Dharmendra Last Prayer Meet: धर्मेंद्र के आखिरी सफर में क्यों अलग हुईं हेमा और सनी की राहें…
Dharmendra Last Prayer Meet: भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ कहे जाने वाले धर्मेंद्र का पिछले महीने इस दुनिया से चले जाना महज एक कलाकार का अंत नहीं, बल्कि एक स्वर्णिम युग का अवसान है। उनके निधन की खबर ने न केवल उनके परिवार और दोस्तों को झकझोर कर रख दिया, बल्कि करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में एक ऐसा शून्य पैदा कर दिया जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। धर्मेंद्र की विदाई के बाद (Emotional Tribute) का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जहां हर आंख नम है और हर जुबान पर उनकी यादें हैं।

दो अलग प्रार्थना सभाएं: मर्यादा और प्रेम के बीच का फैसला
धर्मेंद्र के निधन के बाद मुंबई में दो अलग-अलग प्रेयर मीट आयोजित की गईं, जिसने सोशल मीडिया और गलियारों में चर्चा छेड़ दी। पहली सभा धर्मेंद्र की पहली पत्नी और उनके बेटों, सनी और बॉबी देओल द्वारा आयोजित की गई थी, जबकि दूसरी सभा हेमा मालिनी ने अपने मुंबई स्थित आवास पर रखी। फिल्म जगत के जाने-माने व्यक्तित्व और गैटी गैलेक्सी थिएटर के मालिक मनोज देसाई ने इस (Family Decisions) पर अपनी राय साझा करते हुए हेमा मालिनी के कदम को पूरी तरह तर्कसंगत और गरिमापूर्ण बताया है।
विवादों से बचने की कोशिश: मनोज देसाई का बड़ा बयान
मनोज देसाई ने एक साक्षात्कार के दौरान स्पष्ट किया कि वे इस बात से बिल्कुल भी हैरान नहीं थे कि हेमा मालिनी पहली प्रेयर मीट में शामिल नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि हेमा जी ने किसी भी संभावित (Public Controversy) को टालने के लिए पहले ही एक अलग सभा रखने का बुद्धिमानी भरा फैसला ले लिया था। धर्मेंद्र और हेमा एक-दूसरे के बेहद करीब थे, लेकिन ऐसे भावुक मौके पर यदि कोई अप्रिय टिप्पणी हो जाती, तो पूरी सभा की शांति भंग हो सकती थी, जिसे टालना ही बेहतर था।
यादों का कारवां: जब थम गई मुंबई की रफ्तार
धर्मेंद्र की प्रार्थना सभा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह था कि वे लोगों के दिलों में कितनी गहराई तक बसे थे। मनोज देसाई ने बताया कि वहां गाड़ियों की इतनी लंबी कतारें थीं कि उनकी अपनी कार 86वें नंबर पर खड़ी थी। इस (Massive Crowds) के बीच जब वे सनी देओल से मिले, तो माहौल गमगीन था। सनी ने व्यक्तिगत रूप से सभी का आभार व्यक्त किया। मनोज देसाई को अपनी कार का इंतजार करने के लिए 45 मिनट तक बाहर खड़ा रहना पड़ा, क्योंकि भीड़ अनियंत्रित थी।
ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा: पूरा देश था वहां मौजूद
मनोज देसाई ने अपने लंबे करियर में राजेश खन्ना और यश चोपड़ा जैसे दिग्गजों की विदाई देखी है, लेकिन धर्मेंद्र की प्रेयर मीट का अनुभव सबसे अलग था। उन्होंने याद करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा था जैसे (National Mourning) का माहौल हो और पूरा देश ही वहां उमड़ पड़ा हो। हर कोई अपने चहेते अभिनेता को आखिरी बार नमन करना चाहता था। वहां मौजूद हर शख्स की आंखों में धर्मेंद्र जी के प्रति अगाध सम्मान और उनके जाने का गहरा दुख साफ झलक रहा था।
आखिरी दिनों का संघर्ष: जब सेहत ने छोड़ दिया साथ
धर्मेंद्र पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में परिवार उन्हें घर ले आया था ताकि वे अपने अपनों के बीच रह सकें। घर पर ही उनका (Medical Treatment) चल रहा था और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही थी। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था और 24 नवंबर की वह काली सुबह आई, जब बॉलीवुड का यह सबसे प्यारा ‘पाजी’ हमेशा के लिए खामोश हो गया।
विरासत जो कभी खत्म नहीं होगी: दिलों में जिंदा रहेंगे धरम पाजी
भले ही धर्मेंद्र आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में और उनकी सादगी हमेशा जीवित रहेगी। उनकी आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ की रिलीज डेट भले ही कुछ कारणों से आगे बढ़ गई हो, लेकिन फैंस के लिए उनकी हर (Cinematic Performance) एक अनमोल धरोहर है। सनी, बॉबी और हेमा मालिनी के लिए यह समय अपनी निजी क्षति से उबरने का है, जबकि दुनिया उनके द्वारा छोड़ी गई महान विरासत को सलाम कर रही है।
एक अधूरापन जो सदा खलेगा: क्या अब कभी दिखेगा ऐसा व्यक्तित्व?
धर्मेंद्र के जाने से जो खालीपन आया है, उसे फिल्म इंडस्ट्री सालों तक महसूस करेगी। उन्होंने जिस तरह से अपनी दो अलग-अलग जिंदगियों और परिवारों के बीच संतुलन बनाए रखा, वह उनकी महानता को दर्शाता है। आज उनकी (Legendary Legacy) पर बात करते हुए हर कोई यही कह रहा है कि धर्मेंद्र जैसा सरल और जमीन से जुड़ा सुपरस्टार दोबारा नहीं होगा। उनकी अंतिम विदाई ने साबित कर दिया कि वे वास्तव में जन-जन के अभिनेता थे।



