Mysterious Crow Deaths in Bhagalpur: आसमान से बरसी मौत, भागलपुर में एक साथ 127 कौओं ने तोड़ा दम
Mysterious Crow Deaths in Bhagalpur: बिहार के भागलपुर जिले से एक ऐसी विचलित कर देने वाली खबर आई है जिसने पर्यावरणविदों और आम जनता को चिंता में डाल दिया है। रविवार की सुबह नवगछिया अनुमंडल कार्यालय का मैदान किसी श्मशान जैसा नजर आने लगा, जब वहां एक-दो नहीं बल्कि पूरे 127 कौए मृत पाए गए। इस (unexplained wildlife mortality) की घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। स्थानीय लोग इस दृश्य को देखकर सहम गए हैं, क्योंकि एक ही प्रजाति के इतने पक्षियों का एक साथ दम तोड़ना किसी सामान्य घटना का संकेत नहीं लगता।

प्रत्यक्षदर्शियों की आंखों देखा खौफनाक मंजर
इस दर्दनाक मंजर के गवाह बने दरोगा कुमार ने बताया कि कचहरी ग्राउंड स्थित पेड़ों के नीचे और आसपास हर तरफ बेजान परिंदे बिखरे पड़े थे। ऐसा लग रहा था मानो रातों-रात कोई अदृश्य आपदा आई और इन बेजुबानों को निगल गई। प्रत्यक्षदर्शी ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में (sudden avian death incident) का ऐसा भयावह नजारा पहले कभी नहीं देखा था। लोग अब इस बात को लेकर सशंकित हैं कि क्या यह किसी जहरीली गैस का असर है या फिर प्रकृति का कोई ऐसा प्रकोप जो इंसानों के लिए भी चेतावनी हो सकता है।
वन विभाग की सक्रियता और पहली जांच
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम हरकत में आई और फॉरेस्ट ऑफिसर राजीव कुमार के नेतृत्व में एक दल तुरंत मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी और मृत कौओं को अपने कब्जे में ले लिया। विभाग ने प्राथमिक तौर पर (environmental temperature impact) को मौत की एक संभावित वजह बताया है, क्योंकि इन दिनों उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप जारी है। हालांकि, अधिकारी खुद भी इस बात से पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि केवल ठंड से इतनी बड़ी संख्या में मौत संभव है।
फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें
मौत की वास्तविक वजह जानने के लिए वन विभाग ने बिना देरी किए सभी मृत पक्षियों के नमूनों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि (zoonotic disease transmission) जैसे खतरों की पहचान की जा सके और समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें। क्या यह बर्ड फ्लू का कोई नया स्ट्रेन है या फिर इन पक्षियों ने कोई जहरीला दाना चुग लिया था? इन तमाम सवालों के जवाब अब केवल वैज्ञानिक विश्लेषण और लैब रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।
इलाके में बढ़ाई गई सख्त निगरानी
भागलपुर का यह क्षेत्र अब प्रशासन की विशेष निगरानी में है। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को मृत पक्षियों के पास न जाने और किसी भी अन्य असामान्य घटना की तुरंत जानकारी देने की हिदायत दी है। वन विभाग ने (wildlife conservation surveillance) को बढ़ा दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह सिलसिला आगे न बढ़े। आसपास के जलाशयों और पेड़ों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि अन्य पक्षियों के स्वास्थ्य की स्थिति का जायजा लिया जा सके।
क्या यह जलवायु परिवर्तन का कोई क्रूर इशारा है?
विशेषज्ञों का एक वर्ग इस घटना को जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ने से जोड़कर देख रहा है। अचानक तापमान का गिरना और (ecological balance disruption) अक्सर जीवों के लिए घातक साबित होता है। यदि कौए, जिन्हें बेहद सहनशील पक्षी माना जाता है, इस तरह मर रहे हैं, तो यह पर्यावरण में मौजूद किसी बड़े असंतुलन की तरफ इशारा करता है। यह घटना मानवीय सोच को झकझोरती है कि हम जिस प्रकृति का हिस्सा हैं, वह किस कदर बीमार हो रही है।
प्रशासन और वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती
वर्तमान में राजीव कुमार और उनकी टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती लोगों के बीच फैले डर को कम करना है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन (veterinary autopsy procedure) की रिपोर्ट आने तक संशय बरकरार रहेगा। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि वे हर संभव कोशिश कर रहे हैं ताकि मौत के असली गुनहगार—चाहे वह मौसम हो या संक्रमण—को पहचाना जा सके। तब तक के लिए नवगछिया का यह मैदान एक रहस्यमयी कब्रिस्तान बना हुआ है।



