बिहार

Gaya Fire Accident News: गया में पत्तल बनाते समय जिंदा जल गया दंपती, शॉर्ट सर्किट की एक चिंगारी ने उजाड़ दी पूरी दुनिया

Gaya Fire Accident News: बिहार के गयाजी जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। चाकंद थाना क्षेत्र के बिथो गांव में मंगलवार की रात खुशियों का घर श्मशान में तब्दील हो गया। एक मेहनतकश दंपती जो अपने ही घर में छोटे स्तर पर रोजी-रोटी का इंतजाम कर रहा था, वह (Fatal Fire Incidents) की चपेट में आकर हमेशा के लिए खामोश हो गया। इस हादसे ने न केवल एक परिवार को तबाह कर दिया बल्कि गांव के हर शख्स की आंखों में आंसू ला दिए हैं।

Gaya Fire Accident News
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लघु उद्योग बना मौत का कारण

मृतक प्रमोद साव अपने घर में ही पत्तल बनाने का लघु कुटीर उद्योग चलाते थे। मंगलवार की रात भी वह अपनी पत्नी के साथ काम में व्यस्त थे ताकि समय पर ऑर्डर पूरा किया जा सके। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि जिस काम से उनके घर का चूल्हा जलता है, वही उनकी (Small Scale Industry Risks) का सबसे बड़ा कारण बन जाएगा। घर में रखे पत्तल और कच्चे माल ने आग को और भड़काने का काम किया, जिससे बचने का कोई रास्ता नहीं बचा।

शॉर्ट सर्किट की एक जानलेवा चिंगारी

घटना की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह भीषण हादसा बिजली के शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ। काम के दौरान अचानक बिजली के तारों से निकली एक छोटी सी चिंगारी ने पास में रखे (Electrical Short Circuit Causes) की सामग्री को अपनी गिरफ्त में ले लिया। पत्तल बनाने में इस्तेमाल होने वाला सूखा कचरा और अन्य ज्वलनशील पदार्थ इतनी तेजी से जले कि आग ने पल भर में विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे घर को अपनी आग की लपटों में समा लिया।

दंपती को नहीं मिला संभलने का मौका

जब तक प्रमोद साव और उनकी पत्नी आग की गंभीरता को समझ पाते, तब तक घर से बाहर निकलने के सारे रास्ते बंद हो चुके थे। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि दोनों उसी के बीच फंस गए। ग्रामीणों के अनुसार, घर के भीतर से (Accidental Death Trauma) की भयावह चीखें सुनाई दे रही थीं, लेकिन आग का तांडव इतना भयंकर था कि कोई भी अंदर घुसने की हिम्मत नहीं जुटा सका। देखते ही देखते दोनों ने आग के बीच ही दम तोड़ दिया।

ग्रामीणों का संघर्ष और बेबस कोशिशें

आग की लपटें उठते ही बिथो गांव में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के ग्रामीण अपने स्तर पर पानी और मिट्टी लेकर आग बुझाने के लिए दौड़े। (Community Disaster Response) के तहत गांव के युवाओं ने कड़ी मशक्कत की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जब तक आग पर काबू पाया गया, तब तक सब कुछ जलकर राख के ढेर में तब्दील हो चुका था। ग्रामीणों की आंखों के सामने ही उनका पड़ोसी और उसकी पत्नी राख बन गए।

पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और जांच

हादसे की सूचना मिलते ही चाकंद थानाध्यक्ष शिवम कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और स्थिति को नियंत्रित किया। (Police Investigation Procedures) को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने दोनों शवों को अपने कब्जे में ले लिया है और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अब इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि क्या बिजली के वायरिंग में कोई गंभीर लापरवाही थी या यह महज एक तकनीकी दुर्घटना थी।

बिथो गांव में पसरा मातम और सन्नाटा

इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे बिथो गांव में चूल्हा तक नहीं जला है। हर कोई प्रमोद साव और उनकी पत्नी के मिलनसार स्वभाव को याद कर रो रहा है। (Emotional Community Loss) के इस माहौल में ग्रामीण अब सरकार से पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे और सहायता की मांग कर रहे हैं। इस हादसे ने एक बार फिर रिहायशी इलाकों में चल रहे छोटे उद्योगों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बड़ी चेतावनी

यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो घरों में लघु उद्योग चलाते हैं। (Fire Safety Awareness) की कमी और बिजली के पुराने उपकरणों का इस्तेमाल अक्सर ऐसी बड़ी तबाही का कारण बनता है। गया की इस घटना ने प्रशासन को भी सचेत किया है कि उन्हें छोटे उद्योगों में अग्नि सुरक्षा के मानकों की जांच करनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी और प्रमोद साव का घर इस तरह श्मशान न बने।

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