BollywoodActor – संजीव कुमार के निधन के बाद रिलीज हुईं उनकी 10 यादगार फिल्में
BollywoodActor – बॉलीवुड के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे हुए हैं, जिनकी मौजूदगी परदे से कहीं आगे तक महसूस की जाती है। संजीव कुमार उन्हीं चुनिंदा अभिनेताओं में शामिल थे। बेहद कम उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले संजीव कुमार ने अपने अभिनय से जो विरासत छोड़ी, वह आज भी दर्शकों के बीच जीवित है। खास बात यह रही कि 6 नवंबर 1985 को उनके असामयिक निधन के बाद भी उनकी कई फिल्में सिनेमाघरों तक पहुंचीं। हैरानी की बात यह है कि उनकी मौत के बाद एक-दो नहीं, बल्कि कुल 10 फिल्में रिलीज हुईं, जो उनके अभिनय की विविधता को दर्शाती हैं।

निधन के बाद भी परदे पर जीवित रहा संजीव कुमार का अभिनय
संजीव कुमार ने अपने करियर में ‘शोले’, ‘सीता और गीता’, ‘त्रिशूल’ जैसी फिल्मों में अहम भूमिकाएं निभाईं। वे ऐसे कलाकार थे, जो हर किरदार को पूरी ईमानदारी से जीते थे। यही वजह रही कि उनके निधन के बाद रिलीज हुई फिल्मों को भी दर्शकों ने गंभीरता से देखा और सराहा।
‘कत्ल’ से हुई मरणोपरांत फिल्मों की शुरुआत
साल 1986 में रिलीज हुई ‘कत्ल’ संजीव कुमार की मृत्यु के बाद प्रदर्शित होने वाली पहली फिल्म बनी। यह एक सस्पेंस थ्रिलर थी, जिसमें उन्होंने नेत्रहीन व्यक्ति का किरदार निभाया था। फिल्म में उनकी पत्नी के रूप में सारिका नजर आई थीं और कहानी विश्वासघात व बदले के इर्द-गिर्द घूमती है।
‘हाथों की लकीरें’ और ‘बात बन जाए’ में दिखी अलग छवि
1986 में ही आई ‘हाथों की लकीरें’ को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला। चेतन आनंद के निर्देशन में बनी इस फिल्म में जैकी श्रॉफ, प्रिया राजवंश और जीनत अमान जैसे कलाकार शामिल थे।
इसी वर्ष रिलीज हुई ‘बात बन जाए’ एक मल्टीस्टारर फिल्म थी, जिसमें मिथुन चक्रवर्ती, अमोल पालेकर, राज बब्बर और शक्ति कपूर जैसे नाम थे। संजीव कुमार ने इसमें भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
‘कांच की दीवार’ और ‘लव एंड गॉड’ की खास पहचान
‘कांच की दीवार’ एक एक्शन-ड्रामा फिल्म थी, जिसमें संजीव कुमार के साथ स्मिता पाटिल नजर आईं। फिल्म का निर्देशन एम. एन. यासीन ने किया था।
वहीं ‘लव एंड गॉड’ के. आसिफ की अंतिम और पूरी तरह रंगीन फिल्म थी। इसे ‘कैस और लैला’ के नाम से भी जाना जाता है। इस फिल्म में संजीव कुमार, निम्मी, सिम्मी ग्रेवाल और अमजद खान जैसे कलाकार थे।
‘राही’ और ‘दो वक्त की रोटी’ में सामाजिक सरोकार
1987 में आई ‘राही’ का निर्देशन रमन कुमार ने किया था, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा और स्मिता पाटिल भी अहम भूमिकाओं में थे।
इसके बाद 1988 में ‘दो वक्त की रोटी’ रिलीज हुई, जो सामाजिक विषय पर आधारित थी। फिल्म में फिरोज खान, रीना रॉय और सुलक्षणा पंडित जैसे कलाकार शामिल थे।
‘नामुमकिन’ और ‘ऊंच नीच बीच’ में गंभीर कथानक
ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी ‘नामुमकिन’ एक मिस्ट्री ड्रामा फिल्म थी, जिसमें संजीव कुमार के साथ राज बब्बर और जीनत अमान नजर आए।
1989 में रिलीज हुई ‘ऊंच नीच बीच’ एक सच्ची घटना से प्रेरित थी। फिल्म में शशि कपूर, शबाना आजमी और स्मिता पाटिल जैसे दिग्गज कलाकार थे।
‘प्रोफेसर की पड़ोसन’ रही आखिरी रिलीज
1993 में रिलीज हुई ‘प्रोफेसर की पड़ोसन’ संजीव कुमार की अंतिम मरणोपरांत फिल्म साबित हुई। फिल्म की शूटिंग के दौरान ही उनका निधन हो गया था। बाद में कहानी में बदलाव कर, सुदेश भोंसले की आवाज और अन्य तकनीकी तरीकों से उनके हिस्से को पूरा किया गया।
संजीव कुमार भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनके निभाए किरदार और फिल्मों की यह सूची बताती है कि सच्चा कलाकार कभी परदे से विदा नहीं होता।



