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UPI Credit Line Interest Free Period: यूपीआई का नया अवतार मचाएगा गदर, अब बिना ब्याज मिलेगा पैसा…

UPI Credit Line Interest Free Period: भारत के सबसे भरोसेमंद डिजिटल पेमेंट प्लेटफार्म यूपीआई (UPI) में जल्द ही एक ऐसा जबरदस्त फीचर जुड़ने वाला है, जो आम आदमी की जेब और खर्च करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और देश के प्रमुख बैंकों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार, अब यूपीआई पर मिलने वाली क्रेडिट लाइन में क्रेडिट कार्ड जैसी ब्याज-मुक्त अवधि देने की योजना बनाई जा रही है। इस (Digital Lending Innovation) के आने से उपयोगकर्ताओं को अपनी छोटी-मोटी जरूरतों के लिए तुरंत पैसा मिलेगा और उन्हें एक तय समय तक उस पर कोई ब्याज भी नहीं देना होगा।

UPI Credit Line Interest Free Period
UPI Credit Line Interest Free Period
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छोटे कर्ज और घरेलू खर्चों की टेंशन अब होगी खत्म

अक्सर ऐसा होता है कि महीने के अंत में खाते में बैलेंस कम हो जाता है, लेकिन कुछ जरूरी भुगतान करने बाकी रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में यूपीआई क्रेडिट लाइन एक संजीवनी की तरह काम करेगी, जहाँ बैंक आपको आपकी पात्रता के अनुसार (Pre Approved Credit Limit) प्रदान करेगा। मान लीजिए आपको अचानक 2,000 या 5,000 रुपये की जरूरत है, तो आप अपने बैंक से मिली इस उधारी का उपयोग सीधे यूपीआई के जरिए कर सकेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो क्रेडिट कार्ड के भारी-भरकम झंझटों से बचना चाहते हैं।

ब्याज के डर से अब नहीं कतराएंगे डिजिटल यूजर्स

अब तक यूपीआई क्रेडिट लाइन के साथ सबसे बड़ी बाधा यह थी कि जैसे ही ग्राहक पैसे खर्च करता था, उसी दिन से उस पर ब्याज लगना शुरू हो जाता था। इसी (Consumer Financial Behavior) के कारण लोग इस सुविधा का इस्तेमाल करने से हिचकिचा रहे थे। लेकिन नई व्यवस्था के तहत, ग्राहकों को भुगतान करने के लिए 30 से 45 दिनों का ग्रेस पीरियड मिलेगा। इसका सीधा मतलब है कि यदि आप समय सीमा के भीतर उधार ली गई राशि बैंक को वापस कर देते हैं, तो आपसे एक भी पैसा अतिरिक्त शुल्क के रूप में नहीं लिया जाएगा।

क्रेडिट कार्ड का सबसे सशक्त और आसान विकल्प

यह नया बदलाव उन करोड़ों भारतीयों के लिए उम्मीद की किरण है जिनके पास औपचारिक क्रेडिट कार्ड नहीं है या जिनका सिबिल स्कोर अभी बन रहा है। यूपीआई क्रेडिट लाइन में (Financial Inclusion Strategy) को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया को बेहद सरल रखा गया है। जहाँ क्रेडिट कार्ड लेने के लिए ढेर सारे दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन की जरूरत होती है, वहीं यूपीआई क्रेडिट लाइन पूरी तरह डिजिटल और इंस्टेंट होगी। इसकी पहुँच छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक होने के कारण यह वित्तीय सशक्तिकरण का नया जरिया बनेगा।

यस बैंक और सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक ने पेश की मिसाल

बाजार में इस सुविधा की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए कुछ बैंकिंग संस्थानों ने पहले ही पहल कर दी है। उदाहरण के लिए, यस बैंक ने अपने ग्राहकों को 45 दिनों की (Interest Free Credit Period) वाली सेवा देनी शुरू की है, जो काफी लोकप्रिय हो रही है। इसी तरह, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक ने भी 30 दिनों की ब्याज-मुक्त अवधि वाली क्रेडिट लाइन पेश की है। इन बैंकों के सफल मॉडल को देखते हुए अब अन्य बड़े सरकारी और निजी बैंक भी इस होड़ में शामिल होने के लिए कमर कस रहे हैं।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का विजन ले रहा है आकार

यूपीआई क्रेडिट लाइन की अवधारणा को पहली बार अप्रैल 2023 में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने पेश किया था। सितंबर 2023 में इसे औपचारिक रूप से (Digital Payment Ecosystem) का हिस्सा बनाया गया ताकि नकदी की कमी को डिजिटल उधारी से पूरा किया जा सके। आरबीआई का मुख्य उद्देश्य छोटे व्यवसायों और आम नागरिकों को कम लागत वाला कर्ज उपलब्ध कराना था। अब ब्याज-मुक्त दिनों की सुविधा जुड़ जाने से यह विजन पूरी तरह धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है, जो डिजिटल इंडिया के सफर में एक मील का पत्थर साबित होगा।

बैंकिंग नियमों और सुरक्षा मानकों का रखा जाएगा पूरा ध्यान

यूपीआई क्रेडिट लाइन को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए बैंकों को नियामक दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि (Credit Risk Management) को मजबूत करने के लिए बैंक रीयल-टाइम डेटा का उपयोग करेंगे ताकि डिफॉल्ट की संभावना कम हो। ग्राहकों को लुभाने के लिए बैंक इसे न केवल आसान बनाएंगे, बल्कि सुरक्षा के मामले में भी यह क्रेडिट कार्ड के बराबर ही मजबूत होगा। यूपीआई ऐप के जरिए ही लिमिट को मैनेज करने और भुगतान करने की सुविधा इसे बेहद यूजर-फ्रेंडली बना देती है।

भविष्य की राह और बदलती अर्थव्यवस्था की तस्वीर

आने वाले समय में यूपीआई क्रेडिट लाइन न केवल व्यक्तिगत खर्चों बल्कि छोटे व्यापारियों के वर्किंग कैपिटल का भी मुख्य स्रोत बन सकती है। (Economic Digitalization Trends) को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले दो वर्षों में क्रेडिट कार्ड के नए आवेदनों में कमी आ सकती है क्योंकि लोग अधिक सहज यूपीआई उधारी की ओर रुख करेंगे। भारत ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया है कि डिजिटल भुगतान के मामले में वह न केवल अग्रणी है, बल्कि नवाचार के मामले में भी सबसे आगे है।

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