि वह कितनी जल्दी (justice for victims) सुनिश्चित करती है। अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजकर ही प्रशासन जनता के बीच फिर से विश्वास पैदा कर सकता है। गया के निवासी और चिकित्सा जगत अब केवल ठोस कार्रवाई और सुरक्षा की गारंटी चाहते हैं ताकि कोई दूसरा डॉक्टर अपराधियों के निशाने पर न आए।



