EducationBudget – यूनियन बजट 2026 में शिक्षा पर बढ़ा खर्च, असर कितना होगा?
EducationBudget – हर साल केंद्रीय बजट पेश होने के साथ ही आम परिवारों में एक सवाल जरूर उठता है कि इस बार शिक्षा के लिए सरकार ने क्या नया किया। यूनियन बजट 2026 में शिक्षा को लेकर पहली नजर में तस्वीर सकारात्मक दिखाई देती है। बजट का आकार बढ़ा है, कई नई घोषणाएं की गई हैं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं सामने रखी गई हैं। हालांकि, यह बहस भी उतनी ही जरूरी है कि क्या ये फैसले जमीनी स्तर पर स्कूलों, कॉलेजों और छात्रों के जीवन में ठोस बदलाव ला पाएंगे।

शिक्षा बजट में इस बार कितना इजाफा
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए शिक्षा क्षेत्र को कुल 1.39 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। पिछले साल यह आंकड़ा 1.28 लाख करोड़ रुपये का था। इस तरह शिक्षा बजट में लगभग 8 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार इसे अब तक का सबसे बड़ा शिक्षा बजट मान रही है और इसे सीखने के ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया जा रहा है।
GDP के अनुपात में खर्च अब भी सवालों में
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत खर्च करने का लक्ष्य तय किया गया था। हालांकि, मौजूदा बजट में भी यह स्तर हासिल नहीं हो पाया है। कुल राशि में वृद्धि के बावजूद GDP के अनुपात में शिक्षा पर खर्च सीमित ही बना हुआ है। इससे यह संकेत मिलता है कि प्राथमिकता तो है, लेकिन बड़े स्तर पर निवेश की जरूरत अभी भी बनी हुई है।
उच्च शिक्षा को मिला अपेक्षाकृत ज्यादा समर्थन
इस बार बजट में उच्च शिक्षा को खास तवज्जो दी गई है। विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और शोध से जुड़े कार्यक्रमों के लिए आवंटन में करीब 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। सरकार का जोर अनुसंधान और नवाचार पर है, ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत हो सके।
यूनिवर्सिटी टाउनशिप और डिजाइन शिक्षा की पहल
बजट 2026 में औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के आसपास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन टाउनशिप में शिक्षा, रिसर्च, आवास और उद्योगों के साथ सीधा जुड़ाव एक ही परिसर में उपलब्ध कराने की योजना है। इसके साथ ही पूर्वी भारत में एक नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की स्थापना की घोषणा की गई है, जिससे उस क्षेत्र में क्रिएटिव शिक्षा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर
सरकार ने हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल बनाने का ऐलान किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवास की कमी के कारण लड़कियों की पढ़ाई बीच में न छूटे। खासतौर पर ग्रामीण और छोटे शहरों की छात्राओं को इससे आगे की पढ़ाई के अवसर मिल सकेंगे।
विदेश में पढ़ाई करने वालों को राहत के संकेत
विदेश में पढ़ने वाले छात्रों और उनके परिवारों के लिए भी बजट में राहत का संकेत दिया गया है। पढ़ाई के लिए विदेश भेजी जाने वाली रकम पर लगने वाले TCS को लेकर समीक्षा की बात कही गई है, ताकि छात्रों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव कुछ कम हो सके।
स्कूल शिक्षा का बड़ा हिस्सा, लेकिन नई पहल सीमित
कुल शिक्षा बजट में स्कूल शिक्षा का हिस्सा अब भी सबसे अधिक है। मिड-डे मील और समग्र शिक्षा जैसे मौजूदा कार्यक्रमों को जारी रखा गया है। हालांकि, स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और ग्रामीण इलाकों की चुनौतियों को लेकर कोई बड़ा नया कदम इस बजट में स्पष्ट रूप से नजर नहीं आता।
AVGC लैब से क्रिएटिव सेक्टर पर फोकस
इस बजट की एक नई पहल AVGC लैब्स की स्थापना है। एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स से जुड़ी ये लैब 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में बनाई जाएंगी। सरकार का मानना है कि भविष्य की कई नौकरियां क्रिएटिव इंडस्ट्री से जुड़ी होंगी और छात्रों को इसके लिए पहले से तैयार करना जरूरी है।
डिजिटल और तकनीक आधारित पढ़ाई की तैयारी
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। स्कूलों में बेहतर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने की योजना है, ताकि डिजिटल माध्यम से पढ़ाई अधिक सुलभ हो सके।
शिक्षा में नई तकनीक और स्किल पर जोर
बजट 2026 में शिक्षा के लिए नई तकनीकों के इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया गया है। स्मार्ट लर्निंग टूल्स, वर्चुअल लैब और आधुनिक प्रशिक्षण के जरिए पढ़ाई को रोजगार से जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है। वोकेशनल ट्रेनिंग और शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने की बात भी इसमें शामिल है।
जिन मुद्दों पर अब भी नजर चाहिए
बढ़े हुए बजट और नई घोषणाओं के बावजूद कुछ अहम सवाल बने हुए हैं। GDP के अनुपात में खर्च, शुरुआती कक्षाओं की शिक्षा, ग्रामीण स्कूलों की स्थिति और शिक्षक भर्ती को लेकर स्पष्ट रोडमैप अब भी सामने नहीं आया है।
कुल मिलाकर, यूनियन बजट 2026 में शिक्षा को नजरअंदाज नहीं किया गया है। संसाधन बढ़े हैं और भविष्य की दिशा भी दिखाई गई है, लेकिन लंबे समय से किए गए वादों को पूरी तरह अमल में लाने के लिए अभी और ठोस कदम उठाने की जरूरत बनी हुई है।



