बिहार

StudentDeathCase – फुलवारीशरीफ में छात्रा मौत मामले की आज सीन जांच

StudentDeathCase – राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र में एक छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही है। हरिनगर स्थित एक बहुमंजिला इमारत से गिरकर 16 वर्षीय छात्रा की जान चली गई थी। सोमवार को घटनास्थल पर सीन रीक्रिएशन होना था, लेकिन फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम की व्यस्तता के कारण इसे टाल दिया गया। अब मंगलवार को सातवीं मंजिल की छत से पूरी प्रक्रिया दोबारा तैयार कर वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाएगी।

phulwari student death investigation

सीन रीक्रिएशन के लिए विशेष तैयारी

पुलिस के अनुसार, छात्रा की ऊंचाई और वजन के अनुरूप तीन पुतले तैयार कराए गए हैं। इन्हें सातवीं मंजिल से नीचे गिराकर यह समझने की कोशिश की जाएगी कि घटना किन परिस्थितियों में हुई होगी। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर होगी, ताकि किसी भी संभावना को नजरअंदाज न किया जाए।

थानाध्यक्ष गुलाम शाहबाज ने बताया कि 11 सदस्यीय विशेष जांच दल वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रहा है। परिवार की ओर से उठाए गए सवालों और लगाए गए आरोपों को भी गंभीरता से परखा जा रहा है।

दुष्कर्म की पुष्टि नहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट स्पष्ट

पश्चिमी पटना के पुलिस अधीक्षक भानू प्रताप सिंह ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई जांच में यौन शोषण के कोई संकेत नहीं मिले हैं।

यह जानकारी सामने आने के बाद जांच का फोकस अब इस बात पर है कि छात्रा छत से कैसे गिरी। क्या उसे किसी ने धक्का दिया या उसने खुद छलांग लगाई, इस प्रश्न का उत्तर तलाशने के लिए सीन रीक्रिएशन अहम माना जा रहा है।

सीसीटीवी फुटेज भी जांच के दायरे में

घटना सुमित्रा हाइट्स अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल पर हुई थी। पुलिस के अनुसार, इमारत में लगे सीसीटीवी कैमरों में छात्रा के सीढ़ियों से ऊपर जाते और बाद में गिरने की घटना रिकॉर्ड हुई है। फुटेज की तकनीकी जांच भी कराई जा रही है, ताकि घटनाक्रम की सटीक टाइमलाइन स्पष्ट हो सके।

घटना के बाद शुरुआती संदेह के आधार पर अपार्टमेंट में कार्यरत एक बढ़ई, सुरक्षा गार्ड समेत चार लोगों को हिरासत में लिया गया था। पूछताछ के बाद फिलहाल उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य सामने नहीं आया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता।

परिवार की आशंकाओं पर भी जांच

परिजनों ने शुरुआत में घटना को लेकर आशंका जताई थी। इसी के मद्देनजर छात्रा का पोस्टमार्टम एम्स के मेडिकल बोर्ड से कराया गया, ताकि रिपोर्ट पर किसी प्रकार का सवाल न उठे। अधिकारियों का कहना है कि जांच पारदर्शी ढंग से की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।

जांच टीम ने छात्रा के कोचिंग संस्थान के शिक्षकों, सहपाठियों, परिजनों और उसके पैतृक गांव चकमूसा के लोगों से भी बातचीत की है। उद्देश्य यह जानना है कि घटना से पहले छात्रा की मानसिक स्थिति कैसी थी और क्या कोई ऐसा कारण था, जो इस घटना से जुड़ा हो सकता है।

वैज्ञानिक साक्ष्यों पर टिकी उम्मीद

पुलिस का मानना है कि सीन रीक्रिएशन से कई अहम सवालों के जवाब मिल सकते हैं। यह प्रक्रिया यह समझने में मदद करेगी कि गिरने का कोण, दूरी और प्रभाव किस परिस्थिति में संभव है।

अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यपरक होगी। जब तक सभी तकनीकी और वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने नहीं आ जातीं, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस की पैनी नजर है और आगे की कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।

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