Malti Chahar Health Issue: बिग बॉस के घर में मालती चाहर की चीखों को किया गया अनसुना, खुद साझा किया अनुभव
Malti Chahar Health Issue: मशहूर रियलिटी शो बिग बॉस 19 के घर में अपनी सादगी और जुझारूपन से पहचान बनाने वाली मालती चाहर ने हाल ही में अपनी जिंदगी के एक ऐसे काले पन्ने को खोला है, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। एक सेलिब्रिटी की चमक-धमक भरी जिंदगी के पीछे छिपे (Physical Pain) की दास्तां सुनाते हुए मालती भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि जिस उम्र में बच्चे अपने भविष्य के सपने बुनते हैं, उस उम्र से ही वे एक ऐसी लाइलाज बीमारी से जूझ रही हैं, जिसका दर्द शब्दों में बयां करना नामुमकिन है।

खुशहाल बचपन और अचानक बदली तकदीर
मालती ने अपनी शुरुआती जिंदगी को याद करते हुए बताया कि सातवीं कक्षा तक उनका बचपन बहुत ही सामान्य और खुशियों से भरा हुआ था। लेकिन जैसे ही वे किशोरावस्था की दहलीज पर पहुंचीं, उनके लिए (Childhood Memories) का वह खुशनुमा दौर खत्म हो गया। उनके शरीर में होने वाले बदलाव केवल प्राकृतिक प्रक्रिया मात्र नहीं थे, बल्कि वे अपने साथ एक भयंकर और असहनीय पीड़ा लेकर आए थे, जिसने उनकी पूरी जीवनशैली को बदलकर रख दिया।
एडिनोमायोसिस: वह खौफनाक बीमारी जिसने छीन ली मुस्कान
सिद्धार्थ कनन के साथ एक विशेष साक्षात्कार में मालती ने अपनी बीमारी का खुलासा करते हुए बताया कि वे ‘एडिनोमायोसिस’ नाम की एक गंभीर स्थिति से पीड़ित हैं। इस (Menstrual Disorder) में गर्भाशय की परत की कोशिकाएं मांसपेशियों की दीवार में विकसित होने लगती हैं, जिससे मासिक धर्म के दौरान इतना तेज दर्द होता है कि इंसान सुध-बुध खो बैठता है। मालती के लिए यह केवल महीने के कुछ दिन नहीं, बल्कि हर बार मौत को करीब से देखने जैसा अनुभव होता है।
अस्पताल के चक्कर और बेअसर इलाज का कड़वा सच
मालती की स्थिति इतनी गंभीर रही है कि उन्हें हर महीने अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते थे। उन्होंने बताया कि असहनीय दर्द के कारण उन्हें कई बार (Hospitalization) तक करना पड़ा। विडंबना यह है कि इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि डॉक्टर हार्मोनल दवाइयां लेने की सलाह देते हैं, लेकिन उनके साइड इफेक्ट्स जैसे शरीर का फूलना और मानसिक बदलावों के डर से मालती ने इस दर्द के साथ ही जीना बेहतर समझा।
बचपन के सवाल और जेंडर के प्रति जिज्ञासा
जब मालती को पहली बार पीरियड्स शुरू हुए, तो उनके मन में कई विद्रोही सवाल खड़े हुए। वे अक्सर अपनी स्कूल की शिक्षिकाओं से पूछती थीं कि क्या लड़कों को भी ऐसी किसी (Gender Equality) वाली समस्या या शारीरिक कष्ट से गुजरना पड़ता है? उनके माता-पिता ने कभी बेटा-बेटी में फर्क नहीं किया, लेकिन इस प्राकृतिक प्रक्रिया ने उन्हें पहली बार यह एहसास कराया कि समाज की नजरों में लड़कियों के लिए नियम और मर्यादाएं अलग होती हैं।
बिग बॉस का घर: जहां संवेदनशीलता की कमी दिखी
मालती ने बिग बॉस के घर के अपने कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वहां की अन्य महिला प्रतिभागियों ने उनके प्रति सहानुभूति दिखाने के बजाय उन्हें और मानसिक चोट पहुंचाई। जब वे दर्द से कराहती थीं, तो घर की अन्य लड़कियां इसे (Biological Process) का एक सामान्य हिस्सा मानकर टाल देती थीं। उन्हें अक्सर यह ताना सुनने को मिलता था कि यह दर्द तो हर लड़की को होता है, फिर मालती को ही इतनी ज्यादा समस्या क्यों हो रही है।
सहानुभूति का अभाव और अकेलापन का अहसास
रियलिटी शो के उस बंद घर में मालती को सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती थी जब लोग उनकी बीमारी को समझने से इनकार कर देते थे। उन्होंने बताया कि जब उन्हें मदद की सख्त जरूरत थी, तब कोई भी (Emotional Support) देने के लिए आगे नहीं आया। लोग उनके ‘एडिनोमायोसिस’ के दर्द को सामान्य पीरियड क्रैम्प्स समझकर उनकी तकलीफ का मजाक उड़ाते थे, जिससे वे शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ मानसिक अकेलेपन की शिकार भी होती रहीं।
समाज के लिए एक बड़ा सबक और मालती की अपील
मालती चाहर का यह खुलासा केवल एक सेलिब्रिटी का बयान नहीं है, बल्कि उन हजारों महिलाओं की आवाज है जो इस बीमारी से जूझ रही हैं और जिन्हें समाज की बेरुखी झेलनी पड़ती है। उन्होंने (Women Health Awareness) पर जोर देते हुए कहा कि लोगों को यह समझना चाहिए कि हर महिला के शरीर और उसकी सहनशक्ति अलग होती है। किसी के दर्द को ‘सामान्य’ बताकर खारिज करना न केवल संवेदनहीनता है, बल्कि उस व्यक्ति के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाना भी है।
भविष्य की राह और साहस की मिसाल
इतनी बड़ी शारीरिक समस्या और बिग बॉस जैसे कड़े शो की चुनौतियों को पार करने के बाद मालती आज एक मिसाल बनकर उभरी हैं। उन्होंने तय किया है कि वे अब (Personal Struggles) को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बनाएंगी। वे चाहती हैं कि इस बीमारी के बारे में और अधिक शोध हो ताकि आने वाली पीढ़ियों की लड़कियों को उस भयानक पीड़ा और अकेलेपन से न गुजरना पड़े, जिससे वे आज भी जूझ रही हैं।



