Historical Temple Theft Case Saran: पुलिस की नाक के नीचे आस्था पर प्रहार, पौराणिक मूर्तियों की चोरी से दहला छपरा…
Historical Temple Theft Case Saran: बिहार के छपरा में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्हें कानून का खौफ भी नहीं रहा। मशरक थाना गेट से महज कुछ ही गज की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक राम जानकी शिव मंदिर में चोरों ने बड़ी ही सफाई से लाखों रुपये की संपदा पर हाथ साफ कर दिया। इस (Criminal audacity) ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है, क्योंकि घटना स्थल और पुलिस स्टेशन के बीच की दूरी न के बराबर है। जब रक्षक की मौजूदगी में ही मंदिर सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है।

अष्टधातु की मूर्तियों के साथ यादें भी ले गए चोर
सोमवार की सुबह जब मंदिर के पुजारी रोजाना की तरह पूजा-अर्चना करने पहुंचे, तो नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मंदिर के कपाट का ताला टूटा हुआ था और गर्भगृह से भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण की बेशकीमती अष्टधातु की मूर्तियां गायब थीं। इन (Antique idols value) का बाजार मूल्य लाखों में आंका जा रहा है, लेकिन भक्तों के लिए यह उनकी वर्षों पुरानी आस्था का केंद्र थीं। चोरों ने न केवल भगवान की प्रतिमाएं चुराईं, बल्कि मंदिर की अन्य कीमती सामग्रियों को भी अपना निशाना बनाया।
सबूत मिटाने की सोची-समझी साजिश
यह चोरी महज एक संयोग नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दी गई वारदात नजर आती है। चोरों ने पुलिस से बचने के लिए मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर (डिस्क) भी अपने साथ ले गए ताकि उनकी पहचान उजागर न हो सके। इस (Digital evidence destruction) ने पुलिस की जांच को काफी पेचीदा बना दिया है। मंदिर में तकनीक का सुरक्षा कवच तो था, लेकिन अपराधियों ने उस कवच को ही नष्ट कर दिया, जिससे पुलिस के हाथ फिलहाल खाली नजर आ रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
थाने के इतना नजदीक होने के बावजूद चोरों का बेखौफ होकर घंटों मंदिर में समय बिताना और भारी मूर्तियां लेकर फरार हो जाना स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी पर गहरा दाग है। ग्रामीणों का कहना है कि जब (Police surveillance failure) थाने की नाक के नीचे हो रही है, तो अपराधियों के मन में वर्दी का डर खत्म हो चुका है। लोगों में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि रात में गश्त होने के दावों के बीच इतनी बड़ी वारदात को अंजाम कैसे दे दिया गया।
स्वान दस्ते और फॉरेंसिक टीम ने संभाला मोर्चा
घटना की जानकारी मिलते ही मशरक थाना पुलिस ने आला अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक विशेषज्ञों और (Sniffer dog squad) को भी मौके पर बुलाया गया। कुत्ते ने मंदिर परिसर से लेकर आसपास के रास्तों तक साक्ष्य जुटाने की कोशिश की। हालांकि, डीवीआर गायब होने की वजह से पुलिस को अब आसपास की सड़कों पर लगे अन्य निजी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
थाना अध्यक्ष की दोहरी भूमिका और चुनौती
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मशरक के थाना अध्यक्ष स्वयं इस मंदिर समिति के पदेन सदस्य भी हैं। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी नैतिक और आधिकारिक (Administrative responsibility) दोनों थी। अपनी ही देखरेख वाली समिति के मंदिर में चोरी होना उनके नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब पुलिस पर न केवल चोरों को पकड़ने का दबाव है, बल्कि अपनी खोई हुई साख वापस पाने की जिम्मेदारी भी है।
गोपालगंज के बाद छपरा में दोहराया गया इतिहास
मालूम हो कि कुछ समय पहले पड़ोसी जिले गोपालगंज के थावे मंदिर में हुई चोरी ने भी पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया था। अब छपरा के इस पौराणिक मंदिर में हुई घटना (Interstate idol smuggling) के गिरोह की संलिप्तता की ओर भी इशारा कर रही है। पुलिस अब पुराने अपराधियों के रिकॉर्ड खंगाल रही है और सीमावर्ती इलाकों में नाकेबंदी कर दी गई है ताकि इन बेशकीमती मूर्तियों को जिले से बाहर ले जाने से रोका जा सके।
पुलिस का दावा: जल्द होगा मामले का पर्दाफाश
बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय जनता को आश्वासन दिया है कि अपराधियों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। पुलिस ने कई संदिग्धों को (Criminal interrogation) के लिए उठाया है और पूछताछ की जा रही है। इलाके के धर्मप्रेमियों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द ही मूर्तियों की बरामदगी नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि कानून के हाथ उन चोरों के गिरेबान तक कितनी जल्दी पहुँचते हैं।



