Railway Emergency Rescue: कंचनजंघा एक्सप्रेस ने हुआ बड़ा हादसा, रेल पुल पर फंसी ट्रेन, यात्रियों की थमी सांसें
Railway Emergency Rescue: बिहार के कटिहार जिले में बारसोई-सुधानी रेलखंड पर शनिवार दोपहर एक हड़कंप मच गया, जब ट्रेन संख्या 13175 कंचनजंघा एक्सप्रेस अचानक रेलवे ब्रिज पर रुक गई। चलते समय ब्रेक पाइप अलग हो जाने से एसीपी (ऑटोमैटिक कंट्रोल प्रेशर) सक्रिय हो गया और सुरक्षा कारणों से ट्रेन को वहीं रोकना पड़ा। रेल अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई से स्थिति नियंत्रण में आई, लेकिन ट्रेन में सवार यात्रियों के बीच (Train Safety) को लेकर अफरा-तफरी मच गई।

ब्रेक पाइप खुलने से एसीपी सक्रिय
अपर मंडल रेल प्रबंधक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पुल से गुजरते समय ट्रेन के ब्रेक पाइप खुलने के कारण एसीपी एक्टिवेट हो गया। ट्रेन तुरंत रुक गई और यात्री क्षणिक चिंता में पड़ गए। कटिहार रेल मंडल के प्रबंधक ने तकनीकी जांच के आदेश दिए और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच टीम ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी।
एसीपी सूचना और मौके पर त्वरित कार्रवाई
रेलवे सूत्रों के अनुसार, 13 दिसंबर को लगभग 15:44 बजे कंट्रोल से सूचना मिली कि 13175 अप ट्रेन में एसीपी एक्टिवेट हो गया है। आरपीएफ दारोगा अजीत कुमार रेलवे स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे और निरीक्षण में पाया कि ट्रेन रेलवे ब्रिज संख्या 137 पर खड़ी है। ट्रेन प्रबंधक और सहायक लोको पायलट से पूछताछ में सामने आया कि 15:31 बजे दो कोचों के बीच ब्रेक पाइप खुल गया था। यात्रियों में अफरा-तफरी के बावजूद किसी को चोट नहीं आई। यह घटना (Railway Emergency) की चेतावनी थी कि तकनीकी सुरक्षा उपकरणों की निगरानी कितनी अहम है।
पुल पर फंसी ट्रेन और यात्रियों की चिंताएं
सुधानी अप और डाउन दोनों रेल पुल पर करीब 40 से 60 मिनट तक ट्रेनें खड़ी रहीं। हजारों यात्रियों ने सांसें थामकर सुरक्षा इंतजार किया। ट्रेन प्रबंधन और आरपीएफ की तत्परता से ब्रेक पाइप को जोड़ा गया और तकनीकी जांच पूरी की गई। इस दौरान रेलवे ब्रिज के नीचे स्थानीय लोग भी जमा हुए और सुरक्षा व्यवस्था को नजदीक से देखा। यात्रियों के लिए यह अनुभव (Passenger Safety Concern) बेहद तनावपूर्ण था।
आरपीएफ दारोगा ने जोखिम उठाया
ब्रेक पाइप जोड़ने के लिए आरपीएफ दारोगा अजीत कुमार ने अपने जीवन को जोखिम में डालते हुए रेल पुल पर चढ़कर कार्य किया। उन्होंने लोहे की संरचना के सहारे पुल के नीचे जाकर पाइप को सुरक्षित रूप से जोड़ा। यह कार्य विशेषज्ञ तकनीकी कर्मचारियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता, लेकिन आरपीएफ ने अपनी निष्ठा और बहादुरी दिखाते हुए ट्रेन को सुरक्षित किया। इस साहसिक प्रयास को सभी यात्रियों ने सराहा।
मरम्मत और ट्रेन का प्रस्थान
ब्रेक पाइप जोड़ने और तकनीकी जांच के बाद 13175 कंचनजंघा एक्सप्रेस ने 16:33 बजे गंतव्य की ओर प्रस्थान किया। सहायता में लगी 22449 डाउन ट्रेन 16:40 बजे रवाना हुई। इस घटना से यात्रियों को असुविधा जरूर हुई, लेकिन रेल अधिकारियों की तत्परता ने (Railway Crisis Management) बड़ी दुर्घटना टाल दी।
सुरक्षा मानकों का पालन
मरम्मत कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि इस घटना से यह स्पष्ट हुआ कि नियमित उपकरण निरीक्षण और निगरानी आवश्यक है। ट्रेन में किसी प्रकार की अनियमितता या अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए निगरानी और सुरक्षा प्रणाली को और कड़ा किया जाएगा।
जांच टीम और भविष्य की कार्रवाई
कटिहार रेल मंडल में आंतरिक जांच टीम गठित की गई है। इस टीम को जल्द रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। रेल प्रशासन ने यात्रियों से हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया और बताया कि कर्मचारियों की सतर्कता और तत्परता ने स्थिति को नियंत्रण में रखा। यह घटना (Railway Safety Protocol) के महत्व को रेखांकित करती है।
यात्रियों की प्रतिक्रिया और घटना का असर
ब्रेक पाइप की मरम्मत और ट्रेन के सुरक्षित प्रस्थान के बाद यात्रियों ने आरपीएफ के साहस और रेल कर्मचारियों के कार्यशैली की सराहना की। ट्रेन ब्रिज पर फंसी ट्रेन के दौरान यात्रियों ने सहमति जताई कि सतर्कता और तत्परता ही ऐसी तकनीकी खतरनाक स्थितियों में बचाव का मूलमंत्र है।
निष्कर्ष: तकनीकी सावधानी और मानव बहादुरी
कंचनजंघा एक्सप्रेस की यह घटना दर्शाती है कि (Railway Emergency Response) में तकनीकी निरीक्षण और कर्मचारियों की तत्परता दोनों कितनी अहम हैं। ट्रेन ब्रिज पर फंसी ट्रेन और हजारों यात्रियों के बीच आरपीएफ की बहादुरी ने एक बड़ी दुर्घटना टाल दी। भविष्य में रेलवे सुरक्षा उपायों और उपकरणों की नियमित जांच यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।



