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KalpanaIyer – चार दशक बाद भी गूंजता ‘रम्बा हो’, बॉलीवुड से दूरी की वजह

KalpanaIyer – 1981 में रिलीज हुआ चर्चित गीत ‘रम्बा हो…’ समय के साथ फीका पड़ने के बजाय और गहरा होता गया है। बीते सालों में यह धुन कई पीढ़ियों तक पहुँची, पर हालिया दिनों में रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ में इसके इस्तेमाल के बाद इसने फिर से लोकप्रिय संस्कृति में जगह बना ली। इस गाने की पहचान रहीं अभिनेत्री कल्पना अय्यर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गईं, जब उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। 70 वर्ष की उम्र में भी ऊर्जावान अंदाज़ में नृत्य करती कल्पना की यह झलक लोगों को उस दौर में वापस ले गई, जब बॉलीवुड में ग्लैमरस डांस नंबर अपनी अलग पहचान रखते थे। इस नए ध्यान के बीच कल्पना ने पहली बार विस्तार से बताया कि लगभग 27 साल पहले उन्होंने फिल्मी दुनिया से दूरी क्यों बना ली थी।

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पुराने गीत की नई वापसी

‘रम्बा हो…’ केवल एक गाना नहीं, बल्कि 80 के दशक की फिल्मी शैली का प्रतीक माना जाता है, जिसमें भव्य सेट, आकर्षक कोरियोग्राफी और यादगार धुनें प्रमुख थीं। ‘धुरंधर’ में इसके समावेश ने इसे युवा दर्शकों तक भी पहुँचाया, जबकि पुरानी पीढ़ी के लिए यह नॉस्टैल्जिया बन गया। इसी दौरान कल्पना अय्यर का डांस वीडियो सामने आया, जिसने दिखाया कि मंचीय ऊर्जा और लय पर उनकी पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत है। इस वायरल पल ने उनके करियर और निजी फैसलों पर नई बहस छेड़ दी, जिसे उन्होंने हालिया इंटरव्यू में शांत और स्पष्ट शब्दों में संबोधित किया।

अचानक विदा लेने का फैसला

इंडिया टुडे को दिए गए इंटरव्यू में कल्पना अय्यर ने बताया कि उनका इंडस्ट्री छोड़ना किसी एक घटना का नतीजा नहीं था। उनके अनुसार, टेलीविजन में काम करते-करते माहौल धीरे-धीरे सीमित दायरों में बँटने लगा था। खास ग्रुप्स और निश्चित दायरे हावी हो गए थे, जबकि वह खुद किसी भी खेमे का हिस्सा नहीं थीं। उन्होंने कहा कि जब काम से संतुष्टि ही नहीं मिल रही थी, तो उसे जारी रखने का कोई अर्थ नहीं रह गया था। उनके शब्दों में यह निर्णय आत्मसम्मान और मानसिक शांति से जुड़ा था, न कि नाराज़गी या निराशा से।

सलमान खान पर साफ़ रुख

इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ के सह-कलाकार सलमान खान से कभी मदद मांगी थी, जो ज़रूरतमंदों की सहायता के लिए जाने जाते हैं। कल्पना ने साफ़ कहा कि उन्होंने कभी ऐसा प्रयास नहीं किया। उनका मानना था कि अगर कोई निर्माता या अभिनेता उन्हें काम देना चाहता, तो उसे संपर्क करने के तरीके पता होते। दुबई में रहने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह गायब नहीं थीं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह किसी पर दबाव डालने या सिफ़ारिश करवाने में विश्वास नहीं करतीं। उनके लिए काम का मिलना या न मिलना, योग्यता और समय का मामला था, न कि व्यक्तिगत नाराज़गी का।

चार दशकों का फिल्मी सफ़र

कल्पना अय्यर का करियर 1980 और 1990 के दशक में फैला रहा, जब उन्होंने ‘सत्ते पे सत्ता’, ‘बड़े दिलवाला’, ‘हम पांच’, ‘लाडला’ और ‘अंजाम’ जैसी फिल्मों में काम किया। उन्हें सबसे ज्यादा पहचान ‘हम साथ साथ हैं’ में संगीता के किरदार से मिली, जहाँ वह रीमा लागू के पात्र की करीबी मित्र के रूप में दिखाई दी थीं। इस भूमिका ने उन्हें पारिवारिक ड्रामा शैली में एक यादगार चेहरा बना दिया। उनकी आखिरी फिल्म 1999 में आई ‘दिल ही दिल’ थी, जिसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे पर्दे से दूरी बना ली। आज, वर्षों बाद भी उनका नाम ‘रम्बा हो…’ से जुड़ा रहना इस बात का प्रमाण है कि कुछ कलाकार अपनी छाप समय से परे छोड़ जाते हैं।

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