Patna Tejas Express Violence Case: बीमार भतीजी को ट्रेन में लिटाने पर सह-यात्री ने जड़ा थप्पड़, बचाव करने आए बुजुर्ग अधिकारी को भी किया लहूलुहान
Patna Tejas Express Violence Case: बिहार की राजधानी स्थित पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन से एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने रेल यात्रियों की सुरक्षा और सह-यात्रियों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेजस राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेन में सफर शुरू होने से पहले ही (Railway Passenger Conflict) का एक डरावना रूप देखने को मिला। यहाँ एक बीमार युवती को उसकी आवंटित बर्थ पर लिटाने की कोशिश करना उसके और उसके बुजुर्ग चाचा के लिए किसी खौफनाक अनुभव में बदल गया। यह घटना न केवल शारीरिक हिंसा बल्कि रेलवे सुरक्षा बल की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाती है।

बीमार भतीजी और बुजुर्ग चाचा पर हमला
हाजीपुर की शाही कॉलोनी निवासी 67 वर्षीय ब्रज किशोर सिंह, जो स्वयं रेलवे से कॉमर्शियल सुपरिटेंडेंट के पद से सेवानिवृत्त हैं, अपनी भतीजी को छोड़ने स्टेशन आए थे। उनकी भतीजी हरियाणा में नर्स है और 18 दिसंबर को दिल्ली जाने के लिए (Tejas Express Train Boarding) की प्रक्रिया कर रही थी। भतीजी की तबीयत खराब थी, इसलिए उसे मिडिल बर्थ पर लेटने के लिए सीट खोलने की जरूरत थी। जैसे ही उसने बर्थ खोलने की कोशिश की, नीचे की सीट पर बैठे एक अधेड़ यात्री ने हिंसक विरोध शुरू कर दिया।
थप्पड़ और मुक्कों से बुजुर्ग को किया लहूलुहान
आरोप है कि नीचे की सीट पर बैठे लगभग 45 वर्षीय यात्री ने अचानक उग्र होकर युवती को थप्पड़ जड़ दिया। जब बुजुर्ग ब्रज किशोर सिंह ने अपनी भतीजी का बचाव करने की कोशिश की, तो आरोपी ने (Physical Assault on Elderly) करते हुए उनके चेहरे और सीने पर मुक्कों की बौछार कर दी। इस हमले में बुजुर्ग के हाथ से खून निकलने लगा और वे बुरी तरह चोटिल हो गए। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ एक वीआईपी ट्रेन के भीतर हुआ, जहाँ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने का दावा किया जाता है।
विभाग का होने के बावजूद आरपीएफ ने बरती ढिलाई
पीड़ित ब्रज किशोर सिंह ने तुरंत रेलवे हेल्पलाइन 139 पर कॉल कर मदद मांगी, जिसके बाद आरपीएफ कर्मी मौके पर पहुंचे। पीड़ित का आरोप है कि (Railway Police Inaction) के कारण आरोपी को मौके पर नहीं दबोचा गया। सेवानिवृत्त विभागीय अधिकारी होने के बावजूद उन्हें न्याय के लिए भटकना पड़ा। आरपीएफ ने आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के बजाय टाल-मटोल का रवैया अपनाया, जिसका फायदा उठाकर हमलावर यात्री अपनी सीट छोड़कर गायब होने में सफल रहा।
दहशत के कारण स्थगित करनी पड़ी यात्रा
इस हिंसक घटना और पुलिस के असहयोग से चाचा-भतीजी इतने डरे हुए थे कि उन्होंने अपनी यात्रा रद्द करने का फैसला लिया। लहूलुहान हालत में बुजुर्ग को (Railway Hospital Medical Treatment) के लिए ले जाया गया, जहाँ उनका प्राथमिक उपचार हुआ। एक बीमार युवती जिसे इलाज और आराम की जरूरत थी, उसे स्टेशन पर इस तरह के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। फिलहाल आरोपी की पहचान रोहित कुमार के रूप में हुई है, लेकिन पुलिस के पास उसका पूरा विवरण मौजूद नहीं है।
पटना रेल पुलिस की सुस्त जांच पर उठे सवाल
पटना जंक्शन के रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन आरोपी पहले ही फरार हो चुका था। पुलिस अब (Criminal Identification Process) के जरिए आरोपी के स्थायी पते और पहचान का पता लगाने की कोशिश कर रही है। बड़ा सवाल यह है कि जब यात्री का विवरण चार्ट और पीएनआर में उपलब्ध होता है, तो पुलिस को उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? विभागीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है।
यात्रियों की सुरक्षा और हेल्पलाइन की हकीकत
यह मामला रेल सफर के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कई कड़वे सच सामने लाता है। (Passenger Safety Protocols) के दावों के बीच एक बुजुर्ग और बीमार महिला का सुरक्षित न होना चिंताजनक है। यदि रेलवे के अपने सेवानिवृत्त उच्चाधिकारी को प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए संघर्ष करना पड़े, तो आम आदमी की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। जीआरपी ने काफी दबाव के बाद केस तो दर्ज किया है, लेकिन गिरफ्तारी न होना पुलिस की विफलता को दर्शाता है।
न्याय की उम्मीद और रेल प्रशासन की जवाबदेही
ब्रज किशोर सिंह ने रेल प्रशासन से मांग की है कि आरोपी यात्री को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए। यह घटना (Railway Grievance Redressal) तंत्र की खामियों को उजागर करती है, जहाँ मौके पर मौजूद सुरक्षा बल अपराधी को पकड़ने के बजाय मूकदर्शक बना रहा। अब देखना यह है कि पटना रेल पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और टिकट विवरण की मदद से कब तक उस फरार हमलावर को गिरफ्तार कर पाती है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके।



