Patna NEET Student Case: पटना नीट छात्रा मामला, एसआईटी ने छह संदिग्धों को लिया हिरासत में…
Patna NEET Student Case: बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और उसकी संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस की कार्रवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। गुरुवार को एसआईटी ने इस प्रकरण में छह संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनसे गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है। जानकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए ये सभी लोग हॉस्टल मालिक और प्रबंधन से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। मुन्नाचक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई इस रूहानी घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। अब जांच में तेजी लाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) का विस्तार करते हुए इसमें सीआईडी और आईपीएस अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।

हॉस्टल संचालिका से पूछताछ और जहानाबाद में छापेमारी
जांच की कड़ियों को जोड़ने के लिए एसआईटी ने हॉस्टल संचालिका और उसके पुत्र से दोबारा लंबी पूछताछ की है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि घटना वाले दिन हॉस्टल के भीतर की गतिविधियां क्या थीं और क्या किसी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वहां हुआ था। इससे पहले, बुधवार को पुलिस टीम ने हॉस्टल के मुख्य संचालक मनीष रंजन के जहानाबाद स्थित पैतृक आवास पर भी दबिश दी थी। वहां परिजनों और ग्रामीणों से मनीष के हालिया दौरों और लोकेशन के बारे में जानकारी जुटाई गई। सूत्रों की मानें तो मनीष के घर की तलाशी के दौरान पुलिस को कुछ अहम दस्तावेज मिले हैं, जो इस गुत्थी को सुलझाने में मददगार साबित हो सकते हैं।
डीएनए जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर टिकी उम्मीदें
इस पूरे मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की प्रारंभिक रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर जैविक अवशेष मिलने की पुष्टि के बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई है। पुलिस अब तक छात्रा के परिजनों और संदिग्धों समेत लगभग 40 लोगों के डीएनए नमूने एकत्र कर चुकी है। गुरुवार को भी कुछ नए लोगों के सैंपल लिए गए, जिन्हें मिलान के लिए लैब भेजा गया है। पुलिस को अब एम्स की विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट और बिसरा जांच के ‘सेकेंड ओपिनियन’ का बेसब्री से इंतजार है, जिससे मौत के सटीक कारणों और समय का खुलासा हो सके।
एसआईटी का विस्तार और 50 सदस्यीय टीम की तैनाती
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पटना सिटी एसपी के कार्यालय में उच्चाधिकारियों की एक विशेष बैठक हुई। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि जांच को अधिक पेशेवर और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए टीम की संख्या बढ़ाई जाए। अब इस केस की जांच में लगे पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की संख्या 30 से बढ़ाकर 50 कर दी गई है। तकनीकी टीम संदिग्धों के मोबाइल टावर लोकेशन, गूगल हिस्ट्री और हॉस्टल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है। पुलिस यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि क्या इस जघन्य कृत्य में किसी ऐसे अजनबी का हाथ है जो अब तक पुलिस की नजरों से बचा हुआ है।
डिजिटल सबूतों और तकनीकी विश्लेषण का सहारा
पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे केवल बयानों पर निर्भर नहीं हैं। छात्रा और संदिग्धों के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि घटना की रात की हर हलचल का मिलान किया जा सके। तकनीकी विशेषज्ञ यह पता लगा रहे हैं कि घटना के समय किन-किन मोबाइल नंबरों की सक्रियता उस टावर लोकेशन में थी। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जांच अब एक महत्वपूर्ण चरण में है और वैज्ञानिक रिपोर्ट आते ही दोषियों की पहचान उजागर कर दी जाएगी। प्रशासन पर इस मामले को जल्द सुलझाने का भारी दबाव है, क्योंकि छात्रा के परिजन और छात्र संगठन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।



