NaseeruddinShah – इम्तियाज अली ने बताया क्यों अलग हैं नसीरुद्दीन शाह की अदाकारी…
NaseeruddinShah – दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की अभिनय शैली को लेकर निर्देशक इम्तियाज अली ने दिलचस्प अनुभव साझा किया है। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि नसीरुद्दीन शाह किसी भी किरदार को केवल निभाते नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह आत्मसात कर लेते हैं। इम्तियाज के अनुसार, उनके साथ काम करते हुए उन्हें कई ऐसे पल देखने को मिले, जिन्होंने एक अनुभवी अभिनेता की कार्यशैली को और करीब से समझने का अवसर दिया।

किरदार में पूरी तरह ढल जाते हैं नसीरुद्दीन शाह
इम्तियाज अली ने बताया कि अपनी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ की शूटिंग के दौरान उन्होंने नसीरुद्दीन शाह की तैयारी और अभिनय को बेहद करीब से देखा। उनके मुताबिक, अभिनेता अपने किरदार में इतने गहराई से उतर जाते थे कि कुछ दृश्यों में जानबूझकर संवाद भूलते हुए भी दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यह सामान्य भूल नहीं थी, बल्कि उस किरदार की मानसिक स्थिति को वास्तविक रूप देने का हिस्सा थी।
अल्जाइमर के पात्र के लिए अपनाया अलग अंदाज
निर्देशक ने बताया कि फिल्म में नसीरुद्दीन शाह एक ऐसे बुजुर्ग की भूमिका निभा रहे हैं, जो अल्जाइमर से जूझ रहा है। इसी वजह से उन्होंने संवादों की प्रस्तुति भी उसी मनःस्थिति के अनुरूप रखी। इम्तियाज ने कहा कि उन्होंने वर्षों में नसीरुद्दीन शाह के कई नाटक देखे हैं और कभी उन्हें संवाद भूलते नहीं देखा। ऐसे में फिल्म के दौरान यह बदलाव पूरी तरह किरदार की मांग के अनुसार था।
निर्देशन के संकेतों को तुरंत बना देते थे अभिनय का हिस्सा
इम्तियाज अली ने एक शूटिंग का अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक दृश्य के दौरान वह कैमरे के पीछे से लगातार कलाकार को निर्देश दे रहे थे। जैसे ही उन्होंने किसी धुंधली याद या भावनात्मक स्थिति का संकेत दिया, नसीरुद्दीन शाह ने बिना रुके उसे अपने अभिनय में शामिल कर लिया। निर्देशक के अनुसार, उनकी सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वे मौके पर मिलने वाले निर्देशों को सहजता से अपने प्रदर्शन का हिस्सा बना लेते हैं।
फिल्म की कहानी भावनात्मक सफर पर आधारित
‘मैं वापस आऊंगा’ की कहानी अतीत और वर्तमान के बीच चलने वाले भावनात्मक सफर को दिखाती है। फिल्म का केंद्र एक बुजुर्ग व्यक्ति है, जिसकी अंतिम इच्छा अपने पुराने घर और पत्नी से मिलने की है, जो अब पाकिस्तान में है। उसकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए उसका पोता लंबी यात्रा पर निकलता है। इस सफर के दौरान परिवार, बिछड़न और रिश्तों से जुड़ी कई परतें सामने आती हैं, जो कहानी को भावनात्मक गहराई देती हैं