बिहार

Rashtriya Janata Dal: चुनावी गणित बिगड़ा, राजद में तेज हुआ मंथन, नेताओं की भूल और सर्वे की गलतफहमी बनी वजह

Rashtriya Janata Dal: बिहार विधानसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी ने हार की समीक्षा के लिए बैठकों का दौर शुरू किया है, जहाँ पदाधिकारियों ने नेतृत्व पर अपनी उपेक्षा (Neglect) का सीधा आरोप लगाया है। प्रदेश राजद कार्यालय में चल रही प्रमंडलवार समीक्षा बैठक का यह दूसरा चरण है, जिसमें ज़िला और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। ये बैठकें 9 दिसंबर तक चलनी हैं। पहले चरण में उम्मीदवारों के साथ बैठक हुई थी, जिसके बाद सैकड़ों बागियों पर कार्रवाई की आशंका है। लेकिन दूसरे चरण में पार्टी पदाधिकारियों की शिकायतें उम्मीदवारों से भी ज़्यादा गंभीर हैं। यह स्थिति राजद के भीतर Internal Politics के गंभीर संकट को दर्शाती है।

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टिकट बंटवारे का विवाद: ‘बाहरी’ उम्मीदवारों ने कार्यकर्ताओं को किया निराश

समीक्षा बैठक में एक ओर जहाँ उम्मीदवारों ने पार्टी पदाधिकारियों से सहयोग न मिलने की शिकायत की, वहीं पदाधिकारियों ने नेतृत्व की टिकट वितरण नीति पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया। पार्टी के प्रदेश और ज़िलास्तरीय पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि बाहर से उम्मीदवार बनाए जाने के कारण ज़मीनी नेता व कार्यकर्ता मायूस हो गए। उनकी शिकायत है कि जिन लोगों की क्षेत्र में कोई मज़बूत पकड़ नहीं थी, उन्हें नेतृत्व ने सिंबल दे दिया। ये हवा-हवाई नेता आम लोगों और समर्थकों की तो बात ही छोड़िए, दल के पदाधिकारियों के लिए भी अपरिचित थे, जिससे Grassroots Support पूरी तरह से बिखर गया।

मायूसी और लेन-देन का आरोप: कहाँ से आए ‘पैराशूट’ उम्मीदवार?

जिन पार्टी पदाधिकारियों को टिकट की आस थी, वे इन अचानक आए (Parachute Candidates) उम्मीदवारों को देखकर मायूस हो गए। उनकी निराशा इस बात से और भी बढ़ गई कि इन उम्मीदवारों के पीछे कई तरह की अटकलें और अफ़वाहें सामने आईं। बैठकों के दौरान यह गंभीर आरोप भी हवा में तैरता रहा कि लेन-देन के कारण टिकटों का बंटवारा हुआ है। पदाधिकारियों की मायूसी इस बात से भी है कि क्षेत्रीय नेता होने के बावजूद उन्हें अनदेखा किया गया। इन आरोपों ने पार्टी के भीतर Leadership Trust और पारदर्शिता (Transparency) पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।

नेतृत्व से दूरी: संतरी भी करते रहे ‘हील-हुज्जत’

पार्टी पदाधिकारियों की एक और बड़ी शिकायत दल के नेता (Party Leader) से पहुँच (Access) को लेकर है। उन्होंने शिकायत की कि नेता से मिलने के लिए उन्हें कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ा। स्थिति की गंभीरता बताते हुए उन्होंने कहा कि दरवाजे पर खड़ा संतरी भी पार्टी कार्यकर्ताओं से हील-हुज्जत (Arrogance) करता रहा। और अगर किसी पदाधिकारी को नेता से मिलने का मौका मिला भी, तो वे अकेले में मुलाकात नहीं कर पाए। नेता के साथ हमेशा उनके खास सिपहसलार (Close Aides) मौजूद रहते थे, जिससे पार्टी पदाधिकारी नेतृत्व के समक्ष खुलकर बात नहीं कर पाए। यह Communication Gap हार का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

सर्वे में हुआ बड़ा खेल: मिलीभगत से रिपोर्ट को पक्ष में करने का आरोप

समीक्षा बैठक में सबसे सनसनीखेज आरोप उम्मीदवारों के चयन के लिए कराए गए सर्वे (Internal Survey) पर लगा है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि मिलीभगत (Collusion) कर कुछ उम्मीदवारों ने सर्वे रिपोर्ट को अपने पक्ष में करवा लिया। सूत्रों के अनुसार, ज़िलों से मिल रही इस गंभीर शिकायत के बाद प्रदेश नेतृत्व सकते में है। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि वे क्या रिपोर्ट तैयार करें और किस पर कार्रवाई की अनुशंसा करें, क्योंकि आरोप सीधे पार्टी की चयन प्रक्रिया (Selection Process) पर लग रहे हैं। हालाँकि, एक बात तय है कि चुनाव में उम्मीदवारों को सहयोग नहीं करने वाले कार्यकर्ताओं पर जल्द ही अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) होगी।

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