बिहार

Vaccination – मुंगेर में डेढ़ माह की बच्ची की मौत पर उठा सवाल, जांच में सामने आई पूरी सच्चाई

Vaccination – बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर प्रखंड अंतर्गत गोबड्डा पंचायत के वार्ड संख्या 09 स्थित शिवपुर लौंगाय तांती टोला में गुरुवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब डेढ़ माह की एक दुधमुंही बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और परिजनों के साथ ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए।

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वैक्सीनेशन के बाद मौत का आरोप, परिजनों में आक्रोश

मृत बच्ची के परिजनों का कहना था कि बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमित टीकाकरण अभियान के तहत बच्ची को पेंटावेलेंट वैक्सीन दी गई थी। आरोप लगाया गया कि वैक्सीन लगने के कुछ घंटों बाद ही बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी और गुरुवार सुबह उसकी मौत हो गई। इसी आशंका के चलते परिजन और ग्रामीण इसे टीके से जोड़कर देख रहे थे और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे थे।

घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नाराजगी जताने लगे। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची

हंगामे की सूचना पर शामपुर थाना की पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को शामिल किया गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की और घटना से जुड़ी सभी जानकारियां एकत्र कीं।

अधिकारियों ने बच्ची की चिकित्सा पृष्ठभूमि, टीकाकरण का समय, उसके बाद की गतिविधियों और देखभाल से जुड़े पहलुओं की विस्तार से जांच की।

जांच में सामने आया दम घुटने से मौत का कारण

स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों की संयुक्त जांच के बाद जो निष्कर्ष सामने आया, वह परिजनों के आरोपों से अलग था। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुबोध कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में बच्ची की मौत का कारण दम घुटना पाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेंटावेलेंट वैक्सीन और बच्ची की मृत्यु के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

डॉ. कुमार के अनुसार, वैक्सीन दिए जाने के बाद देर रात बच्ची की मां ने उसे दूध पिलाया और फिर ढककर सुला दिया। आशंका जताई गई कि सोते समय बच्ची के मुंह और नाक पर कपड़ा आ जाने से सांस लेने में बाधा हुई, जिससे दम घुटने की स्थिति बनी और उसकी जान चली गई।

पेंटावेलेंट वैक्सीन को लेकर क्या बोले स्वास्थ्य अधिकारी

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को यह भी समझाया कि पेंटावेलेंट वैक्सीन शिशुओं को पांच गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए दी जाती है। इनमें डिप्थीरिया, टेटनस, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह वैक्सीन राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा है और वर्षों से सुरक्षित रूप से इस्तेमाल की जा रही है।

टीम ने यह भी जानकारी दी कि उसी दिन गांव में कुल 11 बच्चों को यह वैक्सीन दी गई थी और किसी अन्य बच्चे में किसी तरह की जटिलता सामने नहीं आई।

ग्रामीणों को दी गई सतर्कता और जागरूकता की सलाह

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने परिजनों और ग्रामीणों को नवजात शिशुओं की देखभाल को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। अधिकारियों ने बताया कि छोटे बच्चों को सुलाते समय उनके चेहरे को ढकने से बचना चाहिए और सांस लेने के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित करनी चाहिए।

पुलिस और प्रशासन के समझाने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। फिलहाल मामले को लेकर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए जागरूकता अभियान तेज करने की बात कही है।

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