Kabhi Khushi Kabhie Gham Budget Facts: जब सिर्फ एक गाने का खर्च पूरी मूवी के बजट को ही निगल गया…
Kabhi Khushi Kabhie Gham Budget Facts: हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी भव्यता और पारिवारिक ड्रामे की बात होती है, तो ‘कभी खुशी कभी गम’ का नाम सबसे ऊपर आता है। शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, काजोल और करीना कपूर जैसे सितारों से सजी यह फिल्म आज भी दर्शकों की पहली पसंद बनी हुई है। अपनी दूसरी ही फिल्म में (Karan Johar Directorial Journey) करन जौहर ने जिस तरह का कैनवास बुना था, उसने फिल्म निर्माण के मानकों को हमेशा के लिए बदल दिया। आलीशान सेट, शानदार म्यूजिक और रिश्तों की भावनाओं ने इसे एक कल्ट क्लासिक का दर्जा दिला दिया है, लेकिन इसके पीछे की आर्थिक कहानी बेहद दिलचस्प है।

यश जौहर के ऑफिस में बना वो ऐतिहासिक बजट
आजकल फिल्मों का बजट बनाने के लिए लंबी स्प्रेडशीट और महीनों का समय लगता है, लेकिन उस दौर में चीजें भरोसे और जुनून पर चलती थीं। फिल्म के राइटर-डायरेक्टर निखिल अडवानी ने हाल ही में खुलासा किया कि कैसे इस (Iconic Bollywood Film Production) भव्य प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी। उन्होंने बताया कि जब यश जौहर ने उनसे फिल्म का शुरुआती बजट मांगा, तो उन्होंने महज 3 करोड़ रुपये का आंकड़ा एक कागज पर लिखकर उन्हें थमा दिया था। यश जौहर ने बिना किसी हिचकिचाहट के उस बजट को अपनी मंजूरी दे दी और फिल्म की शूटिंग की तैयारियां शुरू हो गईं।
‘बोले चूड़ियां’ गाने ने हिला दी थी बजट की नींव
फिल्म का सबसे चर्चित गाना ‘बोले चूड़ियां’ था, जिसमें फिल्म की पूरी मुख्य स्टारकास्ट एक साथ थिरकती नजर आई थी। इस गाने की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें (Bole Chudiyan Song BTS) 200 से अधिक प्रोफेशनल डांसर्स और 300 जूनियर आर्टिस्ट शामिल किए गए थे। करन जौहर को हर चीज इतनी ‘ग्रैंड’ चाहिए थी कि उन्होंने सेट के लिए खास तौर पर झूमर तक खुद तैयार करवाए थे। यह गाना केवल फिल्म का हिस्सा नहीं था, बल्कि भारतीय शादियों का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया, लेकिन इसकी शूटिंग के दौरान क्रू को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी।
सेट पर जब बेहोश हो गए थे करन जौहर
निखिल अडवानी ने याद किया कि ‘बोले चूड़ियां’ गाने का सेट काफी तनावपूर्ण और चुनौतियों से भरा था। काम के दबाव और भारी जिम्मेदारी के चलते (Karan Johar Health On Set) खुद डायरेक्टर करन जौहर सेट पर ही बेहोश हो गए थे। इतना ही नहीं, काजोल को अपने भारी लहंगे के साथ डांस करने में काफी दिक्कतें आ रही थीं। बावजूद इन तमाम बाधाओं के, पूरी टीम इस गाने को बेस्ट बनाने में जुटी रही। सेट पर मौजूद हर शख्स जानता था कि वे कुछ ऐसा बना रहे हैं जो इतिहास में दर्ज होने वाला है।
जब यश जौहर ने फाड़ दिया बजट का वो कागज
जैसे-जैसे शूटिंग आगे बढ़ी, फिल्म के खर्चों ने शुरुआती अनुमानों को बहुत पीछे छोड़ दिया। एक शाम चाय ब्रेक के दौरान यश जौहर ने निखिल अडवानी से फिर से (Film Production Costs India) बजट के बारे में सवाल किया। जब निखिल ने 3 करोड़ वाली बात दोहराई, तो यश जौहर हंसने लगे और बोले कि जितना खर्च तुमने पूरी फिल्म के लिए लिखा था, उससे कहीं ज्यादा पैसा तो सिर्फ ‘बोले चूड़ियां’ गाने के सेट पर लग चुका है। उन्होंने बड़े ही फिल्मी अंदाज में उस पुराने बजट वाले कागज को फाड़ दिया और टीम से कहा कि अब खुलकर फिल्म बनाओ, पैसों की चिंता छोड़ दो।
फिल्म बनाने का वो पुराना पागलपन और जुनून
निखिल अडवानी का मानना है कि पहले के फिल्मकारों में सिनेमा के प्रति एक अलग ही नशा हुआ करता था। वे केवल मुनाफा नहीं देखते थे, बल्कि एक विजन को पर्दे पर उतारने के लिए (Classic Bollywood Filmmaking Style) अपनी संपत्ति तक दांव पर लगाने को तैयार रहते थे। यश जौहर और यश चोपड़ा जैसे दिग्गज निर्देशकों ने कई बार फिल्मों के लिए अपने घर तक बेचने का मन बना लिया था। उनके लिए कला हमेशा व्यापार से ऊपर रही, और यही कारण है कि उनकी फिल्में दशकों बाद भी लोगों के दिलों को छू जाती हैं।
सिनेमाई विरासत को आगे बढ़ाते आज के दिग्गज
निखिल का कहना है कि आज के दौर में उस भव्यता और इमोशन को वापस लाने की ताकत सिर्फ दो ही लोगों के पास है। उन्होंने (Aditya Chopra and Karan Johar Legacy) यश चोपड़ा के बेटे आदित्य चोपड़ा और यश जौहर के बेटे करन जौहर का जिक्र करते हुए कहा कि ये दोनों ही अपनी विरासत को पूरी शिद्दत से आगे बढ़ा रहे हैं। जिस तरह ‘कभी खुशी कभी गम’ ने एक बेंचमार्क सेट किया था, आज भी ये डायरेक्टर्स भारतीय दर्शकों को वो ‘लार्जर दैन लाइफ’ अनुभव देने की कोशिश कर रहे हैं जो कभी उनके पिताओं ने शुरू किया था।
23 साल बाद भी ‘कभी खुशी कभी गम’ का जादू बरकरार
आज जब हम इस फिल्म को दोबारा देखते हैं, तो इसकी चमक फीकी नहीं लगती। चाहे वह करीना कपूर का ‘पू’ वाला किरदार हो या शाहरुख-काजोल की केमिस्ट्री, हर चीज (Hindi Cinema Cult Classics) आज के पॉप कल्चर का हिस्सा है। 3 करोड़ के बजट से शुरू होकर करोड़ों की कमाई करने वाली इस फिल्म ने यह साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ हो और विजन बड़ा, तो आंकड़े मायने नहीं रखते। ‘कभी खुशी कभी गम’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि बॉलीवुड के उस स्वर्णिम दौर की याद है जब भव्यता और भावनाएं साथ-साथ चलती थीं।



