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CourtroomDrama – हंसी के बीच न्याय की लड़ाई दिखाती खास फिल्म

CourtroomDrama – अगर आपको अदालत से जुड़ी कहानियां पसंद हैं और उनमें हल्का-फुल्का व्यंग्य भी देखना चाहते हैं, तो मलयालम फिल्म ‘Nna Thaan Case Kodu’ एक अलग अनुभव देती है। जियोहॉटस्टार पर उपलब्ध इस फिल्म को आईएमडीबी पर 7.9 की रेटिंग मिली है, जबकि रोटन टोमैटोज पर इसे शत-प्रतिशत सराहना हासिल हुई। समीक्षकों के साथ-साथ दर्शकों ने भी इसे खूब पसंद किया। 69वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में इस फिल्म को कई श्रेणियों में सम्मान मिला, जिससे इसकी चर्चा और बढ़ गई।

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कहानी जो मामूली घटना से शुरू होती है

फिल्म का शीर्षक हिंदी में कुछ इस तरह समझा जा सकता है—‘तो फिर केस कर दो’। कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका अतीत छोटे-मोटे अपराधों से जुड़ा रहा है। हालांकि अब वह उन सबको पीछे छोड़कर एक सामान्य जिंदगी जीना चाहता है। उसकी ख्वाहिश है कि वह परिवार बसाए और शांत जीवन बिताए। लेकिन एक रात घटी एक साधारण-सी घटना सब कुछ बदल देती है। एक कुत्ते के काटने से शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे कानूनी लड़ाई में बदल जाता है और मामला अदालत तक पहुंच जाता है। यही मोड़ फिल्म को रोचक बना देता है।

मुख्य अभिनेता की सशक्त प्रस्तुति

फिल्म में कुंचाको बोबन ने केंद्रीय भूमिका निभाई है। उन्होंने अपने किरदार के लिए न सिर्फ शारीरिक रूप से बदलाव किया, बल्कि भावनात्मक स्तर पर भी गहराई दिखाई। उनका पात्र न तो परंपरागत नायक है और न ही पूरी तरह निर्दोष। वह एक आम आदमी है, जो अपनी बात पर अड़ा रहता है। कुंचाको ने इस साधारण लेकिन दृढ़ व्यक्तित्व को बड़ी सहजता से पर्दे पर उतारा है। कई समीक्षकों ने इसे उनके करियर की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुतियों में गिना है।

अदालत का यथार्थपरक चित्रण

अक्सर फिल्मों में अदालत के दृश्य अत्यधिक नाटकीय और शोर-शराबे से भरे होते हैं। लेकिन यहां कोर्टरूम का वातावरण जमीन से जुड़ा और विश्वसनीय नजर आता है। जज, वकील और गवाह—सभी अपने-अपने किरदार में संतुलित दिखाई देते हैं। कानूनी बहस में हास्य के छोटे-छोटे क्षण भी शामिल हैं, जो कहानी को बोझिल नहीं होने देते। यही संतुलन फिल्म को अलग पहचान देता है।

नेशनल अवॉर्ड में मिली सराहना

फिल्म को 69वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में खास पहचान मिली। इसे बेस्ट स्क्रीनप्ले और बेस्ट मलयालम फिल्म सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया। पुरस्कारों ने यह साबित किया कि यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि मजबूत लेखन और सधी हुई प्रस्तुति का उदाहरण है। स्क्रीनप्ले की तारीफ खास तौर पर इसलिए हुई क्योंकि कहानी एक मामूली घटना से शुरू होकर व्यवस्था पर सवाल उठाने तक पहुंचती है।

हास्य के साथ सामाजिक संकेत

इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका व्यंग्यात्मक अंदाज है। गंभीर विषय होने के बावजूद कहानी में हल्कापन बना रहता है। जज और वकीलों के बीच होने वाली बातचीत कई बार मुस्कुराने पर मजबूर करती है। हालांकि हंसी के पीछे एक गहरी बात छिपी है। फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि यदि कोई व्यक्ति अपने अधिकारों के लिए डटा रहे, तो वह बड़ी से बड़ी व्यवस्था को भी चुनौती दे सकता है। यह संदेश बिना भाषण दिए, सहज तरीके से सामने आता है।

कुल मिलाकर ‘Nna Thaan Case Kodu’ उन फिल्मों में शामिल है जो मनोरंजन के साथ सोचने पर भी मजबूर करती हैं। अदालत की कहानी में हास्य और सामाजिक संकेतों का ऐसा संतुलन कम ही देखने को मिलता है।

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