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Hema Malini: ‘जब तक है जान’ की शूटिंग में हेमा मालिनी ने झेला असहनीय दर्द

Hema Malini: बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल कही जाने वाली हेमा मालिनी ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई ऐसी फिल्मों का हिस्सा रहीं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा की दिशा तय की। इन्हीं में से एक है 1975 में रिलीज़ हुई सुपरहिट फिल्म शोले, जिसे आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर हेमा मालिनी ने इससे जुड़े कुछ ऐसे अनुभव साझा किए हैं, जो अब तक पर्दे के पीछे ही रहे थे। खास तौर पर उन्होंने फिल्म के मशहूर गीत ‘जब तक है जान’ की शूटिंग के दौरान आई शारीरिक कठिनाइयों पर खुलकर बात की है।

Hema Malini: ‘जब तक है जान’ की शूटिंग में हेमा मालिनी ने झेला असहनीय दर्द
Hema Malini: ‘जब तक है जान’ की शूटिंग में हेमा मालिनी ने झेला असहनीय दर्द
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गर्म पत्थरों पर नंगे पांव नृत्य की चुनौती

एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने बताया कि इस गीत की शूटिंग उनके लिए बेहद कठिन रही। उन्होंने कहा कि गाने के दौरान उन्हें खुले मैदान में, वह भी नंगे पांव, नृत्य करना पड़ा था। शूटिंग के समय मौसम काफी गर्म था और जमीन पर मौजूद रेत, कीचड़ और पत्थर तप रहे थे। ऐसे में हर कदम दर्द से भरा हुआ था। हेमा के अनुसार, पत्थरों पर बिना जूते के चलना और नाचना शारीरिक रूप से बेहद पीड़ादायक अनुभव था।

बेटी की तकलीफ देखकर मां भी हुईं चिंतित

हेमा मालिनी ने बताया कि शूटिंग के दौरान उनकी मां सेट पर मौजूद थीं और अपनी बेटी की हालत देखकर काफी परेशान थीं। उन्हें यह चिंता सता रही थी कि लगातार गर्म सतह पर नृत्य करने से हेमा के पैरों को गंभीर चोट लग सकती है। मां होने के नाते उन्होंने बेटी के दर्द को कम करने के लिए एक अस्थायी उपाय सुझाया।

पतले सोल का उपाय और निर्देशक की सख्ती

हेमा ने बताया कि उनकी मां ने उन्हें पैरों के नीचे पतले सोल पहनने की सलाह दी, ताकि सीधे गर्म जमीन के संपर्क से बचा जा सके। शुरुआत में इससे थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन यह उपाय ज्यादा देर तक काम नहीं आया। जल्द ही निर्देशक रमेश सिप्पी की नजर इस पर पड़ी। उन्होंने तुरंत सोल हटाने को कहा और समझाया कि डांस सीक्वेंस के दौरान यह कैमरे में साफ दिखाई देगा, जिससे दृश्य की स्वाभाविकता प्रभावित होगी।

शूटिंग की तारीख बदलने की कोशिश

हेमा मालिनी ने यह भी साझा किया कि उन्होंने निर्देशक से गाने की शूटिंग को ठंडे मौसम में करने का अनुरोध किया था। उनका मानना था कि अगर नवंबर या दिसंबर में शूटिंग होती, तो वह अधिक सहज होकर नृत्य कर पातीं। हालांकि, रमेश सिप्पी अपने फैसले पर अडिग रहे और उन्होंने मई के महीने में ही शूटिंग करने का निर्णय लिया। हेमा के अनुसार, निर्देशक फिल्म के शेड्यूल और विज़न को लेकर पूरी तरह स्पष्ट थे।

शूटिंग के बाद दर्द से राहत का तरीका

लगातार कई घंटों की शूटिंग के बाद हेमा मालिनी के पैरों में सूजन और तेज दर्द हो जाता था। उन्होंने बताया कि शूटिंग खत्म होते ही वह अपने पैरों को ठंडे पानी में डुबोती थीं और फिर ठंडे तौलिये में लपेटकर आराम देती थीं। इससे उन्हें कुछ हद तक राहत मिलती थी। हेमा ने यह भी कहा कि उनकी भरतनाट्यम की ट्रेनिंग ने उन्हें इस कठिन दौर से गुजरने की मानसिक और शारीरिक शक्ति दी।

शोले: एक कालजयी फिल्म

गौरतलब है कि शोले में धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, संजीव कुमार और अमजद खान जैसे दिग्गज कलाकारों ने अभिनय किया था। फिल्म को न सिर्फ दर्शकों का अपार प्रेम मिला, बल्कि यह कई पुरस्कारों से भी सम्मानित हुई। आज पांच दशक बाद भी इसके गीत, संवाद और दृश्य लोगों की स्मृतियों में ताजा हैं, और हेमा मालिनी के ये अनुभव फिल्म के प्रति सम्मान को और गहरा कर देते हैं।

Tag Words:
, Sholay Film, Jab Tak Hai Jaan Song, Bollywood Classics, Ramesh Sippy, Hindi Cinema History

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