Patna NEET Aspirant Death Case: जानें पटना की छात्रा के साथ हुई हैवानियत का सच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली पुलिस की पोल…
Patna NEET Aspirant Death Case: बिहार की राजधानी पटना से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने राज्य की कानून व्यवस्था और बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहानाबाद की एक होनहार छात्रा, जो पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी, अब इस दुनिया में नहीं रही। उसकी मौत के बाद जो (Forensic Evidence Findings) सामने आए हैं, उन्होंने न केवल पुलिस के दावों को झूठा साबित किया है, बल्कि एक गहरी और डरावनी साजिश की ओर भी इशारा किया है।

शरीर पर जख्मों के निशान बयां कर रहे हैं दरिंदगी
छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उन तमाम कयासों पर विराम लगा दिया है जो इस घटना को एक सामान्य दुर्घटना बता रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, मृतका के शरीर पर 10 से ज्यादा जगहों पर चोट और खरोंच के निशान पाए गए हैं, जो (Internal Injury Reports) के साथ मिलकर इस बात की पुष्टि करते हैं कि छात्रा ने मौत से पहले अपनी जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। उसके अंदरूनी हिस्सों में मिले घाव इस बात की ओर स्पष्ट संकेत देते हैं कि उसके साथ हैवानियत की गई थी।
नशीले इंजेक्शन और बेहोशी का गहरा रहस्य
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है कि छात्रा को कोई नशीला पदार्थ या इंजेक्शन दिया गया था। आशंका जताई जा रही है कि (Toxicology Screening Tests) में इस बात का खुलासा हो सकता है कि उसे बेबस करने के लिए दवाइयों का सहारा लिया गया। जिस तरह से वह 6 जनवरी की रात को अपने कमरे में बेसुध मिली थी, वह किसी सामान्य बीमारी का संकेत नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।
पुलिस की भूमिका और संदेहास्पद बयानबाजी
घटना के शुरुआती चरण में पुलिस प्रशासन का रवैया बेहद उदासीन और भ्रामक रहा, जिससे पीड़ित परिवार का आक्रोश बढ़ गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मीडिया के सामने यह बयान दिया था कि (Criminal Investigation Flaws) की वजह से शायद वह नशे में गिर गई होगी और उसकी जान चली गई। पुलिस का यह दावा तब पूरी तरह खोखला साबित हुआ जब अस्पताल सूत्रों ने बताया कि डॉक्टरों ने पहले ही छात्रा के शरीर पर नाखून और चोट के निशान होने की जानकारी पुलिस को दे दी थी।
इलाज में लापरवाही या साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश
छात्रा की मौत के पीछे अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं, क्योंकि उसे सही समय पर सही इलाज नहीं मिला। गंभीर हालत के बावजूद छात्रा को किसी बड़े अस्पताल या पीएमसीएच ले जाने के बजाय एक ऐसे (Medical Negligence Issues) वाले निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया जहाँ महिला रोग विशेषज्ञ तक मौजूद नहीं थे। आरोप है कि इलाज के दौरान परिजनों को छात्रा से मिलने तक नहीं दिया गया, जिससे यह संदेह गहराता है कि कहीं यह सब सबूत मिटाने के लिए तो नहीं किया गया?
हॉस्टल मालिक की गिरफ्तारी और सियासी सरगर्मी
मामले की गंभीरता और बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने आखिरकार हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को सलाखों के पीछे भेज दिया है। उस पर (Evidence Tampering Charges) के तहत मामला दर्ज किया गया है, क्योंकि आरोप है कि घटना के बाद हॉस्टल परिसर से सबूतों को मिटाने का प्रयास किया गया था। यह मामला अब राजनीतिक गलियारों में भी गूंज रहा है और विपक्षी दल सरकार को घेरते हुए सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं ताकि छात्रा को असल इंसाफ मिल सके।
बिहार की बेटियों के सपनों पर लगा ग्रहण
जहानाबाद के शुकराबाद की रहने वाली 18 साल की यह छात्रा बड़ी उम्मीदों के साथ नीट की तैयारी करने पटना आई थी। उसकी मौत ने (Women Safety in Hostels) को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या शहरों में स्थित गर्ल्स हॉस्टल वास्तव में सुरक्षित हैं? एक होनहार छात्रा का इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाना केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक शर्मनाक हार है जहाँ अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं।
न्याय की गुहार और भविष्य की चुनौतियां
फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद पुलिस बैकफुट पर है और अब हत्या और दरिंदगी की धाराओं के तहत जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। (Justice for Victims) की मांग को लेकर पटना से लेकर जहानाबाद तक कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक इस मामले के असली गुनहगारों को फांसी के फंदे तक नहीं पहुँचाया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। यह केस बिहार पुलिस के लिए एक कड़ी परीक्षा है कि वह अपनी साख कैसे बचाती है।



