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Gold and Silver Investment Returns 2025: तिजोरियों में बरसा सोना-चांदी, टूटा 50 साल का रिकॉर्ड

Gold and Silver Investment Returns 2025: बीता साल वैश्विक निवेशकों के लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन अगर किसी एक क्षेत्र ने सबसे ज्यादा चमक बिखेरी है, तो वह कीमती धातुएं हैं। जहां एक ओर घरेलू शेयर बाजारों ने इस साल उम्मीद से कम यानी औसत प्रदर्शन किया, वहीं सोने और चांदी ने निवेशकों की झोली खुशियों से भर दी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर (Global Market Volatility) के बावजूद भारतीय सर्राफा बाजार में जो तेजी देखी गई, उसने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। अब नए साल 2026 के आगमन के साथ ही निवेशकों की नजरें एक बार फिर सुरक्षित निवेश के इन्हीं विकल्पों पर टिकी हुई हैं।

Gold and Silver Investment Returns 2025
Gold and Silver Investment Returns 2025

चांदी की ऐतिहासिक छलांग और 170 फीसदी का मुनाफा

चांदी ने इस साल निवेश के सभी पैमानों को पीछे छोड़ते हुए एक अविश्वसनीय सफर तय किया है। एक जनवरी को जो चांदी 90,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर मिल रही थी, वह 31 दिसंबर तक 1,24,000 रुपये के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस शानदार (Silver Price Appreciation) के पीछे मुख्य कारण दुनिया भर में चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग और घटती आपूर्ति को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का दावा है कि यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहीं, तो साल 2026 में चांदी भारतीय बाजार में 3 लाख रुपये प्रति किलो का जादुई आंकड़ा भी पार कर सकती है।

सोने ने तोड़ा 50 सालों का रिकॉर्ड

पीली धातु यानी सोने ने इस साल वह कर दिखाया जो पिछले पांच दशकों में नहीं हुआ था। साल 2024 के अंत में सोना जहां ₹78,950 प्रति 10 ग्राम पर था, वहीं 2025 के अंत तक यह 1.40 लाख रुपये के पार निकल गया है। करीब 80 फीसदी का यह (Gold Bullion Annual Return) उन निवेशकों के लिए वरदान साबित हुआ है जिन्होंने संकट के समय सोने पर भरोसा जताया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव 5000 डॉलर प्रति औंस की तरफ बढ़ रहे हैं, जिसे देखते हुए अनुमान है कि भारतीय बाजार में कीमतें जल्द ही 1.60 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच जाएंगी।

शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा साल

घरेलू शेयर बाजार के लिए पिछला साल किसी रोलर कोस्टर राइड से कम नहीं था। सेंसेक्स ने साल की शुरुआत तो मजबूती के साथ की थी, लेकिन अप्रैल के महीने में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ ने (Stock Market Correction) की स्थिति पैदा कर दी। वैश्विक बाजारों में आई इस सुनामी के कारण भारतीय बाजार भी अछूते नहीं रहे। पूरे साल के दौरान सेंसेक्स में लगभग 7000 अंकों की बढ़त दर्ज की गई, जो करीब नौ फीसदी का सालाना रिटर्न है। हालांकि यह रिटर्न सोने-चांदी के मुकाबले काफी कम रहा, फिर भी इसने निवेशकों का भरोसा कायम रखा।

निफ्टी ने बढ़ाई निवेशकों की संपत्ति

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक निफ्टी ने सेंसेक्स के मुकाबले थोड़ा बेहतर प्रदर्शन करते हुए 10.5 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया। इस बढ़त के साथ ही शेयर बाजार के (National Index Performance) ने निवेशकों की कुल संपत्ति में 30 लाख करोड़ रुपये का भारी इजाफा किया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि नए साल की शुरुआत में अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों में सुधार होता है, तो इक्विटी मार्केट में एक बार फिर बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है, जो घरेलू निवेशकों के लिए राहत की बात होगी।

डॉलर के मुकाबले पस्त पड़ता भारतीय रुपया

निवेशकों के लिए इस साल की सबसे बड़ी निराशा भारतीय रुपये का प्रदर्शन रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर होता गया और करीब 5 फीसदी की गिरावट के साथ 91 के स्तर को पार कर गया। (Currency Exchange Devaluation) का असर केवल डॉलर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रुपया यूरो के मुकाबले 19 फीसदी और ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले 14 फीसदी तक टूट गया। मुद्रा के इस गिरते स्तर ने आयात को महंगा कर दिया है, जिससे विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक सौदों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

सुरक्षित निवेश की तलाश और भविष्य की राह

अनिश्चित वैश्विक आर्थिक हालातों के बीच निवेशकों का रुझान अब जोखिम भरे एसेट्स से हटकर सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। सोने को हमेशा से (Safe Haven Assets) की श्रेणी में शीर्ष पर रखा जाता है, और मौजूदा बढ़त ने इस बात को फिर से साबित कर दिया है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि 2026 में भी पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा कीमती धातुओं में रखना समझदारी होगी, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति के बीच ये धातुएं ही पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं।

2026 के लिए विशेषज्ञों का क्या है अनुमान?

आने वाला साल भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। चांदी में जहां 15 से 20 प्रतिशत की और बढ़त की उम्मीद है, वहीं सोने की कीमतें नए आसमान छूने को तैयार हैं। (Financial Market Forecasting) के अनुसार, शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक नीतिगत बदलावों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के रुख पर निर्भर करेगी। कुल मिलाकर, 2026 में भी चमक सोने-चांदी की ही रहने वाली है, जबकि रुपये की मजबूती के लिए कड़े नीतिगत फैसलों का इंतजार रहेगा।

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