India EV Charging Infrastructure Expansion: अब हर शहर में दौड़ेगी बिजली, सरकार के एक फैसले ने बदल दी ग्रीन मोबिलिटी की तस्वीर
India EV Charging Infrastructure Expansion: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य को लेकर सबसे बड़ी चिंता हमेशा से चार्जिंग पॉइंट्स की उपलब्धता रही है। लेकिन अब केंद्र सरकार ने इस बाधा को जड़ से खत्म करने के लिए कमर कस ली है। अगले कुछ महीनों के भीतर देश के कोने-कोने में (Green Mobility Solutions) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारें युद्ध स्तर पर चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण शुरू करने वाली हैं। ऊर्जा मंत्रालय द्वारा चार्जिंग उपकरणों की कीमतों में किए गए महत्वपूर्ण संशोधन के बाद अब राज्यों के लिए नोडल एजेंसियों के माध्यम से जमीन पर काम शुरू करना बेहद आसान हो गया है।

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत बुनियादी ढांचे का कायाकल्प
केंद्र सरकार ने चार्जिंग नेटवर्क को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पीएम ई-ड्राइव योजना के लिए दो हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। इस (National EV Policy Framework) के अंतर्गत राज्यों को चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने पर आने वाले कुल खर्च का शत-प्रतिशत सब्सिडी के रूप में वापस मिल जाएगा। पहले पुरानी दरों के कारण काम रुका हुआ था, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में तकनीकी उपकरणों की लागत बढ़ गई थी। अब संशोधित दरों के लागू होने से राज्यों का वित्तीय बोझ कम होगा और निर्माण कार्यों में अभूतपूर्व तेजी देखने को मिलेगी।
ऊर्जा मंत्रालय ने दी कीमतों में संशोधन को हरी झंडी
भारी उद्योग मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय के बीच लंबे विचार-विमर्श के बाद नई दरों का मसौदा तैयार कर लिया गया है। भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. हनीफ कुरैशी के अनुसार, संशोधित कीमतें अब राज्य सरकारों को भेज दी गई हैं। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि (Electric Vehicle Adoption) को इस कदर सुगम बनाया जाए कि 2030 तक देश की सड़कों पर चलने वाले 10 प्रतिशत से अधिक वाहन पूरी तरह इलेक्ट्रिक हों। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देशभर में 72,000 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन बनाने की कार्ययोजना पर मुहर लग चुकी है।
पीएलआई ऑटो योजना से निवेश की बाढ़
भारत को वैश्विक ऑटोमोबाइल हब बनाने की दिशा में पीएलआई (PLI) योजना मील का पत्थर साबित हो रही है। उन्नत ऑटोमोबाइल तकनीक के क्षेत्र में अब तक 35,657 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया जा चुका है। यह (Automotive Manufacturing Investment) केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार ने अब तक कंपनियों को 2321.94 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी जारी कर दी है। कुल 25,938 करोड़ रुपये के बजट वाली यह योजना पांच वर्षों के लिए डिजाइन की गई है, जो घरेलू विनिर्माण को अंतरराष्ट्रीय स्तर की मजबूती प्रदान कर रही है।
आत्मनिर्भर भारत और घरेलू मूल्य संवर्धन पर जोर
सरकार की पीएलआई योजना केवल निवेश लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य जोर ‘मेक इन इंडिया’ पर है। योजना का लाभ केवल उन्हीं उत्पादों को मिलता है जिनमें कम से कम 50 प्रतिशत (Domestic Value Addition) सुनिश्चित किया गया हो। अब तक आठ बड़े मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) को उनके 94 अलग-अलग वैरिएंट्स के लिए घरेलू मूल्य संवर्धन का प्रमाणन मिल चुका है। इसके साथ ही कंपोनेंट श्रेणी में भी 10 आवेदकों को 37 वैरिएंट्स के लिए मान्यता मिली है, जिससे भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हिस्सेदारी बढ़ रही है।
प्रोत्साहन राशि का वितरण और पारदर्शिता
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान सरकार ने प्रोत्साहन राशि के वितरण में काफी तेजी दिखाई है। अब तक पांच प्रमुख कंपनियों को कुल 1,999 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। यह (Industrial Incentive Distribution) प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और केवल उन्हीं इकाइयों को मिल रही है जो कड़े गुणवत्ता मानकों को पूरा करती हैं। इस वित्तीय मदद से ऑटोमोबाइल क्षेत्र की कंपनियों को नई तकनीक विकसित करने और इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत कम करने में मदद मिल रही है, जिसका सीधा फायदा आम जनता को कम कीमतों के रूप में मिलेगा।
2030 का लक्ष्य और सार्वजनिक नेटवर्क का विस्तार
भारत सरकार ने 2030 तक के लिए जो खाका तैयार किया है, वह देश को प्रदूषण मुक्त परिवहन की ओर ले जाने वाला है। 72 हजार सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछने के बाद ‘रेंज एंग्जायटी’ यानी बैटरी खत्म होने का डर पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यह (Public Charging Network) न केवल महानगरों बल्कि छोटे शहरों और राजमार्गों को भी आपस में जोड़ेगा। सरकार के इस दूरदर्शी कदम से न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा, बल्कि ईंधन आयात पर देश की निर्भरता भी कम होगी, जो अर्थव्यवस्था के लिए सुखद संकेत है।
भविष्य की राह और राज्य सरकारों की सक्रियता
अब गेंद पूरी तरह से राज्य सरकारों के पाले में है। केंद्र से संशोधित दरें और सब्सिडी का भरोसा मिलने के बाद, अब जमीन आवंटन और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम शुरू होना है। आने वाले (Future Transportation Trends) को ध्यान में रखते हुए, राज्य नोडल एजेंसियां अब निजी भागीदारी के साथ मिलकर हाइब्रिड मॉडल पर भी काम कर रही हैं। यह सामूहिक प्रयास भारत को विश्व के चुनिंदा उन देशों की कतार में खड़ा कर देगा, जहाँ ग्रीन मोबिलिटी केवल एक नारा नहीं बल्कि एक हकीकत है।



